जल शक्ति मंत्रालय
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प्रौद्योगिकी तब सफल होती है जब वह लोगों तक पहुँचती है और समुदायों के लिए इसका उपयोग करना आसान होता है: श्री सी.आर. पाटिल


नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और जल शक्ति एवं रेल राज्य मंत्री की उपस्थिति में डीडीडब्ल्यूएस इनोवेशन चैलेंज का ग्रैंड फिनाले आयोजित

ग्रामीण भारत में सुरक्षित पेयजल और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए नवोन्मेषी समाधान प्रस्तुत किए गए

सरकार ने ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए किफायती, बड़े पैमाने पर विस्तार योग्य और समुदाय-अनुकूल नवोन्मेष का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 30 JUN 2026 6:38PM by PIB Delhi

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रौद्योगिकी वास्तव में तभी सफल होती है जब वह लोगों तक पहुँचती है और समुदायों के लिए इसका उपयोग करना आसान होता है। आज नई दिल्ली में आयोजित पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के 'इनोवेशन चैलेंज ग्रैंड फिनाले' को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'जल जीवन मिशन' ने करोड़ों घरों तक नल से पानी का कनेक्शन पहुँचाकर ग्रामीण परिवारों के जीवन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस मिशन को अब जल सुरक्षा पर समान ध्यान देते हुए आगे बढ़ना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर घर को न केवल जल, बल्कि सुरक्षित पेयजल मिले। उन्होंने स्टार्ट-अप्स, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो किफायती, संवहनीय, लगाने में आसान और ग्रामीण परिस्थितियों के अनुकूल हों।

श्री सी.आर. पाटिल ने इस बात पर जोर दिया कि पानी की गुणवत्ता सरकार के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है। कई दूर-दराज के गांवों में, पेयजल की समय पर जांच करना आज भी एक चुनौती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीने लायक पानी के लिए ऐसी सस्ती और आसानी से इस्तेमाल होने वाली प्रौद्योगिकियों की ज़रूरत है, जिनका इस्तेमाल ग्राम पंचायतें, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय युवाओं द्वारा किया जा सके।

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का उल्लेख करते हुए, श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पैकेज्ड उत्पादों का चलन बढ़ रहा है, जिससे प्लास्टिक कचरे में वृद्धि हो रही है। इसमें चिप्स के पैकेट, बिस्कुट के रैपर और पाउच जैसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कचरे को दूर के रीसाइक्लिंग प्लांटों तक ले जाना अक्सर महंगा और मुश्किल होता है। इसलिए, प्लास्टिक कचरे का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करने और कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदलकर 'सर्कुलर इकोनॉमी' के विचार को बढ़ावा देने के लिए ग्राम और ब्लॉक स्तर पर समाधानों की आवश्यकता है।

श्री सी.आर. पाटिल ने आगे कहा कि स्टार्ट-अप आधारित प्रौद्योगिकियों को स्थानीय ज़रूरतों को पूरा करना चाहिए, इस्तेमाल में आसान होना चाहिए और गाँव के युवाओं व स्थानीय उद्यमियों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह 'आत्मनिर्भर भारत' की सच्ची भावना को दर्शाता है और 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण में योगदान देता है।

डीडीडब्ल्यूएस 'इनोवेशन चैलेंज ग्रैंड फिनाले' का आयोजन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल; केंद्रीय जल शक्ति एवं रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना; पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा; अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक एनजेजेएम श्री कमल किशोर सोअन और संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (स्वच्छ भारत मिशन - ग्रामीण) सुश्री ऐश्वर्या सिंह की उपस्थिति में किया गया। इस कार्यक्रम में डीडीडब्ल्यूएस के वरिष्ठ अधिकारी, आईआईटी मद्रास के प्रतिनिधि, जूरी सदस्य, स्टार्ट-अप्स, नवोन्मेषक और फाइनल में आने वाले भी शामिल हुए।

दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकताओं—जल जीवन मिशन के तहत सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत छोटे पैमाने पर, लागत प्रभावी व संवहनीय प्लास्टिक कचरा प्रबंधन समाधानों के लिए व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर उपयोगी समाधानों की पहचान करने के लिए आईआईटी मद्रास के सहयोग से डीडीडब्ल्यूएस 'इनोवेशन चैलेंज' का आयोजन किया गया था।

पोर्टल पर कुल 348 आवेदनों का पंजीकरण किया गया था, जिनमें से 'वॉटर इनोवेशन चैलेंज' के तहत 90 आवेदन और 'प्लास्टिक कचरा प्रबंधन' के तहत 66 आवेदन सभी प्रकार से सही पाए गए।

आईआईटी मद्रास की प्रोफेसर लिजी फिलिप की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा ग्रैंड फिनाले में जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत तीन-तीन प्रौद्योगिकियों का चयन किया गया।

जल जीवन मिशन के तहत, 'केमबायोसेंस प्राइवेट लिमिटेड', 'जलज्योति प्रोसेस प्राइवेट लिमिटेड' और 'प्लास्टिक सर्ज इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड' को पुरस्कार के लिए चुना गया। ये समाधान सुवाह्य जल गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों, रासायनिक व जीवाणु संबंधी (बैक्टीरियोलॉजिकल) परीक्षण और फील्ड-टेस्टिंग किट पर केंद्रित थे। इन प्रौद्योगिकियों का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता की जांच को अधिक तेज, आसान और विश्वसनीय बनाना है।

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत, 'क्रॉसलिनक्स प्राइवेट लिमिटेड', 'बायोग्लाइसो प्राइवेट लिमिटेड' और 'विज्ञा क्राफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' को चुना गया। ये समाधान छोटे पैमाने पर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, किफायती व संवहनीय प्रसंस्करण मॉडल और स्थानीय प्लास्टिक कचरा प्रबंधन प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित थे।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल द्वारा विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। चयनित प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा, व्यावहारिकता, बड़े पैमाने पर उपयोगिता और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उनकी उपयुक्तता की आगे जांच की जाएगी। उनके प्रदर्शन के आधार पर, विभाग चुनिंदा ग्रामीण स्थानों पर प्रारंभिक कार्यान्वयन पर विचार कर सकता है।

कार्यक्रम की रूपरेखा तय करते हुए, पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों की संवहनीय बनाने में नवोन्मेष की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहाँ 'जल जीवन मिशन' और 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण' ने बड़े पैमाने पर ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण किया है, वहीं अगले चरण में प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों के माध्यम से विश्वसनीय, किफायती और संवहनीय सेवा वितरण सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

आईआईटी मद्रास के सहयोग से आयोजित 'डीडीडब्ल्यूएस इनोवेशन चैलेंज' के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए, सचिव महोदय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दो प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर उपयोगी नवाचारों को खोजना है: जेजेएम के तहत सुवाह्य जल गुणवत्ता परीक्षण प्रौद्योगिकियाँ और 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीणके तहत छोटे पैमाने पर, लागत प्रभावी प्लास्टिक कचरा प्रबंधन समाधान। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण भारत के लिए डिज़ाइन की गई प्रौद्योगिकियाँ सरल, किफायती, संवहनीय और मैदानी स्थितियों  के अनुकूल होनी चाहिए, ताकि पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, फील्ड कार्यकर्ताओं और अंततः स्थानीय नागरिकों द्वारा इन्हें व्यापक रूप से अपनाया जा सके।

जल गुणवत्ता की निगरानी को सभी के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए, श्री अशोक के.के. मीणा ने कहा कि मोबाइल एप्लिकेशन से जुड़े सुवाह्य परीक्षण उपकरण जल गुणवत्ता की निगरानी की गति, पारदर्शिता और विश्वसनीयता में काफी सुधार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियों में वास्तविक समय में डेटा रिकॉर्डिंग, जियो-टैगिंग और त्वरित रिपोर्टिंग को सक्षम करने की क्षमता है, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी और ग्रामीण पेयजल सेवाओं में जनता का विश्वास बढ़ेगा।

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर, सचिव ने पारंपरिक कचरा संग्रह और निपटान के बजाय विकेंद्रीकृत सर्कुलर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मॉडल को अपनाने की वकालत की। उन्होंने उल्लेख किया कि स्थानीय स्तर पर पुनर्चक्रण, पुनरुपयोग और संसाधन रिकवरी को बढ़ावा देने वाले नवाचार न केवल पर्यावरणीय प्रभावों और परिवहन लागत को कम करेंगे, बल्कि संवहनीय  ग्रामीण कचरा प्रबंधन का समर्थन करते हुए आजीविका के अवसर भी पैदा करेंगे। उन्होंने दोहराया कि डीडीडब्ल्यूएस उन नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जो किफायती, बड़े पैमाने पर उपयोगी, मरम्मत योग्य, डेटा-सक्षम हों और देश भर में ग्रामीण जल आपूर्ति व स्वच्छता सेवाओं की दीर्घकालिक संवहनीयता को बेहतर बनाने में सक्षम हों।

विजेताओं को बधाई देते हुए, डीडीडब्ल्यूएस सचिव ने विश्वास व्यक्त किया कि इस चुनौती के माध्यम से पहचाने गए नवाचार प्रतियोगिता से आगे बढ़ेंगे और सेवा वितरण में सुधार, सामुदायिक संस्थानों को मजबूत करने और ग्रामीण भारत में जीवन को आसान बनाने में सार्थक योगदान देंगे।

इस कार्यक्रम में आईआईटी मद्रास द्वारा 'इनोवेशन चैलेंज' की प्रक्रिया, चयन पद्धति, मूल्यांकन मानदंडों और अंतिम चरण तक के इस सफर पर एक प्रेजेंटेशन भी दिया गया। इस प्रस्तुति का नेतृत्व आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर लिजी फिलिप ने किया।

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पीके/केसी/एसके


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