मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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पंजीकृत मछुआरा परिवार

प्रविष्टि तिथि: 21 JUL 2026 3:04PM by PIB Delhi

तमिलनाडु सरकार से मिली जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के तंजावुर जिले में डिस्ट्रिक्ट फिश फार्मर्स डेवलपमेंट एजेंसी (डीएफएफडीए) के साथ कुल 1,480 अंतर्देशीय मछली पालक पंजीकृत हैं। अंतर्देशीय मछुआरा सहकारी समितियों में पंजीकृत अंतर्देशीय मछुआरों की कुल संख्या 1,234 हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों (2021-22 से 2023-24) में 196.30 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है। यह राशि मीठे पानी की फिनफिश हैचरी (2 यूनिट) के निर्माण, बीज पालन तालाबों (07 हेक्टेयर) के निर्माण, नए ग्रो-आउट तालाबों के निर्माण और इनपुट सहायता (25 हेक्टेयर), ग्रो-आउट तालाबों के लिए इनपुट सब्सिडी सहायता (25 हेक्टेयर), छोटी बायोफ्लॉक यूनिट (09 यूनिट) की स्थापना और री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (01 यूनिट) की स्थापना जैसी परियोजनाओं को लागू करने के लिए दी गई है।

 

(b) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से मिली जानकारी के अनुसार, सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआईएफआरआई) ने तमिलनाडु के तंजावुर जिले में कावेरी नदी के हिस्से में एक अध्ययन किया है। अध्ययन से पता चला है कि खेती के काम के लिए नहरों के अच्छी तरह से विकसित नेटवर्क के माध्यम से नदी के पानी को बड़े पैमाने पर मोड़ने के कारण, वर्ष के ज़्यादातर समय इस हिस्से में पानी का बहाव कम रहता है। नदी के इस हिस्से में पानी मुख्य रूप से मानसून के दौरान और ऊपर की ओर बने जलाशयों से नियंत्रित तरीके से छोड़े गए पानी से ही आता है। परिणामस्वरूप तंजावुर वाले हिस्से में नदी में मछली पकड़ने का काम मौसमी होता है और इसकी तीव्रता भी सीमित रहती है।

 

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा लागू 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत तमिलनाडु में 'रिवर रैंचिंग प्रोग्राम' (नदियों में मछली के बच्चे छोड़ने का कार्यक्रम) चलाया गया। इसके अंतर्गत राज्य भर की नदियों में 176 लाख एडवांस्ड फिंगरलिंग्स (मछली के बड़े बच्चे) छोड़े गए (जिसमें कावेरी नदी प्रणाली में छोड़े गए 59.76 लाख बच्चे भी शामिल हैं) इसका मकसद मछली पालन के संसाधनों को बढ़ाना, स्थानीय मछली जैव-विविधता का संरक्षण करना, मछली पकड़ने की मात्रा बढ़ाना और अंतर्देशीय मछुआरों की आजीविका की रक्षा करना था। आशा है कि इस स्टॉकिंग से कावेरी नदी प्रणाली में मछली का उत्पादन 220 टन तक बढ़ जाएगा, जिससे अंतर्देशीय मछली उत्पादन में वृद्धि होगी और मछुआरों की आजीविका को सहारा मिलेगा।

 

(c) भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग 2015 से  देश भर में (जिसमें तमिलनाडु के डेल्टा जिले - तंजावुर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम, मयिलादुतुराई और कुड्डालोर शामिल हैं) मत्स्य पालन, अंतर्देशीय जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) के समग्र विकास और मछुआरों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश काफी बढ़ा चुका है। तमिलनाडु सरकार ने पीएमएमएसवाई और राज्य की योजनाओं के अंतर्गत कई गतिविधियां लागू की हैं। इनका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, जलीय कृषि के दायरे का विस्तार करना, टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देना और बायोफ्लॉक सिस्टम रीसर्क्युलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) जैसी तकनीकों को अपनाकर सघन जलीय कृषि करना है। इसके अलावा, अंतर्देशीय मछुआरों की परिचालन लागत कम करने के लिए पीएमएमएसवाई के तहत मछली पकड़ने के उपकरणों (गियर) के लिए सब्सिडी सहायता भी दी जाती है।

 

तमिलनाडु सरकार ने जानकारी दी है कि डेल्टा जिलों के 355 लाभार्थियों को पीएमएमएसवाई के अंतर्गत सब्सिडी सहायता दी गई है। यह सहायता इनपुट सहायता और मीठे पानी की फिनफिश हैचरी, नए बीज पालन तालाब, ग्रो-आउट तालाब, बायोफ्लॉक यूनिट, आरएएस, सजावटी मछली यूनिट की स्थापना और मछली पकड़ने के उपकरण खरीदने जैसी गतिविधियों के लिए दी गई है। राज्य ने 2024-25 और 2025-26 के दौरान डेल्टा जिलों में 450 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पंचायत तालाबों में 9.00 लाख फिंगरलिंग्स (मछली के बच्चे) छोड़ने की सुविधा भी प्रदान की है।

 

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/पीके


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