शिक्षा मंत्रालय
केंद्रीय वित्तपोषित संस्थानों का शोध परिणाम
प्रविष्टि तिथि:
05 AUG 2026 5:51PM by PIB Delhi
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शोध को एक मूलभूत आवश्यकता मानते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) उच्च शिक्षण संस्थानों(एचईआई) से शोध एवं नवाचार पर विशेष ध्यान देने का आह्वान करती है। इसके लिए स्टार्टअप इनक्यूबेशन केंद्रों, प्रौद्योगिकी विकास केंद्रों, अनुसंधान के अग्रणी क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग तथा मानविकी और सामाजिक विज्ञान सहित अंतःविषयक शोध को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।
इसके अलावा, देश में अनुसंधान और विकास पर सकल व्यय(जीआरडी) वर्षों से लगातार बढ़ रहा है और यह वित्त वर्ष 2010-11 में ₹60,196.75 करोड़ से दोगुने से भी अधिक होकर वित्त वर्ष 2020-21 में ₹1,27,380.96 करोड़ हो गया है। सरकार ने शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रमुख तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान(एनआईटी), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईआईटी), भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान(आईआईएसईआर) और भारतीय विज्ञान संस्थान(आईआईएशसी) के लिए पिछले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26) के दौरान ₹99,494.24 करोड़ स्वीकृत भी किए गए हैं। व्यापक तौर पर, इन उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध गतिविधियां स्वास्थ्य सेवा और मेडटेक, उन्नत कंप्यूटिंग(सुपरकंप्यूटिंग, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग), सेमीकंडक्टर, उन्नत सामग्री, दुर्लभ मृदा एवं महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष एवं रक्षा तथा ब्लू इकोनॉमी आदि जैसे क्षेत्रों को कवर करती हैं।"
पिछले दशक के दौरान, भारत के अनुसंधान(शोध) पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मान्यता प्राप्त हुई है, जो निम्नलिखित उपलब्धियों से परिलक्षित होती है:
(i) वैश्विक नवाचार सूचकांक(जीआईआई) में भारत की रैंकिंग में सुधार, वर्ष 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर वर्ष 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है।
(ii) संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन(एनएसएफ) के अनुसार, वर्ष 2010 में 7वें स्थान की तुलना में वर्ष 2022 में कुल विज्ञान और इंजीनियरिंग प्रकाशनों के मामले में विश्व स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है।
(iii) विश्व बौद्धिक संपदा संगठन(डब्ल्यूआईपीओ) के अनुसार, पेटेंट आवेदनों की संख्या में वर्ष 2013 की 8वीं स्थिति में सुधार करते हुए, वर्ष 2022 में विश्व स्तर पर 6वां स्थान हासिल किया है।
(iv) अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी एक नज़र में 2022–23 की रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञान और इंजीनियरिंग में दी जाने वाली पीएचडी की संख्या के मामले में भारत विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए, सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में प्रधानमंत्री अनुसंधान फेलोशिप(पीएमआरएफ) योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करना है। इस योजना के लिए कुल 1,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत चयनित शोधार्थियों को फेलोशिप और अनुसंधान अनुदान सहित उन्नत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे भारत के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में उच्च स्तरीय शोध कर सकें। पीएमआरएफ योजना के अंतर्गत अब तक 3,688 शोधार्थियों को प्रवेश दिया गया है।
इसके अलावा, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन(एएनआरएफ) की स्थापना एएनआरएफ अधिनियम, 2023 के तहत फरवरी 2024 में की गई। इसके लिए 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करना है। इसमें निजी क्षेत्र से बजट योगदान के महत्वपूर्ण हिस्से को शामिल करने का प्रावधान भी किया गया है। सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 1 लाख करोड़ रुपये की पहल के साथ अनुसंधान विकास एवं नवाचार(आरडीआई) योजना की भी शुरूआत की है। यह योजना भारत के अनुसंधान एवं विकास(आर-एंड-डी) परिदृश्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नेट-जेआरएफ जैसी अनुसंधान फेलोशिप/छात्रवृत्ति योजनाएं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) द्वारा लागू की जाती हैं, जिनका उद्देश्य शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त करने हेतु उन्नत अध्ययन एवं अनुसंधान करने के अवसर प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों द्वारा भी पीएच.डी. कर रहे शोधार्थियों को सहायता प्रदान करने के लिए फेलोशिप उपलब्ध कराया जाता है। अनुसूचित जाति(एससी), अनुसूचित जनजाति(एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी), दिव्यांगजन(PwD) तथा एकल बालिका के लिए विशेष फेलोशिप की व्यवस्था की गई है। पीएच.डी. शोधार्थी विभिन्न वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा विश्वविद्यालयों को स्वीकृत अनुसंधान परियोजनाओं में शामिल होने तथा अपने शोध कार्य को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र होते हैं, जिससे वे सफलतापूर्वक पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त कर सकें।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2295208)
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