विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने डीस्पेस का उपयोग करते हुए एआई-सक्षम संस्थागत रिपॉजिटरी पर पांच दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया
प्रविष्टि तिथि:
11 JUL 2026 5:00PM by PIB Delhi
सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) ने सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल ( चरण तृतीय) के अंतर्गत 6-10 जुलाई 2026 के दौरान ‘‘डीएसस्पेस का उपयोग करके संस्थागत भंडारों में एआई का डिजाइन, विकास और उपयोग’’ विषय पर पांच दिवसीय ऑफलाइन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। संस्थान के प्रशिक्षण प्रभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुस्तकालय एवं सूचना पेशेवरों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, छात्रों और आईटी पेशेवरों की तकनीकी दक्षताओं को सुदृढ़ करना था, ताकि वे उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकियों से एकीकृत ओपन-सोर्स डीस्पेस प्लेटफॉर्म का उपयोग करके संस्थागत भंडारों का विकास और प्रबंधन कर सकें।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रसयम ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और प्रतिभागियों को कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अकादमिक संचार, ज्ञान संरक्षण और अनुसंधान की दृश्यता को बढ़ावा देने में डिजिटल भंडार, ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। सुश्री मीताली भारती ने स्वागत भाषण में कार्यक्रम के उद्देश्यों का परिचय दिया और डिजिटल ज्ञान प्रबंधन में निरंतर क्षमता निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला।



अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष बल देते हुए डिजाइन किए गए इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ व्यापक व्यावहारिक सत्र भी शामिल थे। पांच दिनों तक चले इस कार्यक्रम में, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख श्री मुकेश ए. पुंड ने शैक्षणिक सत्रों का संचालन किया और प्रतिभागियों को डीएसस्पेस का उपयोग करके संस्थागत रिपॉजिटरी विकसित करने और प्रबंधित करने के संपूर्ण चक्र में मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रशिक्षण में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के मूल सिद्धांत, डीएसस्पेस आर्किटेक्चर और प्रशासन, समुदाय और संग्रह, आइटम सबमिशन, ई-पीपल पंजीकरण और प्राधिकरण, लिनक्स और डीएसस्पेस इंस्टॉलेशन, डब्लिन कोर और बिटस्ट्रीम रजिस्ट्री प्रबंधन, रिपॉजिटरी कस्टमाइज़ेशन, बैकअप और रिस्टोरेशन, साथ ही पुस्तकालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अनुप्रयोग, जिसमें एआई-संचालित मेटाडेटा निष्कर्षण और सिमेंटिक खोज शामिल हैं, को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को प्रदर्शनों, निर्देशित अभ्यासों और प्रयोगशाला-आधारित सत्रों के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जिससे वे संस्थागत रिपॉजिटरी को स्वतंत्र रूप से तैनात, कस्टमाइज़ और प्रशासित करने में सक्षम हुए।
कक्षा सत्रों के अलावा, प्रतिभागियों ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत, एनआईएससीपीआर हर्बेरियम के दौरे और सारल एआई पर एक जानकारीपूर्ण व्याख्यान के माध्यम से सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के व्यापक वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र का अनुभव किया, जिससे संस्थान के बहुविषयक अनुसंधान और विज्ञान संचार पहलों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई।
कार्यक्रम में असाधारण उत्साह और सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। संवादात्मक चर्चाओं, व्यावहारिक समस्या-समाधान अभ्यासों और प्रतिभागियों तथा संकाय सदस्यों के बीच निरंतर सहभागिता ने एक सहयोगात्मक शिक्षण वातावरण का निर्माण किया, जिसने समग्र प्रशिक्षण अनुभव को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को एआई-सक्षम संस्थागत भंडार स्थापित करने, प्रबंधित करने और सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से सफलतापूर्वक सुसज्जित किया, जिससे खुले पहुंच, दीर्घकालिक डिजिटल संरक्षण और कुशल ज्ञान प्रसार को समर्थन मिला।




समापन सत्र में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के प्रशासनिक नियंत्रक श्री सुभाष चंद्र अंतिल और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की वित्त एवं लेखा अधिकारी सुश्री गुरमीत कौर उपस्थित थीं। उन्होंने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने पर प्रतिभागियों को बधाई दी और उन्हें अपने-अपने संस्थानों में प्राप्त ज्ञान और तकनीकी कौशल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी और सफल समापन के सम्मान में सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।



इस अवसर पर आयोजकों ने सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से डिजिटल ज्ञान प्रबंधन में राष्ट्रीय क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन आधुनिक पुस्तकालय और सूचना सेवाओं के लिए ओपन-सोर्स रिपॉजिटरी प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारत के विकसित होते डिजिटल अनुसंधान और ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान मिलता है।
इस कार्यक्रम का समन्वय कार्यक्रम समन्वयक और नोडल प्रधान अन्वेषक (पीआई) सुश्री मीताली भारती, सह-पीआई और पाठ्यक्रम सह-समन्वयक श्री सलीम अंसारी और प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख और पाठ्यक्रम समन्वयक श्री मुकेश ए. पुंड ने किया। देश भर के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, पुस्तकालयों और अन्य संगठनों के कुल 25 प्रतिभागियों ने इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पूर्ण किया।
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पीके/केसी/केएल/वीके
(रिलीज़ आईडी: 2283906)
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