कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
पूर्व शिक्षण की मान्यता
प्रविष्टि तिथि:
05 AUG 2026 4:14PM by PIB Delhi
भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न स्कीमों अर्थात् प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन स्कीम (एनएपीएस) के अंतर्गत विस्तृत कौशल विकास केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से तथा शिल्पकार प्रशिक्षण स्कीम (सीटीएस) के अंतर्गत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से देश के सभी वर्गों को कौशलीकरण, पुनर्कौशलीकरण तथा कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रदान किए गए कौशल उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप हों और इस प्रकार शिक्षुता और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकें, एमएसडीई ने देश भर में निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विनियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी उद्योग निकायों को अवार्डिंग बॉडीज (एबी) और/या मूल्यांकन एजेंसियों (एए) के रूप में मान्यता देता है।
- अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं तैयार करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार चिन्हित व्यवसायों के साथ संरेखित करें तथा उद्योग से मान्यता प्राप्त करें। एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 10209 योग्यताओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 2975 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं तथा 7234 योग्यताएं संग्रहीत हैं।
- प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) आईटीआई के छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी समझौता ज्ञापन स्कीम और प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है।
- राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, ऑटोडेस्क, एडब्ल्यूएस, शेल आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
- पीएमकेवीवाई के अंतर्गत, नए युग/भविष्य के कौशल से संबंधित जॉब रोल्स को विशेष रूप से उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप खासकर एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
- डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क, एआई प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, ड्रोन प्रौद्योगिकी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- उद्योग के लिए तैयार कार्यबल को उभरते आर्थिक अवसरों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में अहमदाबाद और मुंबई में दो (02) भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 में व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ अधिक एकीकृत करने और अकादमिक एवं व्यावसायिक शिक्षा के बीच सुगम परिवर्तन को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, यूजीसी और एआईसीटीई के सहयोग से विकसित शिक्षुता-आधारित डिग्री कार्यक्रम (एईडीपी) डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों में नामांकित छात्रों को उनके पाठ्यचर्या के अभिन्न अंग के रूप में शिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। यह कार्यक्रम रोजगार क्षमता को बढ़ाता है, परिणाम-आधारित अधिगम को बढ़ावा देता है, उद्योग-अकादमिक संबंधों को सुदृढ़ करता है और उद्योग-संबंधी कौशल प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है।
- मंत्रालय द्वारा देशभर में आयोजित रोजगार मेलों तथा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेलों के माध्यम से प्रमाणित अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में कौशल की कमी को दूर करने के लिए तैयार और लागू किए जाते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए, संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के अग्रणियों के नेतृत्व में 36 एसएससी (सेक्टर कौशल समितियां) स्थापित की गई हैं, जिन्हें संबंधित सेक्टरों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है। उभरती हुई औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को संरेखित करने के लिए मंत्रालय उद्योग, सेक्टर कौशल परिषदों (एसएससी), नियोजकों तथा अन्य हितधारकों के साथ निरंतर संवाद एवं परामर्श करता है। स्थानीय तथा क्षेत्रीय स्तर पर कुशल जनशक्ति की मांग का आकलन करने के लिए कौशल अंतर अध्ययन तथा जिला कौशल विकास योजनाएँ (डीएसडीपी) तैयार की जाती हैं। इन अध्ययनों से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग उद्योग की मांग तथा कार्यबल की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना बनाने एवं उनके कार्यान्वयन में किया जाता है। उद्योग की परिवर्तित आवश्यकताओं को परिलक्षित करने के लिए योग्यता पैकेज तथा राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों की समय-समय पर समीक्षा कर उन्हें अद्यतन किया जाता है। विकसित हो रही कौशल आवश्यकताओं को इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाचर्या और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न सेक्टरों की जरूरतों के अनुरूप ढाला जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) के अंतर्गत सरकार समर्थित शिक्षुता पहलों ने विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को उद्योग-संगत ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण तथा व्यावहारिक कार्यानुभव उपलब्ध कराकर उनके रोजगार परिणामों में सुधार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एनएपीएस के अंतर्गत प्रदान किया जाने वाला शिक्षुता प्रशिक्षण शिक्षुओं को कार्यस्थल पर व्यावहारिक अनुभव तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान करता है, जिससे उनकी नियोजन-योग्यता तथा रोजगार के लिए तत्परता में वृद्धि होती है। हालाँकि, शिक्षु अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार, शिक्षुता प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत शिक्षुओं को नियमित रोजगार प्रदान करना नियोजकों के लिए कोई वैधानिक दायित्व नहीं है।एनएपीएस के अंतर्गत सेक्टर कौशल परिषदों (एसएससी), उद्योग संघों, प्रतिष्ठानों तथा अन्य हितधारकों के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि शिक्षुता के अवसर विभिन्न क्षेत्रों की कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किए जा सकें तथा श्रम बाजार में मांग एवं आपूर्ति के मध्य विद्यमान अंतर को कम किया जा सके।शिक्षुता प्रशिक्षण उद्योग के नेतृत्व में होता है तथा कार्यस्थल पर संचालित किया जाता है, जिससे प्रतिष्ठानों को अपनी परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कार्यबल विकसित करने में सहायता मिलती है। क्षेत्र कौशल परिषदें (एसएससी) उद्योग के साथ समन्वय स्थापित करने, शिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय स्तर पर जागरूकता एवं प्रसार सुनिश्चित करने तथा वैकल्पिक ट्रेडों (ऑप्शनल ट्रेड्स) के क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करती हैं। इनमें उभरते हुए तथा तीव्र गति से विकसित हो रहे क्षेत्रों से संबंधित ट्रेड भी सम्मिलित हैं।
अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एजेएनआईएफ़एम) द्वारा किए गए पीएमकेवीवाई 4.0 के स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन के अनुसार, पूर्व अधिगम मान्यता (आरपीएल) के 48.9% उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद आय में वृद्धि की सूचना दी। एजेएनआईएफएम द्वारा किए गए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, नियोजन-योग्यता तथा उद्योग की सहभागिता के संबंध में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए। मूल्यांकन में यह भी पाया गया कि लगभग 72 प्रतिशत शिक्षुओं को शिक्षुता प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत पूर्णकालिक रोजगार का प्रस्ताव प्राप्त हुआ। मूल्यांकन में शिक्षुओं तथा प्रतिष्ठानों के बीच उच्च स्तर की संतुष्टि भी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि शिक्षुता प्रशिक्षण प्रशिक्षण से रोजगार की ओर सुगम संक्रमण सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कुशल जनशक्ति की उपलब्धता का भी समर्थन कर रहा है।
कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
पीके/केसी/एसकेएस/केके
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(रिलीज़ आईडी: 2294958)
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