प्रविष्टि तिथि:
22 JUL 2026 3:56PM by PIB Delhi
मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्रालय ने आज राज्यसभा को पशु चिकित्सा और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, श्वेत क्रांति 2.0 को गति देने और देश भर में आवारा कुत्तों के मानवीय प्रबंधन में सुधार लाने के उद्देश्य से चल रहे नियोजित उपायों के बारे में जानकारी दी।
पशु चिकित्सा सेवाएं
पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत, पशुपालन एवं दुधारू पशु चिकित्सा विभाग फुट एंड माउथ डिजीज, ब्रुसेलोसिस, पीपीआर और क्लासिकल स्वाइन फीवर के टीकाकरण के लिए शत-प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त, पशु चिकित्सालय एवं औषधालय सुदृढ़ीकरण घटक के अंतर्गत 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4,019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ कार्यरत हैं। रोग निवारण, निदान प्रयोगशालाओं और पशु चिकित्सकों एवं पैरा-पशु चिकित्सकों के प्रशिक्षण के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है।
श्वेत क्रांति 2.0
सरकार ने कहा कि श्वेत क्रांति 2.0 का उद्देश्य 2028-29 तक 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना और 46,422 मौजूदा समितियों को सुदृढ़ करके डेयरी सहकारी समितियों की पहुंच को उन गांवों तक विस्तारित करना है जहां अभी तक ये सेवाएं नहीं पहुंची हैं। कार्यक्रम के तहत प्रगति ने पहले ही ठोस परिणाम दिखाए हैं, मार्च 2026 तक 54,442 के लक्ष्य के मुकाबले 67,433 समितियों की स्थापना हो चुकी है। 2025-26 में सहकारी समितियों द्वारा दूध की औसत खरीद प्रतिदिन 700 लाख लीटर तक पहुंच गई है।
किसानों को समर्थन
असंगठित दुग्ध किसानों को औपचारिक सहकारी संरचनाओं में शामिल होने में सहायता प्रदान करने के लिए, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत दुग्ध सहकारी समितियों के गठन और सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ प्रशिक्षण और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार ने उन्नत प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों, स्वचालन प्रणालियों और सतत ऊर्जा उपायों के माध्यम से दुग्ध संयंत्रों के आधुनिकीकरण पर भी प्रकाश डाला, जिसका नेतृत्व एनडीडीबी कर रहा है। किसानों को पारदर्शी और तत्क्षण भुगतान सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित दुग्ध संग्रहण इकाइयों और डेटा प्रोसेसर दुग्ध संग्रहण इकाइयों सहित डिजिटल भुगतान प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है।
आवारा कुत्तों का प्रबंधन
सरकार ने कहा है कि उसने पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 को अधिसूचित कर दिया है, जिससे आवारा कुत्तों के मानवीय और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए नसबंदी और रेबीज रोकथाम टीकाकरण के माध्यम से एक वैधानिक ढांचा तैयार हो गया है। 2026-27 के लिए राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना के तहत, राज्य कुत्तों के लिए आश्रय स्थल, पशु आश्रय स्थल और पशु जन्म नियंत्रण केंद्र भी स्थापित कर सकते हैं, जबकि नसबंदी और टीकाकरण को सुधार से जुड़े उपायों में शामिल किया गया है।
रेबीज उन्मूलन प्रयास
मंत्रालय ने कुत्तों द्वारा फैलने वाले रेबीज के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना का भी उल्लेख किया, जिसे 2030 तक कुत्तों द्वारा फैलने वाले रेबीज को समाप्त करने के लिए एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के तहत हितधारक मंत्रालयों के साथ मिलकर लागू किया जा रहा है। विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 19 मई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को अक्षरशः लागू करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
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