सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए कल्याणकारी पहलों का विस्तार किया


राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत ₹63.67 करोड़ मूल्य के सहायक उपकरण वितरित किए गए; पूर्वोत्तर क्षेत्र में 11 पीएम दिव्याशा-वयोश्री केन्द्र संचालित

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 6:23PM by PIB Delhi

भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से असम तथा अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री रामदास आठवले ने राज्यसभा में श्री तेराश गोवाला द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया।

अटल वयो अभ्युदय योजना(एवीवाईएवाई) के तहत, मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम(आईपीएसआरसी) के माध्यम से जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को आवास, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल तथा मनोरंजन संबंधी सुविधाओं हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना जारी रखे हुए है। पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान, सिर्फ असम में आईपीएसआरसी के तहत 1.03 लाख से अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा तथा अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भी अनुदान सहायता के माध्यम से महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की गई है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना ने जन-जागरूकता कार्यक्रमों, मोतियाबिंद के ऑपरेशन तथा अन्य कल्याणकारी गतिविधियों में सहायता देकर राज्यों के नेतृत्व वाली पहलों को और अधिक मजबूत किया है। पिछले पांच वर्षों के दौरान, SAPSrC के अंतर्गत देशभर में ₹48 करोड़ से अधिक की संचयी वित्तीय सहायता जारी की गई है। इसके माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों को भी विभिन्न राज्य-विशिष्ट पहलों के माध्यम से लाभ प्राप्त हुआ है।

मंत्रालय राष्ट्रीय वयोश्री योजना(आरभीवाई) का भी क्रियान्वयन कर रहा है, इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा(बीपीएल) से नीचे जीवनयापन करने वाले अथवा ₹15,000 तक की मासिक आय वाले तथा आयु-संबंधी दिव्यांगताओं से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क सहायक जीवनोपयोगी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान, इस योजना के अंतर्गत पूर्वोत्तर क्षेत्र के 73,572 वरिष्ठ नागरिकों को ₹63.67 करोड़ मूल्य के 3,57,242 सहायक उपकरण वितरित किए गए।

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग कई प्रमुख योजनाओं को लागू कर रहा है। इनमें सहायक यंत्रों एवं उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों को सहायता(एडीआईपी), दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना, दिव्यांग अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की योजना(एसआईपीडीए), दिव्यांगजनों के कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना(एनएपी-एसडीपी), विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र(यूडूआईडी) और दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना(डीडीआरएस) शामिल है।

एडीआईपी योजना के तहत, असम में 71,131 लाभार्थियों को लाभ प्रदान किया गया, जिसके लिए ₹6,199.86 लाख की राशि का उपयोग किया गया। वहीं, समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस योजना के तहत 81,551 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों एवं सहायक साधनों का वितरण कर लाभान्वित किया गया।

मंत्रालय ने दिव्यांगजनों के लिए जागरूकता तथा प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु योजना(एसआईपीडीए) के जागरूकता सृजन एवं प्रचार-प्रसार(एजीपी) घटक के अंतर्गत वर्ष 2022-23 से 10 जुलाई, 2026 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में 26 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के लिए ₹1.01 करोड़ से अधिक का सहायता अनुदान दिया गया।

समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में दिव्यांग छात्रों को छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान, असम में दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना के विभिन्न घटकों के अंतर्गत 545 छात्रों को ₹2.01 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में दो क्रॉस डिसएबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर काम कर रहे हैं, जो सीआरसी गुवाहाटी(असम) तथा सीआरसी इम्फाल(मणिपुर) में स्थित हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान, दिव्यांग बच्चों को प्रारंभिक जांच, उपचारात्मक तथा पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के लिए सीआरसी गुवाहाटी को ₹72,07,540 तथा सीआरसी इम्फाल को ₹36,73,132 की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

इसके अलावा, नेशनल ट्रस्ट पूर्वोत्तर राज्यों में दिशा, समर्थ और निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करना जारी रखे हुए है। इस क्षेत्र में वर्तमान में असम में छह दिशा केंद्र और एक समर्थ केंद्र कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान निरामय योजना के तहत लाभार्थियों में असम के 331, मणिपुर के 493, मेघालय के 329, त्रिपुरा के 301, मिजोरम के 88, सिक्किम के 76, नागालैंड के 18 और अरुणाचल प्रदेश के 4 व्यक्ति शामिल थे।

पुनर्वास अवसंरचना से संबंधित प्रश्न के उत्तर में श्री रामदास आठवले ने बताया कि भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम(एलिम्को) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में 11 प्रधानमंत्री दिव्याशा-वयोश्री केंद्र स्थापित किए हैं। एलिम्को समय-समय पर अतिरिक्त केंद्रों की स्थापना की आवश्यकता का आकलन करता है तथा आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करता है।

मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को कल्याणकारी योजनाओं के एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से सुलभ स्वास्थ्य सेवा, पुनर्वास, शिक्षा, सहायक उपकरण, आजीविका के अवसर और सामाजिक सुरक्षा मिले; इसके माध्यम से सरकार समावेशी एवं न्यायसंगत विकास के अपने विजन को साकार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

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पीके/केसी/पीकेपी


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