वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

वाणिज्य विभाग ने भारत-इएफटीए टीइपीए के तहत समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए अवसरों पर ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया

हितधारकों ने टीइपीए के तहत निवेश के अवसरों, निर्यात सुगमता और समुद्री खाद्य निर्यात के लिए बाजार पहुंच पर चर्चा की

प्रविष्टि तिथि: 06 JUL 2026 6:47PM by PIB Delhi

वाणिज्य विभाग, भारत सरकार ने 3 जुलाई 2026 को चेन्नई व्यापार केंद्र, चेन्नई में "भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (इएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीइपीए) के तहत समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए अवसर" विषय पर एक चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस उच्च स्तरीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन 'सीफूड एक्सपो भारत 2026' के दौरान किया गया था।

इएफटीए टीइपीए के सदस्य देशों—आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड के साथ भारत का यह पहला व्यापार समझौता है। इएफटीए देशों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 1.79 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है और वे सामान और सेवाओं के व्यापार में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हैं। टीइपीए किसी यूरोपीय आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला चालू व्यापार समझौता भी है, जो यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम के साथ भारत के मौजूदा व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत बनाता है। इस समझौते का मकसद भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश लाना और दस लाख प्रत्यक्ष नौकरियां के सृजन  में मदद करना है। यह इएफटीए देशों की विशिष्ट प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उद्यमों और सहयोग के रास्ते भी खोलता है। इसके साथ ही, यह मछुआरों और समुद्री खाद्य के क्षेत्र में हितधारकों के लिए विशेष रूप से तमिलनाडु जैसे तटीय राज्य में निर्यात के अवसरों को भी बढ़ाएगा।

टीइपीए भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों को टैरिफ में बड़ी छूट देकर अहम रणनीतिक लाभ प्रदान करता है। इस समझौते के तहत, आइसलैंड ने फ़ीड (पशु आहार) जिसमें मछली का आहार भी शामिल हैपर लगने वाले 55 प्रतिशत आयात शुल्क को खत्म कर दिया है। स्विट्जरलैंड ने मछली के वसा और तेल (लिवर ऑयल को छोड़कर) पर आयात शुल्क को 18.05 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है। इसी तरह, नॉर्वे ने भी पशु आहार पर अपने 13.16 प्रतिशत के आयात शुल्क को समाप्त कर दिया है, जिसमें मछली और झींगा का आहार (फिश एंड श्रिम्प फीड) शामिल है; इस प्रकार टैरिफ को शून्य करके भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच को बढ़ाया गया है।

इस चिंतन शिविर में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री मोहित यादव के साथ-साथ इन्वेस्ट इंडिया’, विदेश व्यापार महानिदेशालय के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय, निर्यात निरीक्षण परिषद (इआईसी) और भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (एफआईइओ) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, समुद्री खाद्य (सीफूड) क्षेत्र के प्रमुख निर्यातकों और इएफटीए बाजारों को लक्षित करने वाले व्यवसायों ने भी इस चर्चा में हिस्सा लिया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, श्री मोहित यादव ने भारत-इएफटीए टीइपीए  का विस्तृत विवरण दिया और इस समझौते के तहत भारतीय व्यवसायों के लिए उपलब्ध व्यापक व्यापार और निवेश के अवसरों पर प्रकाश डाला।

'इन्वेस्ट इंडिया' के प्रतिनिधि ने भारतीय समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला में उभरते निवेश के अवसरों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इसके बाद डीजीएफटी के एक प्रतिनिधि द्वारा प्रस्तुति दी गई, जिसमें व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने और भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने के उद्देश्य से विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन और सुविधा योजनाओं की रूपरेखा बताई गई। इआईसी और एफआईइओ के प्रतिनिधियों ने भी नियामक आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और टीइपीए के तहत मिलने वाले लाभ का असरदार ढंग से इस्तेमाल करने की रणनीतियों के बारे में जानकारी दी।

'चिंतन शिविर' का एक मुख्य आकर्षण एक समर्पित खुला संवादात्मक सत्र रहा, जिसने समुद्री खाद्य निर्यातकों को सरकारी अधिकारियों और नीति निर्माताओं के साथ सीधे संवाद करने का अवसर प्रदान किया। इस दौरान चर्चा मुख्य रूप से बाजार पहुंच, अंतरराष्ट्रीय नियामक आवश्यकताओं के अनुपालन और इएफटीए देशों को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को मजबूत करने की रणनीतियों पर केंद्रित रही।

इस चिंतन शिविर का समापन सरकार और उद्योग जगत के हितधारकों की एक साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिसके तहत टीइपीए के लाभों को अधिकतम करने, टैरिफ रियायतों का लाभ उठाने और इएफटीए बाजारों में भारत के समुद्री खाद्य निर्यात का विस्तार करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया।

****

पीके/केसी/एसके


(रिलीज़ आईडी: 2281834) आगंतुक पटल : 89
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Tamil