मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
उपराष्ट्रपति ने खुले समुद्रों में मत्स्य पालन के सतत दोहन हेतु प्राधिकार पत्र और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज़ का शुभारंभ किया
सशक्त मत्स्य किसान उत्पाोदक संगठनों, मत्स्य पालन सहकारी समितियों और डिजिटलीकरण के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र के समावेशी विकास को बढ़ावा
प्रविष्टि तिथि:
09 JUL 2026 3:18PM by PIB Delhi
केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने 9 जुलाई 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में खुले समुद्रों में मत्स्य पालन के सतत दोहन हेतु प्राधिकरण पत्र (एलओए) का राष्ट्रीय शुभारंभ आयोजित किया। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने गहरे समुद्रों में मत्स्य पालन के सतत दोहन हेतु प्राधिकार पत्र का शुभारंभ किया। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर ओडिशा डीप सी मिशन दस्तावेज़ का भी शुभारंभ किया।
इस राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य पालन एवं एआरडी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गोकुलानंद मल्लिक और कंधमाल के सांसद श्री सुकांत पाणिग्रही की गरिमामय उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में लगभग 1,000 मछली किसानों और मछुआरों, जिनमें महिला मछली किसान और मछुआरों शामिल थीं, के साथ-साथ विभिन्न राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों तथा संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के अधिकारियों ने प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी की।

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और उत्तरदायित्वपूर्ण विकास को बढ़ावा देने में केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग, ओडिशा सरकार और मत्स्य पालन से जुड़े सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्रों में मत्स्य पालन संसाधनों के दोहन के महत्व को मान्यता दी गई है और कहा कि प्राधिकार पत्र ढांचे का शुभारंभ देश के मत्स्य पालन क्षेत्र में एक नये अध्याय को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मछुआरा-केंद्रित ढांचा उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों तक पहुंच बढ़ाएगा, आजीविका को मजबूत करेगा और समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला में नए अवसर पैदा करेगा। गुणवत्ता मानकों, पता लगाने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि ये उपाय भारतीय समुद्री खाद्य को प्रीमियम वैश्विक बाजारों तक पहुंचने और निर्यात को और बढ़ावा देने में मदद करेंगे। उन्होंने मत्स्य पालन सहकारी समितियों और मत्स्य पालन किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया और युवाओं को मत्स्य पालन को एक आधुनिक, विज्ञान-आधारित क्षेत्र के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया जो, रोजगार और उद्यमशीलता के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास को स्थिरता के साथ संरेखित किया जाना चाहिए और भावी पीढ़ियों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करने और नीली अर्थव्यवस्था के निरंतर विकास के लिए समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) सहित मत्स्य पालन सहकारी समितियों और मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों को प्राधिकार पत्र (एलओए) वितरित किए, जिससे पात्र भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को खुले समुद्र में विनियमित मत्स्य पालन संचालन करने की अनुमति मिल गई। जिन मत्स्य पालन सहकारी समितियों को यह प्राधिकार पत्र दिया गया है, उनमें श्री महावीर मच्छीमार सहकारी मंडली लिमिटेड, श्री मार्तंडा प्रसन्ना कोलाबा मत्स्योद्योग विविध कार्यकारी सहकारी संस्था मर्यादित, दक्षिण गोवा मशीनीकृत नाव मालिक सहकारी समिति एवं विपणन समिति लिमिटेड, पारादीप मरीन प्राथमिक मछली उत्पादन एवं विपणन सहकारी समिति लिमिटेड, थेंगापट्टनम गहरे समुद्र मछली उत्पादक सहकारी समिति और मालपे मछुआरा प्राथमिक सहकारी समिति लिमिटेड शामिल हैं।
ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भमपति ने भारत के विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और अपार समुद्री संपदा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की मछली पकड़ने की गतिविधियां परंपरागत रूप से तटीय जलक्षेत्रों तक ही सीमित रही हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्राधिकार पत्र (एलओए) का शुभारंभ एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित ढांचे के माध्यम से खुले समुद्र के मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विकास के साथ-साथ स्थिरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल जिम्मेदार मछली पकड़ने को बढ़ावा देगी, मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करेगी, युवाओं के लिए आजीविका के अवसर पैदा करेगी और मछुआरा समुदायों की आय में सुधार करेगी। उन्होंने वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद समुद्री खाद्य भोजन के रिकॉर्ड निर्यात को हासिल करने के लिए मत्स्य विभाग की सराहना भी की। मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने मछुआरों को ट्यूना और ट्यूना जैसी प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य वाले संसाधनों का दोहन करने के लिए उपयुक्त पोत, उपकरण और प्रौद्योगिकी प्रदान करने का आह्वान किया।
ओडिशा के माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि ओडिशा आधुनिक मत्स्य पालन अवसंरचना में निवेश के माध्यम से एक मजबूत मत्स्य पालन इकोसिस्टम का निरंतर निर्माण कर रहा है, जिसमें थोक मछली बाजार और एक्वापार्क शामिल हैं, ताकि मूल्यवर्धन और समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने राज्य की ईईजेड और समुद्री मत्स्य संसाधनों की अप्रयुक्त क्षमता का दोहन करने की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल रूप से सक्षम आईओए ढांचा, जिसमें संपूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया और वास्तविक समय ट्रैकिंग की सुविधा है, पारदर्शिता और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देगा। उन्होंने आय बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और ओडिशा को देश में समुद्री मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य निर्यात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, टूना मत्स्य पालन, प्रसंस्करण और निर्यात-उन्मुख मत्स्य पालन गतिविधियों के विकास के महत्व पर भी बल दिया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की नीली अर्थव्यवस्था की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला और मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए परिवर्तनकारी कदमों की सराहना की। ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत और प्रचुर मत्स्य संसाधनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरा है और इसमें विशेष रूप से खारे पानी की जलीय कृषि और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अप्रयुक्त क्षमता मौजूद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन संसाधनों का सतत तरीके से उपयोग करने से मछली उत्पादन में वृद्धि हो सकती है, निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और तटीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। मंत्री महोदय ने मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, बाजार तक पहुंच में सुधार करने और यह सुनिश्चित करने में मत्स्य पालन सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया कि इस क्षेत्र के विकास का लाभ मछुआरा समुदायों तक पहुंचे। उन्होंने आगे कहा कि एलओए ढांचा और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन ओडिशा को पूर्वी भारत में एक प्रमुख मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे, साथ ही एक जीवंत नीली अर्थव्यवस्था के विजन में योगदान देंगे।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी उत्पादन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्रों में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए एक सहायक ढांचा तैयार करने की घोषणा की गई थी, जिसे “एक्सेस पास” के शुभारंभ और प्राधिकर पत्र (एलओए) के राष्ट्रीय रॉलआउट के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है। उन्होंने कहा कि एलओए भारत के समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो एक पारदर्शी और पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से खुले समुद्रों में मत्स्य पालन की विशाल अप्रयुक्त क्षमता को उजागर करेगी। मंत्री महोदय ने इस बात पर जोर दिया कि उभरते खुले समुद्रों के मत्स्य पालन इकोसिस्टम में समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस पहल के तहत मत्स्य पालन सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने विभिन्न प्रमुख योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र में 39,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद मछली उत्पादन में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और 2025-26 में समुद्री खाद्य का रिकॉर्ड निर्यात 73,891 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ईईजेड और खुले समुद्र में भारतीय जहाजों द्वारा पकड़ी गई मछलियों को शुल्क मुक्त कर दिया गया है और विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई मछलियों को निर्यात माना जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में विकास के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने सभी हितधारकों से ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की दिशा में मिलकर काम करने और भारत की ‘नीली क्रांति’ और ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को और मजबूत करने का आह्वान किया।
डॉ. अभिलक्ष लिखी, सचिव (मत्स्य पालन), मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशु पालन एवं डेयरी मंत्रालय, ने गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और देश में सतत और विनियमित समुद्री मत्स्य पालन को सुगम बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम के रूप में प्राधिकार पत्र (एलओए) के राष्ट्रीय शुभारंभ के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में अधिसूचित ईईजेड नियम, 2025 और समुद्री मत्स्य पालन दिशानिर्देश, 2025 टूना और टूना जैसी प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों की जिम्मेदारीपूर्वक दोहन के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करते हैं। लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका को सहारा देने में मत्स्य पालन क्षेत्र की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाने और राज्य सरकारों तथा मत्स्य पालन हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और इस क्षेत्र के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में मत्स्य पालन सहकारी समितियों और मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
प्राधिकार पत्र (एलओए) और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज़ भारतीय जहाजों द्वारा खुले समुद्र में मछली पकड़ने के लिए एक पारदर्शी, जवाबदेह और टिकाऊ ढांचा स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये पहलें भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों की खुले समुद्र में मत्स्य पालन में जिम्मेदार भागीदारी को सुगम बनाएंगी, साथ ही समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करेंगी। यह मछुआरों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने, समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप, ‘नीली अर्थव्यवस्था’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
पृष्ठभूमि
भारत के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित ओडिशा देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों में से एक है, जिसके पास मीठे पानी, खारे पानी और समुद्री इकोसिस्टम सहित एक समृद्ध और विविध मत्स्य संसाधन आधार है। ओडिशा की लगभग 95 प्रतिशत आबादी मछली का सेवन करती है, जिसकी प्रति व्यक्ति खपत 19.16 किलोग्राम है। यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था, आजीविका, खाद्य सुरक्षा और निर्यात आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2025-26 तक ओडिशा ने 12.70 लाख मीट्रिक टन (एमटी) मछली का उत्पादन किया, जिससे राज्य भर में 16 लाख से अधिक मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका को संबल मिला। राज्य में प्रचुर मात्रा में मत्स्य पालन संसाधन हैं, जिनमें लगभग 7.12 लाख हेक्टेयर मीठे पानी के संसाधन, 4.18 लाख हेक्टेयर खारे पानी के संसाधन और समुद्री मत्स्य पालन के लिए 24,000 वर्ग किलोमीटर का महाद्वीपीय शेल्फ क्षेत्र शामिल है। 2025-26 के दौरान मीठे पानी के मत्स्य पालन से मछली उत्पादन 8.27 लाख मीट्रिक टन, खारे पानी के जलीय कृषि से मछली उत्पादन 1.86 लाख मीट्रिक टन और समुद्री मत्स्य पालन से मछली उत्पादन 2.56 लाख मीट्रिक टन शामिल था।
ओडिशा एक महत्वपूर्ण समुद्री खाद्य निर्यातक राज्य के रूप में उभरा है। 2025-26 के दौरान राज्य ने 5,428.67 करोड़ रुपये मूल्य का 1,00,897 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से झींगा और अन्य उच्च मूल्य वाली मत्स्य प्रजातियों का योगदान रहा। प्रमुख निर्यात-उन्मुख जिलों में बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर, पुरी, खुर्दा और संबलपुर शामिल हैं। मुख्य निर्यात झींगा और समुद्री मछली की विभिन्न किस्मों का होता है।
ओडि़शा भारत सरकार के प्रमुख मत्स्य विकास कार्यक्रमों, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) में सक्रिय रूप से भागीदार रहा है। 2020 से पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 1,301 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें जलीय कृषि विस्तार बीज और चारा अवसंरचना, मछली विपणन, शीत श्रृंखला विकास, जलीय पशु स्वास्थ्य, मछुआरा कल्याण, बीमा कवरेज और मत्स्य पालन अवसंरचना शामिल हैं। महत्वपूर्ण उपलब्धियों में लगभग 8.47 लाख मछुआरों को सामूहिक दुर्घटना बीमा के अंतर्गत लाना, हैचरी, चारा मिलें, जलाशय केज कल्चर इकाइयां, शीत भंडारण, मछली बाजार और मछली पकड़ने के बंदरगाह अवसंरचना की स्थापना शामिल है।
यह प्राधिकार पत्र भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के दिशा-निर्देश, 2025 के अंतर्गत एक अनिवार्य प्रावधान है। खुले समुद्र में मछली पकड़ने या उससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल भारतीय जहाजों के लिए डिजाइन किया गया यह एलओए पोत-विशिष्ट, गैर-हस्तांतरणीय है। इसे आरईएएलसीआरएएफटी मत्स्यन पोत पंजीकरण पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है, जो सुव्यवस्थित, पता लगाने योग्य और निगरानी वाली गतिविधियों को सुनिश्चित करता है। न्यूनतम लागत पर जारी और नवीनीकृत और बिना किसी प्रक्रियात्मक बाधा और वास्तविक समय में आवेदन ट्रैकिंग के साथ यह एलओए मछुआरों और पोत संचालकों के लिए अनुपालन को आसान बनाता है। एलओए प्राप्त पोतों को संबंधित क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठनों (आरएफएमओ) द्वारा निर्धारित संरक्षण और प्रबंधन उपायों का अनुपालन करना आवश्यक है, जिसमें पकड़ सीमा, गियर विनियम, आकस्मिक पकड़ शमन उपाय, मछली एकत्रीकरण उपकरण (एफएडी) प्रबंधन, यात्रा रिपोर्टिंग तथा जिम्मेदार एवं सतत मत्स्य पालन के लिए अन्य आवश्यकताएं शामिल हैं।
यह एलओए पहल मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को सतत गहरे समुद्र और खुले समुद्र में मत्स्य पालन में उनकी भागीदारी को सुगम बनाकर और उच्च मूल्य वाले संसाधनों तक उनकी पहुंच बढ़ाकर तथा मछुआरों के लिए आय के अधिक अवसर सृजित करके उन्हें सशक्त बनाएगी। यह डिजिटलीकरण पर भी जोर देती है, जिसमें संपूर्ण एलओए प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध होगी, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, पता लगाने की क्षमता और गवर्नेंस में सुधार होगा।
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) ओडिशा सरकार की एक प्रमुख ‘नीली अर्थव्यवस्था’ पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य की अपतटीय और गहरे समुद्र की मत्स्य पालन क्षमता को उजागर करना और ओडिशा को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और समुद्री निर्यात के एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आधुनिक मत्स्य पालन अवसंरचना, मूल्य श्रृंखला, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन और बाजार संपर्कों में निवेश के माध्यम से मिशन का लक्ष्य मछली उत्पादन बढ़ाना, रोजगार सृजित करना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना और समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास को गति देना है।
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पीके/केसी/आईएम/एम
(रिलीज़ आईडी: 2283020)
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