पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति और समुद्री विकास निधि
प्रविष्टि तिथि:
28 JUL 2026 4:46PM by PIB Delhi
जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस), जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति (एसबीएफएपी) का विस्तार है, जिसमें वैश्विक शिपयार्डों की तुलना में भारतीय शिपयार्डों द्वारा लागत संबंधी नुकसान को दूर करने के लिए 24,736 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 25,000 करोड़ रुपये की कुल राशि से समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) की स्थापना की गई है। इसमें 20,000 करोड़ रुपये का समुद्री निवेश कोष (एमआईएफ) और 5,000 करोड़ रुपये का ब्याज प्रोत्साहन कोष (आईआईएफ) शामिल है।
एसबीएफएएस को लागू करने के लिए योजना दिशानिर्देश 26 दिसंबर 2025 को जारी किए गए हैं और योजना दिशानिर्देशों के अनुसार जहाज निर्माण वित्तीय सहायता के लिए सैद्धांतिक स्वीकृतियां प्रदान की जाती हैं। एमडीएफ के लिए दिशानिर्देश भी 20 फरवरी 2026 को जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड को 26 मई 2026 को एमआईएफ के लिए कोष प्रबंधक नियुक्त किया गया है।
एसबीएफएएस और एमडीएफ को समुद्री अमृत काल विजन 2047 के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसका लक्ष्य है कि भारत 2030 तक जहाज स्वामित्व और जहाज निर्माण के क्षेत्र में शीर्ष 10 देशों में तथा 2047 तक शीर्ष 5 देशों में शामिल हो। एसबीएफएएस जहाज निर्माण की लागत को कम करके भारतीय शिपयार्डों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार करता है, जबकि एमडीएफ शिपयार्डों और समुद्री अवसंरचना के लिए दीर्घकालिक वित्त पोषण उपलब्ध कराता है। ये दोनों पहलें मिलकर घरेलू और निर्यात-उन्मुख जहाज निर्माण को प्रोत्साहित करती हैं तथा समग्र समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाती हैं, जिससे ये भारत की जहाज निर्माण संबंधी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में प्रमुख सहायक बनती हैं।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल द्वारा राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी गई।
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पीके/केसी/जेएस
(रिलीज़ आईडी: 2290669)
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