विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संसद प्रश्न: एएनआरएफ के अंतर्गत आरडीआई निधि
प्रविष्टि तिथि:
23 JUL 2026 4:06PM by PIB Delhi
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जुलाई 2025 को एक लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष को मंजूरी दी थी। इस कोष का औपचारिक शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 3 नवंबर 2025 को किया गया था।
वित्त वर्ष 2026 के दौरान, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) को केंद्रित अनुसंधान संगठनों (एफआरओ) श्रेणी के अंतर्गत द्वितीय स्तर के कोष प्रबंधक (एसएलएफएम) के रूप में अनुमोदित किया गया। इसके अतिरिक्त, पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं में निवेश के लिए मार्च 2026 में टीडीबी को 500 करोड़ रुपये वितरित किए गए। अब तक, टीडीबी ने कुल 4,744 करोड़ रुपये की लागत वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें आरडीआईएफ का 2,192 करोड़ रुपये का सहयोग शामिल है। बीआईआरएसी ने भी आरडीआईएफ के अंतर्गत सहायता के लिए आठ परियोजनाओं को चयनित किया है, जिनमें 390.35 करोड़ रुपये की राशि शामिल है।
कोष के अंतर्गत शामिल किए जाने के लिए द्वितीय स्तर के कोष प्रबंधकों (एसएलएफएम) से आवेदन भी आमंत्रित किए गए थे। विभिन्न वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) से कुल 162 आवेदन और केंद्रित अनुसंधान संगठनों (एफआरओ) से 38 आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों को संसाधित किया गया है और वर्तमान में सक्षम स्वीकृति प्राधिकरण द्वारा इन पर विचार किया जा रहा है, जिनमें विभिन्न एआईएफ और एफआरओ के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपये की कुल प्रस्तावित प्रतिबद्धता शामिल है।
इस योजना का लक्ष्य रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को बढ़ावा देना है, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा संक्रमण, तथा जलवायु कार्रवाई; गहन प्रौद्योगिकियां, जिनमें क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष शामिल हैं; कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृषि, स्वास्थ्य तथा शिक्षा में इसके अनुप्रयोग; जैव प्रौद्योगिकी, जैव विनिर्माण, सिंथेटिक बायोलॉजी, औषधियां और चिकित्सा उपकरण; तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था, जिसमें डिजिटल कृषि भी शामिल है। अन्य प्रस्तावित क्षेत्रों में वे प्रौद्योगिकियां भी शामिल हैं जिनका स्वदेशीकरण रणनीतिक कारणों, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है, साथ ही कोई भी अन्य क्षेत्र या प्रौद्योगिकी जिसे सार्वजनिक हित में आवश्यक समझा जाए।
आरडीआईएफ के शुभारंभ के बाद, देशभर में विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श आयोजित किए गए। मुंबई, बेंगलुरु, पंचकूला और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षाविदों, उद्यम पूंजीपतियों, कोष प्रबंधकों, स्टार्ट-अप्स, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों की बड़े पैमाने पर भागीदारी रही। एफआरओ श्रेणी के अंतर्गत, आईआईटी, आईआईएससी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे प्रमुख शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों के अनुसंधान पार्कों को साझेदार संस्थानों के रूप में विचाराधीन रखा जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचार-आधारित स्टार्ट-अप्स और उद्योगों को समर्थन देने के लिए आरडीआई कोष का उपयोग किया जा सके।
आरडीआईएफ दिशानिर्देशों के अनुसार, द्वितीय स्तर के कोष प्रबंधक (एसएलएफएम) आरडीआईएफ पूंजी का उपयोग प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल) 4 या उससे अधिक स्तर वाली पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं द्वारा संचालित परियोजनाओं के समर्थन के लिए करेंगे। योजना के अंतर्गत सहायता कुल आकलित परियोजना लागत के 50% से अधिक नहीं होगी, जबकि शेष वित्त पोषण परियोजना प्रस्तावकों द्वारा अपने स्वयं के संसाधनों या वाणिज्यिक स्रोतों के माध्यम से जुटाया जाना होगा। ऋण के मामले में, आरडीआईएफ सहायता परियोजना लागत के 50% तक सीमित है, जबकि इक्विटी या इक्विटी-लिंक्ड साधनों के मामले में यह प्रत्येक वित्त पोषण दौर के मूल्य के 50% तक सीमित है।
अब तक, आरडीआईएफ के अंतर्गत दो द्वितीय स्तर के कोष प्रबंधकों, अर्थात टीडीबी और बीआईआरएसी को 1,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। कोष के विस्तार के लिए सरकार के रोडमैप में अतिरिक्त द्वितीय स्तर के कोष प्रबंधकों (एसएलएफएम) को शामिल करना, भाग लेने वाले एआईएफ और एफआरओ के नेटवर्क का विस्तार करना, मिश्रित वित्त पोषण ढांचे के माध्यम से निजी और वाणिज्यिक पूंजी जुटाना, रणनीतिक क्षेत्रों में पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं तक सहायता का विस्तार करना और योजना के अंतर्गत भागीदारी बढ़ाने के लिए हितधारकों के संपर्क को मजबूत करना शामिल है।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/जेएस/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2288615)
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