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दिपका ओसी: बड़े पैमाने पर, कम लागत और कम समय में बेहतर उत्पादन के साथ काम करने की क्षमता और टिकाऊ खनन के माध्यम से भारत के विकास को गति

प्रविष्टि तिथि: 04 AUG 2026 12:53PM by PIB Delhi

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) का दिपका ओसीपी भारत के कोयला खनन क्षेत्र के उल्लेखनीय परिवर्तन का ज्वलंत उदाहरण है। दिपका ओसीपी में 1992 में उत्पादन केवल 10 लाख टन कोयले के उत्पादन से शुरू हुआ था और अब यह देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक परिसरों में से एक बन गया है जिसने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 375 लाख टन का सर्वकालिक उच्च उत्पादन और 3943 लाख टन का प्रेषण दर्ज किया है। हाल ही में पर्यावरण संबंधी स्वीकृति को बढ़ाकर 40 मीट्रिक टन प्रति वर्ष कर दिए जाने और 60 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के लक्ष्य की ओर सुस्पष्ट कार्ययोजना के साथ दिपका ओसीपी आज रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में खड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर कम लागत और कम समय में बेहतर उत्पादन के साथ काम करने की क्षमता और स्थिरता को समान रूप से समाहित है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की मजबूत शुरूआत

दिपका ओसी ने विगत वर्ष के रिकॉर्ड प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए चालू वित्तीय वर्ष की शुरूआत भी उतनी ही प्रभावशाली गति से की है।

25 जुलाई 2026 तक इस खदान ने 126.6 लाख टन कोयले का उत्पादन किया जो प्रगतिशील उत्पादन लक्ष्य का 104 प्रतिशत है। इससे भी अधिक उत्साहजनक यह है कि विगत वर्ष की इसी अवधि की तुलना में यहां कोयला उत्पादन में 30.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है जो खदान की उत्पादकता और उपकरणों के उपयोग में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाती है। यहां से कोयले की आपूर्ति भी उतनी ही मजबूत रही है जो 138.7 लाख टन तक पहुंच गई है। इसने प्रगतिशील लक्ष्य को पार करते हुए 109 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की है जिससे तापीय ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित हुई।

कोयला उत्पादन और प्रेषण के बीच निर्बाध समन्वय दिपका की परिचालन संबंधी परिपक्वता को दर्शाता है जहां खनन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स अलग-अलग गतिविधियों के बजाय एकीकृत मूल्य श्रृंखला के रूप में कार्य करते हैं।

उत्पादन से आगे बढ़कर मूल्य सृजन

यद्यपि उत्पादन खनन के प्रदर्शन का प्रमुख संकेतक बना हुआ है, लेकिन दिपका की सफलता उसके वित्तीय योगदान में भी समान रूप से परिलक्षित होती है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस खदान ने कुल 3,230.91 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया, जिससे यह एसईसीएल के मुनाफा वाले सबसे मजबूत केंद्रों में से एक बन गया। लाभ प्राप्त करने की क्षमता में सुधार न केवल उच्च उत्पादन के कारण हुआ है बल्कि लागत के बेहतर प्रबंधन और परिचालन दक्षता में वृद्धि के कारण भी हुआ है। प्रति टन लाभ बढ़कर 827 रुपये हो जाने के साथ ही खदान ने यह प्रदर्शित किया है कि परिचालन लागत में आनुपातिक वृद्धि के बिना बड़े पैमाने पर उत्पादन हासिल किया जा सकता है। ये वित्तीय परिणाम कोल इंडिया लिमिटेड की समग्र लाभप्रदता में दिपका के बढ़ते योगदान पर बल देते हैं।

भविष्य के विकास की नींव को मजबूत करना

दिपका की प्रभावशाली उत्पादन क्षमता के पीछे कई रणनीतिक पहलें हैं जिन्होंने खदान की दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ किया है। इनमें से भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास दीर्घकालिक क्षमता विस्तार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं।

मालगांव ग्राम पर सफलतापूर्वक कब्जे के बाद इस क्षेत्र ने हरदी बाजार के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है जो इस क्षेत्र में ऐसी सबसे बड़ी और सबसे जटिल पहलों में से एक है। दिपका ने पुनर्वास को केवल वैधानिक दायित्व मानने के बजाय विकासोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाते हुए सुनियोजित पुनर्वास टाउनशिप का विकास शुरू किया है जिसमें सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामुदायिक सुविधाएं और सार्वजनिक उपयोगिताएं जैसी आवश्यक नागरिकों के लिए बुनियादी ढांचागत सुविधाएं हैं। इस सहभागी और पारदर्शी दृष्टिकोण ने खनन के लिए भूमि की उपलब्धता को प्रगतिशील रूप से सुगम बनाया है और साथ ही हितधारकों के विश्वास और परियोजना की सामाजिक स्वीकृति को भी मजबूत किया।

भारी मात्रा में उत्पादन में सहयोग के लिए अवसंरचना

बड़े पैमाने पर खनन के लिए उतनी ही मजबूत निकासी अवसंरचना की आवश्यकता होती है। दिपका में कोल इंडिया लिमिटेड की सबसे विविध कोयला निकासी प्रणालियों में से एक है जिसमें एमजीआर से जुड़े साइलो, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) साइलो, रेलवे लोडिंग सुविधाएं और सड़क परिवहन प्रणालियां शामिल हैं। यह एकीकृत नेटवर्क परिचालन की सामर्थ्य प्रदान करता है और एनटीपीसी सिपट तथा पश्चिमी और मध्य भारत के कई तापीय ऊर्जा संयंत्रों सहित प्रमुख उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करता है। कुशल निकासी ने यह सुनिश्चित किया है कि बढ़ते उत्पादन को खदान के मुहाने पर स्टॉक जमा किए बिना उपभोक्ताओं को अधिक आपूर्ति में तुरंत परिवर्तित किया जा सके।

प्रौद्योगिकी से उत्पादकता को प्रोत्साहन

दिपका की उल्लेखनीय उत्पादन यात्रा प्रौद्योगिकी और आधुनिकीकरण में निरंतर निवेश से प्रेरित रही है।

इस खदान ने 42 घन मीटर के इलेक्ट्रिक रोप शॉवेल, उच्च क्षमता वाले सरफेस माइनर, लंबी इन-पिट बेल्ट कन्वेयर सिस्टम, उन्नत साइलो लोडिंग सुविधाएं, ड्रोन आधारित खदान निगरानी और डिजिटल खदान प्रबंधन प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों से अपनी खनन प्रणालियों को लगातार उन्नत किया है। इन तकनीकों ने उपकरणों की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार किया है, खदान नियोजन को अनुकूलित किया है, परिचालन में लगने वाले समय को घटाया है और खनन गतिविधियों की निगरानी को मजबूत किया है। उत्पादन की मात्रा में निरंतर वृद्धि के साथ प्रौद्योगिकी उन प्रमुख कारकों में से एक बनी हुई है जो दिपका को उच्च परिचालन दक्षता कायम रखने में सक्षम बनाती है।

सतत विकास के लिए उत्तरदायित्वपूर्ण खनन

दिपका ने यह प्रदर्शित किया है कि उच्च उत्पादन कार्य और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

इस क्षेत्र में कई पहलें लागू की गई हैं जिनमें सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (सीएएक्यूएमएस), बौछारों के माध्यम से धूल नियंत्रण, व्हील वॉशिंग प्रणाली, वृक्षारोपण अभियान, इलेक्ट्रिक वाहनों की तैनाती और प्लास्टिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण सुविधाएं शामिल हैं। इन उपायों से पर्यावरण प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है और खनन कार्यों की समग्र स्थिरता में सुधार हुआ है। एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से डिजिटल पर्यावरण निगरानी ने नियामक अनुपालन और परिचालन पारदर्शिता में और वृद्धि की है।

इसके साथ ही, व्यवस्थित पुनर्वास और आधुनिक पुनर्वास अवसंरचना के विकास ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के साथ रचनात्मक जुड़ाव बनाए रखते हुए भविष्य में खनन के लिए समय पर भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित की है। इस संतुलित दृष्टिकोण ने क्षेत्र के दीर्घकालिक उत्पादन संबंधी दृष्टिकोण को काफी मजबूत किया है।

4 करोड़ टन से आगे निगाहें

पर्यावरण संबंधी मंजूरी को हाल ही में बढ़ाकर 40 मीट्रिक टन प्रति वर्ष करना दिपका के विकास के अगले चरण की शुरुआत का प्रतीक है न कि उसकी सफलता का अंतिम पड़ाव। भूमि अधिग्रहण में प्रगति, पुनर्वास के जारी रहने, बुनियादी ढांचे में सुधार और 60 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक विस्तार की स्पष्ट योजना के साथ खदान में निरंतर उच्च प्रदर्शन के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं।

दिपका की यात्रा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कैसे वैज्ञानिक दृष्टि से निर्मित खान योजना, तकनीकी नवाचार, वित्तीय अनुशासन और उत्तरदायित्वपूर्ण खनन मिलकर विश्व स्तरीय खनन कार्य का निर्माण कर सकते हैं। दिपका कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख उत्पादक खानों में से एक के रूप में, उत्पादन, लाभप्रदता, परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व संबंधी क्षेत्रों में नए मानदंड स्थापित करना जारी रखे हुए है और साथ ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा में निरंतर योगदान दे रहा है।

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पीके/केसी/केके/एसके    


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