पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
मंत्रिमंडल ने प्रमुख बंदरगाहों में बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों (पीडीआई) को जलक्षेत्र और उससे संबंधित भूमि को आवंटित करने की संशोधित नीति को मंजूरी दी
संशोधित नीति मौजूदा निर्भर उपयोगकर्ताओं को सरकारी संस्थाओं के लिए 30 वर्ष तक बढ़ी हुई निर्भर जरूरतों के तहत नए बर्थ/ जेट्टी/ टर्मिनल/ सिंगल बॉय मूरिंग (एसबीएम) जोड़ने की मंजूरी देती है
प्रमुख बंदरगाहों पर क्षमता विस्तार के नए अवसर खोलने के लिए आरओएफआर के साथ प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाई जाएगी
नई नीति के तहत सरकारी संस्थाओं को तटवर्ती क्षेत्र तक सीधी पहुंच मिलेगी
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2026 7:38PM by PIB Delhi
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों को जलक्षेत्र और उससे संबंधित भूमि को आवंटित करने की संशोधित नीति (कैप्टिव नीति) को मंजूरी दे दी है, जिसमें सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के जरिए निजी निवेश को गति देने, कार्यान्वयन के लिए लचीलेपन में सुधार करने और भारत के प्रमुख बंदरगाहों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से कई सुधार प्रस्तुत किए गए हैं।
संशोधित नीति 2016 की मौजूदा निर्भरता नीति को अपडेट करती है, जिससे मौजूदा निर्भर उपयोगकर्ताओं को नए बर्थ, जेट्टी, टर्मिनल और सिंगल बॉय मूरिंग (एसबीएम) के माध्यम से क्षमता का विस्तार करने में मदद मिलती है, साथ ही रियायत समझौतों को बढ़ाने, पात्र सरकारी संस्थाओं को जलक्षेत्र आवंटित करने और बदलते व्यावसायिक और नियामक स्थितियों से पैदा होने वाले बदलावों को संबोधित करने के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान किया जाता है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि संशोधित नीति बंदरगाह आधारित औद्योगिक विकास के लिए एक पूर्वानुमानित, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल फ्रेमवर्क तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
"संशोधित कैप्टिव नीति एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो निवेशकों के भरोसे और जनहित के मध्य संतुलन स्थापित करती है। मौजूदा संचालकों को दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान करके, क्षमता विस्तार को आसान बनाकर और भविष्य के निवेशों के लिए एक पारदर्शी फ्रेमवर्क तैयार कर, हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत को वैश्विक व्यापार और रसद केंद्र के तौर पर उभरने में सहयोग देने के लिए भारत के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहे हैं," सोणोवाल ने कहा।
इस नीति से निवेशकों को अधिक निश्चितता मिलने, क्षमता में बढ़ोतरी को प्रोत्साहन मिलने और बंदरगाह क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की उम्मीद है, और सरकार पर इसका कोई वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।
प्रमुख सुधारों में से एक के अंतर्गत प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरणों को मौजूदा बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों (पीडीआई) के रियायत समझौतों को बिना किसी नई निविदा प्रक्रिया के 30 वर्ष तक नवीनीकृत या विस्तारित करने की अनुमति दी गई है। नवीनीकरण प्रचलित बाजार दर या मौजूदा रियायत समझौते के अंतर्गत देय अनुक्रमित राजस्व, दोनों में से जो भी अधिक हो, उस पर किया जाएगा, जिससे बंदरगाह के राजस्व की रक्षा होगी और निवेशकों को दीर्घकालिक निश्चितता मिलेगी।
इस नीति के तहत मौजूदा निर्भर उपयोगकर्ताओं की ओर से क्षमता विस्तार के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र भी तैयार किया गया है। प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से मूल्य निर्धारण करेंगे, साथ ही मौजूदा रियायतग्राही को उच्चतम बोली के बराबर बोली लगाने का प्रथम अस्वीकृति अधिकार (आरओएफआर) प्रदान करेंगे। भागीदारी समान कार्गो प्रोफाइल संभालने वाले पात्र बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों तक ही सीमित रहेगी, जिससे कार्यान्वयन की निरंतरता बनाए रखते हुए प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित होगा। रियायत अवधि बढ़ाने के लिए विस्तार मार्ग के दुरुपयोग को रोकने के लिए, विस्तार प्रस्ताव के अंतर्गत विकसित किसी भी अतिरिक्त बर्थ या टर्मिनल की रियायत अवधि मौजूदा सुविधा की अधिकतम मंजूर की गई रियायत अवधि के साथ ही समाप्त होगी।
सरकारी निकायों के लिए जलमार्ग तक पहुंच
पहली बार, यह नीति पात्र सरकारी संगठनों को प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया का सहारा लिए बिना, उपलब्धता और निर्धारित सुरक्षा उपायों के अंतर्गत, जलक्षेत्र और संबंधित भूमि आवंटित करने के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान करती है। पात्र संस्थाओं में केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, वैधानिक प्राधिकरण, स्वायत्त निकाय, केंद्र और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसयू और एसपीएसयू), और उर्वरक, खाद्य, पेट्रोलियम, तेल और गैस, कोयला, इस्पात और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की ओर से अधिसूचित अन्य क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी नियंत्रण वाले संयुक्त उद्यम शामिल हैं। रियायतें अधिसूचित न्यूनतम मूल्य पर आवंटित की जाएंगी।
वैश्विक व्यापार की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, संशोधित नीति में कानून में बदलाव और अप्रत्याशित घटनाओं के लिए प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे नियामक परिवर्तनों या अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण परियोजना की व्यवहार्यता प्रभावित होने पर व्यावसायिक योजनाओं और कार्गो प्रोफाइल को संशोधित किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, "समुद्री क्षेत्र एक गतिशील वैश्विक वातावरण में काम करता है। यह नीति निवेश, व्यापार और बंदरगाह संचालन की निरंतरता सुनिश्चित करते हुए बदलती हकीकतों के अनुकूल होने के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करती है।"
संशोधित नीति निवेशकों को दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान करके, औद्योगिक मांग के अनुरूप क्षमता विस्तार को सक्षम बनाकर और कैप्टिव सुविधाओं के लिए अधिक कार्यान्वयन संबंधी लचीलापन लाकर 2016 के फ्रेमवर्क में मौजूद प्रमुख कमियों को दूर करती है। यह निर्धारित लॉक-इन अवधि के बाद, या कानून में बदलाव के कारण आवश्यक होने पर तुरंत, कार्गो प्रोफाइल में बदलाव की अनुमति भी देती है, जिससे गतिशील वैश्विक व्यापारिक वातावरण में व्यावसायिक निरंतरता सुनिश्चित होती है।
सरकार को उम्मीद है कि इन सुधारों से बंदरगाह के इंफ्रास्ट्रक्चर में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी, बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों के लिए रसद संबंधी जोखिम कम होंगे और बंदरगाह आधारित औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से रोजगार निर्माण होगा।
यह नीति सभी प्रमुख बंदरगाहों पर निर्भर सुविधाओं के लिए लागू की जाएगी और इससे माल ढुलाई में सुधार होने, तटवर्ती संपत्तियों का अधिकतम इस्तेमाल होने और भारत सरकार पर बिना किसी वित्तीय दबाव के बंदरगाहों के लिए निरंतर राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है।
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पीके/केसी/एमएम/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2292828)
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