अणु ऊर्जा विभाग
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संसदीय प्रश्न: परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

प्रविष्टि तिथि: 23 JUL 2026 3:57PM by PIB Delhi

आयातित यूरेनियम पर निर्भरता कम करने और भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षित रखने के लिए, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) अपने घरेलू यूरेनियम संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने तथा दीर्घकालिक सतत ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपने विशाल थोरियम भंडारों का दोहन करने हेतु तीन-चरण वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। क्लोज़्ड फ्यूल साइकिल पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पहले चरण में दबावयुक्त भारी जल रिएक्टरों (पीएचडब्लूआर) में प्राकृतिक यूरेनियम के उपयोग के माध्यम से घरेलू स्तर पर उपलब्ध फिसाइल संसाधन को बढ़ाना है; इसके बाद दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (एफबीआर) में पीएचडब्लूआर  के प्रयुक्त घरेलू ईंधन के रीप्रोसेसिंग से प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग करना है; तथा तीसरे चरण में थोरियम-232 से उत्पन्न यूरेनियम-233 के उत्पादन और उपयोग के माध्यम से थोरियम का बड़े पैमाने पर उपयोग करना है, जिससे स्थायी रूप से दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान की जा सके।

परमाणु कार्यक्रम का पहला चरण सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है और भारत ने स्वदेशी पीएचडब्लूआर के डिजाइन, निर्माण, कमीशनिंग, संचालन एवं रखरखाव, तथा ईंधन चक्र की फ्रंट एंड एवं बैक एंड में विशेषज्ञता हासिल कर ली है।

भारत ने तीन-चरण वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश तब किया जब स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर ने अप्रैल 2026 में अपनी पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण का मार्ग प्रशस्त करती है।

विभाग ने थोरियम के उपयोग के लिए निरंतर अनुसंधान और विकास  भी शुरू किया है। परिचालन में शामिल पीएचडब्लूआर की शुरुआती कोर में थोरियम ऑक्साइड (थोरिया) पेलेट्स का उपयोग किया गया है, और बीएआरसी के अनुसंधान रिएक्टरों में थोरिया-आधारित ईंधनों को इरैडिएट किया गया है। इरैडिएट की गई थोरिया पिनों का पुनर्मूल्यांकन करके यूरेनियम-233 प्राप्त किया गया है, जिसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर), कल्पक्कम में कामिनी रिएक्टर के लिए ईंधन के रूप में तैयार किया गया है। ईंधन प्रबंधन, रिएक्टर नियंत्रण और ईंधन उपयोग के संबंध में विभिन्न रिएक्टर प्रणालियों में थोरियम के उपयोग पर अध्ययन किए गए हैं।

साथ ही बीएआरसी मोल्टन साल्ट रिएक्टर (एमएसआर) पर अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) कर रहा है, जिसे टिकाऊ तरीके से थोरियम के उपयोग के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों में से एक के रूप में परिकल्पित किया गया है।

  • प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) आईजीसीएआर द्वारा डिजाइन किया गया एक स्वदेशी रिएक्टर है, जिसने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:20 बजे अपनी पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की है। यह भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस स्वदेशी रिएक्टर के मुख्य वास्तुकार के रूप में आईजीसीएआर ने डिजाइन, विकास, परीक्षण, नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने और कमीशनिंग के सभी चरणों में संपूर्ण तकनीकी आधार प्रदान किया। पीएफबीआर के प्रति आईजीसीएआर के योगदान के कुछ मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

· इंजीनियरिंग और परीक्षण: परियोजना के हर चरण में कड़े निरीक्षण के साथ-साथ सोडियम प्रणालियों, घटक असेंबली और उपकरण-प्रणाली के डिजाइन, विश्लेषण, परीक्षण और सत्यापन के लिए व्यापक सहायता सफलतापूर्वक प्रदान की।

· सामग्री और सोडियम प्रौद्योगिकी: विशेष परमाणु-ग्रेड सामग्रियों, उन्नत सुरक्षित सोडियम हैंडलिंग, सफाई तकनीकों, उपकरण-प्रणाली, नियंत्रण प्रणालियों को अंतिम रूप दिया और महत्वपूर्ण घटकों के लिए निर्माण प्रक्रियाओं को स्थापित किया।

· उपकरण योग्यता: रिएक्टर में उपयोग के लिए सभी आवश्यक सेंसरों, उपकरणों और साजो-सामान का कड़ाई से परीक्षण, फाइन-ट्यूनिंग और पूर्ण प्रमाणन किया।

· डिजाइन और सुरक्षा आकलन: रेडिएशन शील्डिंग, थर्मल हाइड्रोलिक्स और रिएक्टर भौतिकी के लिए इन-हाउस कंप्यूटेशनल कोड विकसित किए।

· स्वदेशीकरण: भारतीय उद्योगों के साथ व्यापक सहयोग और फास्ट रिएक्टर इकोसिस्टम के लिए आवश्यक कड़े गुणवत्ता मानकों को पूरा करने हेतु उद्योगों के मार्गदर्शन द्वारा पीएफबीआर के उपकरणों और प्रणालियों के लिए लगभग 90% घरेलू विनिर्माण हासिल किया।

· एकीकृत कमीशनिंग: एकीकृत कमीशनिंग के विभिन्न चरणों के दौरान तकनीकी सहायता और जनशक्ति प्रदान की गई तथा तालमेल एवं टीम वर्क के साथ चुनौतियों से पार पाया गया।

सुरक्षित प्रारंभिक ईंधन लोडिंग और क्रिटिकैलिटी तक पहली पहुँच सुनिश्चित करने के लिए आईजीसीएआर ने इसमें शामिल विभिन्न एजेंसियों के साथ सुचारू समन्वय स्थापित करते हुए कई अत्यधिक विशिष्ट कार्यों को निष्पादित किया:

  • कस्टम फ्यूल-हैंडलिंग सिस्टम्स: परमाणु ईंधन की सुरक्षित प्रारंभिक लोडिंग के लिए आवश्यक वर्टिकल डायरेक्ट फ्यूल-हैंडलिंग मशीनों की डिजाइनिंग, परीक्षण और कमीशनिंग की, साथ ही कमीशनिंग कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया।
  • अंडर-सोडियम अल्ट्रासोनिक इमेजिंग: अपारदर्शी तरल सोडियम के आर-पार सुरक्षित रूप से देखने के लिए निर्मित एक उन्नत अल्ट्रासोनिक इमेजिंग टूल को तैनात किया, जिससे ऑपरेटरों को रिएक्टर के आंतरिक तंत्र को देखने और सुचारू ईंधन लोडिंग में मदद मिली।
  • उच्च-तापमान रोबोटिक निरीक्षण: दिशा नामक एक रिमोट-नियंत्रित रोबोटिक वाहन का विकास और तैनाती की, जिसे विशेष रूप से उच्च तापमान पर रिएक्टर वेसल्स के बीच के स्थान में महत्वपूर्ण वेल्ड्स के निरीक्षण के लिए डिज़ाइन किया गया था, जिसने नियामक आवश्यकताओं को पूरा किया।
  • नियामक एवं भौतिकी सहायता: महत्वपूर्ण रिएक्टर भौतिकी सहायता प्रदान की और नियामक स्वीकृतियों में सहायता के लिए व्यापक सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत कीं। आकलित सैद्धांतिक रिएक्टर भौतिकी पैरामीटर पीएफबीआर की पहली क्रिटिकैलिटी के दौरान रिएक्टर के वास्तविक प्रदर्शन से काफी सटीक मेल खाते थे।

फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), आईजीसीएआर में परमाणु ऊष्मा का उपयोग करके स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन का प्रदर्शन

आईजीसीएआर ने 26 जून 2026 को परमाणु ऊष्मा का उपयोग करके स्वच्छ हाइड्रोजन के सफल उत्पादन का प्रदर्शन करते हुए एक वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया। बीएआरसी द्वारा विकसित 'कॉपर-क्लोरीन थर्मोकैमिकल चक्र' को फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) के सेकेंडरी सोडियम हीटिंग लूप के साथ एकीकृत करके, इस नवीन सुविधा ने कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन उत्पन्न की। यह उपलब्धि एक अभूतपूर्व तकनीकी सफलता का प्रतीक है और उन्नत परमाणु रिएक्टरों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर, कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक आशाजनक मार्ग खोलती है।

परमाणु-सहायता प्राप्त कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकैमिकल चक्र-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन अक्षय ऊर्जा से चलने वाले इलेक्ट्रोलीसिस का एक स्थिर बेस-लोड विकल्प प्रदान करता है और परमाणु बुनियादी ढांचे के भीतर बिजली तथा हाइड्रोजन के को-जनरेशन का समर्थन करता है। यह प्रौद्योगिकी भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और नेट ज़ीरो लक्ष्यों का समर्थन करते हुए उर्वरक, रिफाइनरी, परिवहन और इस्पात उत्पादन जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रासंगिकता रखती है।

यह कार्यक्रम उन्नत स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास के माध्यम से स्वदेशी तकनीकी क्षमता को भी मजबूत करता है और "आत्मनिर्भर भारत" के दृष्टिकोण के अनुरूप है। कल्पक्कम में नियोजित एफबीटीआर-2 सहित भविष्य के सोडियम-कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में हाइड्रोजन के सह-उत्पादन की सुविधा का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, डिजाइन मापदंडों को सत्यापित करने के लिए लो पावर फिजिक्स एक्सपेरिमेंट्स (एलपीपीई) और टरबाइन जनरेटर का ओवरहॉलिंग का काम प्रगति पर है। एलपीपीई के पूरा होने पर, चरणबद्ध तरीके से नियामक मंजूरी प्राप्त की जाएगी और ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइजेशन तथा पूर्ण क्षमता संचालन की ओर बिजली उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

थोरियम-केंद्रित परमाणु ऊर्जा में तेजी लाने के लिए सरकार की कार्ययोजना भारत के थोरियम संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए तीन-चरण वाले परमाणु कार्यक्रम के निरंतर कार्यान्वयन पर आधारित है। थोरियम-232 एक फर्टाइल सामग्री होने के कारण सीधे ईंधन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता; इसे प्लूटोनियम का उपयोग करके ब्रीडर रिएक्टर ईंधन में फिसाइल यू-233 में परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है और फिर परिवर्तित यू-233 का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। ड्राइवर ईंधन के रूप में पर्याप्त प्लूटोनियम उपलब्ध होने पर थोरियम का बड़े पैमाने पर उपयोग अपेक्षित है।

थोरियम आधारित रिएक्टर की बड़े पैमाने पर तैनाती शुरू होने से पहले एक परिपक्व तकनीक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से थोरियम उपयोग की प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) के प्रयास जारी हैं।

मोल्टन साल्ट रिएक्टर (एमएसआर) को थोरियम के उपयोग के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों में से एक के रूप में परिकल्पित किया गया है। डीएई थोरियम के कुशल उपयोग के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से मोल्टन साल्ट रिएक्टर के विकास की प्रक्रिया में है। मोल्टन साल्ट डिमॉन्स्ट्रेशन रिएक्टर के लिए विशेष सामग्रियों के विकास और योग्यता, मोल्टन फ्लोराइड साल्ट केमिस्ट्री और घटकों के विकास पर आर एंड डी  प्रगति पर है।

यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष), डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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