पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने समुद्री निवेश कोष (मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड) पर उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 03 JUL 2026 6:54PM by PIB Delhi

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएमएफसीएल) और एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड (एसवीएल) के सहयोग से आज समुद्री निवेश कोष (मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड-एमआईएफ) पर एक उद्योग परामर्श बैठक आयोजित की, जिसमें इस कोष की रूपरेखा, रणनीति और कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श करने के लिए भारत के संपूर्ण समुद्री और वित्तीय इकोसिस्टम के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाया गया।

इस परामर्श बैठक की अध्यक्षता पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री विजय कुमार (आईएएस) ने की। बैठक में पोत परिवहन (शिपिंग) कंपनियों, बंदरगाह ऑपरेटरों, शिपयार्डों, मैरीटाइम बोर्ड, बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), प्राइवेट इक्विटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स और अन्य उद्योग संघों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

एक संदेश में, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, श्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समुद्री क्षेत्र विकास के एक निर्णायक दशक में प्रवेश कर रहा है। जैसे-जैसे हम विश्व स्तरीय बंदरगाहों का निर्माण कर रहे हैं, जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) का विस्तार कर रहे हैं, अंतर्देशीय जलमार्गों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं और अपने लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं, लॉन्ग-टर्म ग्रोथ कैपिटल की उपलब्धता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड को एक ऐसे मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है जो लंबे समय के निवेश (पेशेंट कैपिटल) को जुटाने, निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने और मैरीटाइम वैल्यू चेन में नए अवसर खोलने का काम करेगा। हम मिलकर एक वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी समुद्री अर्थव्यवस्था की नींव रख रहे हैं, जो नवाचार को बढ़ावा देगी, रोजगार के अवसर पैदा करेगी और वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान देगी।"

सभा को संबोधित करते हुए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री विजय कुमार ने बंदरगाहों, पोत परिवहन, जहाज निर्माण, अंतर्देशीय जलमार्गों, तटीय पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स में निरंतर निवेश के माध्यम से भारत को एक प्रमुख ग्लोबल मैरीटाइम राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हालांकि सागरमाला, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के माध्यम से महत्वपूर्ण नीतिगत पहल की गई हैं, लेकिन इन महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लंबे समय के इंस्टीट्यूशनल कैपिटल को बड़े पैमाने पर जुटाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने उल्लेख किया कि समुद्री निवेश कोष को समुद्री क्षेत्र में इक्विटी फाइनेंसिंग गैप की कमी को पूरा करने और घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक परिवर्तनकारी मंच के रूप में तैयार किया गया है।

इस परामर्श बैठक में एक इंटरैक्टिव ओपन-हाउस सेशन का भी आयोजन किया गया, जिसके दौरान प्रतिभागियों ने समुद्री इकोसिस्टम में फाइनेंसिंग की कमी, निवेश प्राथमिकताओं, कोष की संरचना, गवर्नेंस, पोर्टफोलियो निर्माण, निवेश उपकरणों, फंड जुटाने की रणनीति और सेक्टर के विशिष्ट अवसरों पर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। इसके साथ ही, चर्चा में ग्रीन शिपिंग, शिप लीजिंग, मैरीटाइम टेक्नोलॉजी, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के अवसरों जैसे उभरते विषयों को भी शामिल किया गया।

समुद्री निवेश कोष (एमआईएफ) के बारे में

भारत के मैरीटाइम सेक्टर में दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी जुटाने के लिए, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की पहल—समुद्री विकास कोष के तहत मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (एमआईएफ) की स्थापना की जा रही है। इस कोष का उद्देश्य व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समुद्री व्यवसायों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को 'पेशेंट इक्विटी कैपिटल' (लंबे समय के लिए निवेश की जाने वाली इक्विटी पूंजी) प्रदान करके मौजूदा वित्तपोषण प्रणालियों को सुदृढ़ करना है, जिससे इस क्षेत्र के लिए सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को गति प्रदान की जा सके।

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