गृह मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सीएफसीएफआरएमएस 2.0 प्लेटफ़ॉर्म

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 3:20PM by PIB Delhi

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तहत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया। I4C द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार 30.06.2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई जा चुकी है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' भी शुरू किया गया है।

साइबर अपराध शिकायतों से निपटने में परिचालन दक्षता को और मजबूत करने और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। यह एसओपी शिकायत प्रोसेसिंग, बैंक समन्वय, शिकायत निवारण, रकम रोकने के निर्देश को हटाने और एनसीआरपी के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर सही दावेदारों को धोखाधड़ी वाली धनराशि की बहाली के लिए एक मानकीकृत ढांचा तैयार करती है। पीडितों को धोखाधडी के पैसे की शीघ्र बहाली के लिए धन बहाली मॉड्यूल और बैंक खातों को फ्रीज करने और राशि की लियन मार्किंग से संबंधित शिकायतों का समय पर निवारण के लिए शिकायत निवारण मॉड्यूल अप्रैल 2026 से चालू कर दिए गए हैं।

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे अपने विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्यम से अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन करें, जिसमें साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना भी शामिल है। केंद्र सरकार एलईए के क्षमता निर्माण हेतु विभिन्न योजनाओं के तहत सलाह और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पहलों को सहयोग प्रदान करती है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज साइबर अपराध की घटनाओं, उन्हें एफआईआर में परिवर्तित करने और उसके बाद की कार्रवाई, जैसे कि आरोपपत्र दाखिल करना, गिरफ्तारी और शिकायतों का समाधान, संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।

I4C द्वारा बैंकों/वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10.09.2024 को साइबर अपराधियों के पहचानकर्ताओं की एक ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ शुरू की गई। 30.06.2026 तक, बैंकों से प्राप्त 30.48 लाख से अधिक सस्पेक्ट पहचानकर्ता डेटा और 32.08 लाख लेयर 1 (बिना लाइसेंस वाले फर्जी खाते) को सस्पेक्ट रजिस्ट्री की भागीदार संस्थाओं के साथ साझा किया गया है, जिससे 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन रोके गए।

सीईआरटी-आईएन लगातार नवीनतम साइबर खतरों/कमजोरियों के संबंध में अलर्ट और सलाह जारी करता है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके किए गए दुर्भावनापूर्ण हमले और कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले जवाबी उपाय शामिल हैं।

आवश्यक निवारण हेतु दुर्भावनापूर्ण डोमेन और फ़िशिंग गतिविधियों का पता लगाने के लिए सीईआरटी-आईएन द्वारा एआई संचालित स्थितिजन्य जागरूकता प्रणालियों को तैनात किया जाता है।

सीईआरटी-आईएन एक स्वचालित साइबर खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने वाला मंच संचालित करता है, जिसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों के संगठनों के साथ अनुकूलित अलर्ट साझा करने और खतरों को पहले से ही कम करने के लिए किया जाता है।

गृह मंत्रालय ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी)' योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण हेतु 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इस सहायता का उद्देश्य साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना है। महाराष्ट्र सहित 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं और 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि का प्रशिक्षण दिया गया है।

अत्याधुनिक राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र (पूर्व में राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (जांच) {एनसीएफएल(आई)}) की स्थापना (I4C) के अंतर्गत नई दिल्ली (18.02.2019 को) और असम (29.08.2025 को) में की गई है। इसका उद्देश्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पुलिस के जांच अधिकारियों (आईओएस) को प्रारंभिक चरण में साइबर फोरेंसिक सहायता प्रदान करना है। 30.06.2026 तक राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र, नई दिल्ली ने साइबर अपराधों से संबंधित 14,064 से अधिक मामलों में राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।

वर्तमान में साइबर अपराध मामलों की जांच में सहायता के लिए देश भर में 7 केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और महाराष्ट्र सहित 28 राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में डीएनए विश्लेषण और साइबर फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए निर्भया वित्त पोषित योजना के तहत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान की गई है।

30.06.2026 तक भारत में कार्यरत 40 विदेशी बैंकों सहित कुल 1,586 संस्थाओं को सीएफसीएफआरएमएस प्लेटफॉर्म पर शामिल किया जा चुका है।

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री बांदी संजय कुमार ने यह जानकारी लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

*****

पीके/केसी/आईएम/एम 


(रिलीज़ आईडी: 2290637) आगंतुक पटल : 41
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu