भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
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सशक्त प्रौद्योगिकी समूह (ईटीजी) के प्रौद्योगिकी सलाहकार समूह (टीएजी) ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक योजना और एक समर्पित "संचार प्रौद्योगिकी कार्य बल" की स्थापना पर चर्चा करने के लिए बैठक की

प्रविष्टि तिथि: 10 JUL 2026 8:26PM by PIB Delhi

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रोफेसर अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में सशक्त प्रौद्योगिकी समूह (ईटीजी) द्वारा गठित प्रौद्योगिकी सलाहकार समूह (टीएजी) की चौथी बैठक 10 जुलाई 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक में दूरसंचार क्षेत्र के लिए प्राथमिकता वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की पहचान करने और एक समर्पित राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास पहल की आवश्यकता का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें मानक विकास, बौद्धिक संपदा निर्माण, उन्नत विनिर्माण और लचीली रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में क्षमताओं को बढ़ाकर भारत के नवाचार-से-व्यावसायीकरण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इस बैठक में टीएजी और ईटीजी के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, प्रमुख शिक्षाविद, उद्योग प्रतिनिधि और दूरसंचार स्टार्टअप के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और भारत के वर्तमान दूरसंचार परिदृश्य और भविष्य के लिए तैयार दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया।

प्रो. सूद ने अपने  आरंभिक भाषण में इस बात का उल्लेख किया कि  दूरसंचार प्रौद्योगिकियां भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव हैं जो डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, औद्योगिक स्वचालन और महत्वपूर्ण अवसंरचना को सक्षम बनाती हैं। भारत के विश्व के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में से एक के रूप में उभरने का उल्लेख करते हुए प्रो. सूद ने  अनुसंधान, मानकों, बौद्धिक संपदा, विनिर्माण और व्यावसायीकरण को मजबूत करके दूरसंचार मूल्य श्रृंखला में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्राथमिकता वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों और नवाचार को गति देने तथा महत्वपूर्ण तकनीकी निर्भरताओं को कम करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्रों पर विचार-विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया।

दूरसंचार विभाग (डी टी ) के सचिव श्री अमित अग्रवाल ने भारत के एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और तेजी से विकसित हो रहे दूरसंचार क्षेत्र के दृष्टिकोण का उल्लेख किया जो पारंपरिक दूरसंचार सेवाओं से अलग  डेटा सेंटर, गैर-स्थलीय नेटवर्क, अंतरिक्ष-आधारित संचार और एआई-आधारित नेटवर्क को भी शामिल करता है। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए राष्ट्रीय पहलों को समन्वित करने और उन्हें आगे बढ़ाने के साथ-साथ दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी विकास को समर्थन देने वाले संस्थागत तंत्रों के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने डीओटी  की डिजिटल भारत निधि योजना के बारे में भी जानकारी दी जो स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, नवाचार और शीघ्र तैनाती को समर्थन देने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।

दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीटीडीएफ) के उप महानिदेशक डॉ. पराग अग्रवाल ने 5जी-एडवांस्ड/6जी, एआई-नेटिव नेटवर्क, ओपन आरएएन, सैटेलाइट संचार, क्लाउड-नेटिव नेटवर्क और दूरसंचार सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिए भारत की मजबूत बाजार क्षमता का लाभ उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक मानकीकरण प्रयासों में भारत की भागीदारी बढ़ाने और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, नवाचार, सत्यापन और तैनाती में सहयोग हेतु उन्नत दूरसंचार परीक्षण केंद्रों की स्थापना के महत्व को भी रेखांकित किया।

मुख्य वक्ताओं में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर आर.के. गांटी, आईआईटी हैदराबाद की प्रोफेसर और विज़िग नेटवर्क्स की संस्थापक डॉ. किरण कुची, दूरसंचार मानक विकास सोसायटी, भारत (टीएसडीएसआई) के अध्यक्ष श्री सतीश जमदग्नि, एक्सिरो सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड के ईवीपी श्री तुषार शर्मा, इनस्पेस के कार्यक्रम प्रबंधन निदेशक डॉ. पी.के. जैन, तेजस नेटवर्क्स के सह-संस्थापक श्री संजय नायक, इनस्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका, जैव प्रौद्योगिकी विभाग की पूर्व सचिव डॉ. रेणु स्वरूप, बीआईटीएस पिलानी के कुलपति डॉ. वी. रामगोपाल राव, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष, नोकिया इंडिया की कंट्री मैनेजर सुश्री विभा मेहरा, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड की मुख्य नियामक एवं कॉर्पोरेट मामलों की अधिकारी सुश्री अंबिका खुराना, आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रोफेसर रजत मूना शामिल थे। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डेवलपमेंट) के कार्यकारी निदेशक और मुख्य अनुसंधान एवं विकास अधिकारी डॉ. विभव संजगिरी, स्टर्लिंग टूल्स लिमिटेड की स्वतंत्र निदेशक डॉ. रश्मी उर्ध्वरेशे, और बीएसएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री ए रॉबर्ट जे रवि ने भारत के दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में प्रगति को सुगम बनाने में शिक्षा जगत की भूमिका पर प्रकाश डाला, 6जी प्रौद्योगिकियों में केंद्रित निवेश और समस्याओं के समाधान के लिए एक एकीकृत, मिशन-मोड दृष्टिकोण का आह्वान किया और देश के वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व को मजबूत करने के लिए स्वदेशी मानकों और भारतीय एसईपी के विकास पर बल दिया। उन्होंने बाजार पहुंच, उत्पाद-संबंधित प्रोत्साहन, घरेलू चिप डिजाइन, उत्पाद विकास और दीर्घकालिक तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए एक समर्पित पारिस्थितिकी तंत्र की वकालत भी की। गैर-स्थलीय नेटवर्क (एनटीएन) द्वारा प्रदत्त रणनीतिक अवसरों पर चर्चा की तथा मजबूत बाजार पहुंच के माध्यम से भारत के दूरसंचार उद्योग को बढ़ाने की आवश्यकता प्रस्तुत की विश्लेषण, एआई और जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर में विश्वसनीय डेटा इंटेलिजेंस की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इसके अलावा, ईटीजी और टीएजी सदस्यों की चर्चाओं और प्रमुख हितधारकों के हस्तक्षेप से वैश्विक मानकों में भारत की शीघ्र और निरंतर भागीदारी, अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों के मिशन-उन्मुख विकास और प्रौद्योगिकी सत्यापन एवं व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए मजबूत परीक्षण केंद्रों के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया गया। नीति और वित्तपोषण ढांचे को बाजार पहुंच को सुगम बनाकर, सरकारी खरीद को घरेलू नवाचार के अनुरूप बनाकर और उत्पाद-संबंधित प्रोत्साहन तंत्रों के माध्यम से स्वदेशी डिजाइन, विकास और विनिर्माण का समर्थन करना चाहिए ताकि प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाया जा सके। चर्चाओं में महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और भारत के कुशल कार्यबल, विनिर्माण क्षमताओं और विशाल घरेलू बाजार का लाभ उठाकर देश को आयात-निर्भर दूरसंचार प्रणाली से निर्यात-उन्मुख नवाचार केंद्र में बदलने के महत्व पर भी बल दिया गया।

अपने समापन भाषण में ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव डॉ (श्रीमती) परविंदर मैनी ने विचार-विमर्श के प्रमुख निष्कर्षों का सारांश प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दूरसंचार प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने और दूरसंचार प्रौद्योगिकी स्टैक के रणनीतिक स्तरों में क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर व्यापक सहमति बनी है। उन्होंने अनुसंधान से उपयोग तक प्रौद्योगिकी रूपांतरण में तेजी लाने, वैश्विक मानकों, एसईपी और विश्वसनीय स्वदेशी दूरसंचार उत्पादों में नेतृत्व को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रोटोटाइपिंग, फील्ड सत्यापन, अंतरसंचालनीयता परीक्षण, प्रमाणन और व्यावसायीकरण के लिए संरचित समर्थन के साथ-साथ निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी के माध्यम से प्रयोगशाला नवाचार और बाजार में स्वीकृति के बीच के महत्वपूर्ण अंतर को पाटने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए समग्र सरकारी और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया, जो सुनियोजित वैश्विक साझेदारियों द्वारा समर्थित हो। उन्होंने प्रस्तावित "संचार प्रौद्योगिकी कार्य बल" को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का मार्गदर्शन करने और पारिस्थितिकी तंत्र-व्यापी समन्वय को मजबूत करने के लिए एक गतिशील तंत्र के रूप में भी प्रस्तुत किया।

अपने समापन भाषण में श्री अग्रवाल ने अपने विचारों को दोहराते हुए नवाचार और उसके प्रभाव के बीच की खाई को कम करने, सहयोगात्मक संघों की ओर अग्रसर होने और उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय तंत्रों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नीतिगत स्पष्टता और निर्णायक सरकारी खरीद समर्थन को दो महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने ईटीजी को अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों में प्रौद्योगिकी मूल्यांकन और रणनीतिक मार्गदर्शन के लिए एक विश्वसनीय, निष्पक्ष तंत्र के रूप में भी स्थापित किया।

प्रोफेसर सूद ने अपने समापन भाषण में सभी प्रतिभागियों को उनके बहुमूल्य विचारों और रचनात्मक सुझावों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विचार-विमर्श ने भारत की दीर्घकालिक दूरसंचार रणनीति को परिभाषित करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है और अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय रोडमैप को आगे बढ़ाने में शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप और सरकार से निरंतर सहयोग का अनुरोध किया।

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पीके/केसी/एनकेएस


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