पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
जैव विविधता के परिणामस्वरूप भारत के एबीएस संरचना से लाभार्थियों को 145 करोड़ रुपये प्राप्त हुए
इसका लाभ 23 राज्यों एवं चार केंद्र शासित प्रदेशों में 10,500 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों तक पहुंचा
प्रविष्टि तिथि:
20 JUN 2026 7:15PM by PIB Delhi
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत भारत के एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) संरचना ने लाभ-साझाकरण के लिए 266 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटा चुका है और लगभग 145 करोड़ रुपये लाभार्थियों में वितरित किया गया है जो यह दर्शाता है कि देश जैविक संसाधनों एवं उनसे जुड़े ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभों का न्यायसंगत एवं समान वितरण सुनिश्चित कर रहा है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने 2008 से एबीएस संरचना के माध्यम से 266 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्राप्त 21.26 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। औसतन सालाना 14.75 करोड़ रुपये की आमदनी के साथ, संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि उद्योग की बढ़ती भागीदारी एवं अनुपालन को दर्शाती है और यह भारत के अग्रणी एबीएस प्रणाली की सफलता की पुष्टि करती है जो जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों को स्थानीय समुदायों तक पहुंचाती है।
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत, जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभ स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, किसानों, पारंपरिक ज्ञान धारकों एवं जैव विविधता के अन्य संरक्षकों के साथ साझा किए जाते हैं। एबीएस संरचना के क्रियान्वयन के बाद से, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा लाभ-साझेदारी भुगतान के रूप में लगभग 145 करोड़ रुपये वितरित किया गया है जिनमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान वितरित 78 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
इसका लाभ 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की 10,500 से ज़्यादा जैव विविधता प्रबंधन समितियों, 230 से ज़्यादा किसानों, छह राज्य वन विभागों एवं कई संस्थानों को प्राप्त हुआ है। इस संरचना ने लाल चंदन से जुड़े छह अनुसंधान परियोजनाओं को भी सहायता प्रदान की है।
एबीएस यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों एवं संबंधित ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभ स्थानीय समुदायों, किसानों, पारंपरिक ज्ञान धारकों एवं अन्य लाभार्थियों के पास निष्पक्ष एवं समान रूप से पहुंचे। जैव विविधता के उपयोग को सामुदायिक लाभों से जोड़कर, यह प्रणाली संरक्षण, सतत उपयोग एवं जमीनी स्तर पर आजीविका में सुधार को बढ़ावा देती है।
एबीएस तंत्र ने विविध जैविक संसाधनों का उपयोग कर लाभ उत्पन्न किया है जिनमें लाल चंदन, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, बीज, पशुधन आनुवंशिक संसाधन, कच्ची जड़ी-बूटियां, जैवरासायनिक घटक एवं सूक्ष्मजीव शामिल हैं।
क्षेत्रवार विश्लेषण करने पता चलता है कि लाल चंदन का एबीएस प्राप्ति में सबसे बड़ा योगदान है जो 120 करोड़ रुपये (45 प्रतिशत) है, इसके बाद बीज क्षेत्र का योगदान 84.61 करोड़ रुपये (32.3 प्रतिशत) है। इसमें औषधि एवं आयुष क्षेत्र का योगदान 36.61 करोड़ रुपये (13.8 प्रतिशत) है। संयुक्त रूप से इन क्षेत्रों का कुल प्राप्त एबीएस में लगभग 91 प्रतिशत का योगदान है।
प्रमुख योगदानकर्ताओं में पायनियर ओवरसीज़ कॉर्पोरेशन, ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट-वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सवाना सीड्स, टाटा केमिकल्स, सिंजेंटा, हिमालय वेलनेस कंपनी, डाबर इंडिया लिमिटेड, ऑर्गेनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, लॉरस लैब्स लिमिटेड, एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, सिनर्जिया लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, नोवोज़ाइम्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड, अकाय नेचुरल इंग्रीडिएंट्स प्राइवेट लिमिटेड, वालाग्रो बायो-साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, लोरियल इंडिया प्राइवेट, एडवांस्ड एंजाइम्स प्राइवेट लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, एसआईएलएबी एस.ए., बीएएसएफ ब्यूटी केयर सॉल्यूशंस, फ्रांस एस.ए.एस. और तमाम कॉर्पोरेशन शामिल हैं।
जैव विविधता नियम, 2024 के अनुसार, एनबीए एबीएस राशि का 85-90 प्रतिशत संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों को लाभार्थियों तक वितरित करने के लिए स्थानांतरित किया जाता है।
स्थानीय स्तर पर, एबीएस निधि का उपयोग जैव-विविधता के संरक्षण एवं प्राकृतिक आवास को बहाल करने, 'पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर' (पीबीआर) को तैयार एवं अपडेट करने, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण करने, औषधीय पौधों के पार्क एवं कम्युनिटी जीन बैंक बनाने, क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के लिए सतत आजीविका की पहल के लिए किया जाता है। ये निवेश ज़मीनी स्तर पर संरक्षण के प्रयासों को मज़बूत कर रहे हैं और साथ ही स्थानीय समुदायों के लिए ठोस सामाजिक-आर्थिक लाभ भी उत्पन्न कर रहे हैं।
संसाधनों को संरक्षण के लिए जुटाकर और यह सुनिश्चित करते हुए कि लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे, भारत का एबीएस संरचना नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों को आगे बढ़ा रहा है, राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना 2024-2030 का समर्थन कर रहा है और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता संरचना में योगदान दे रहा है, खासकर निष्पक्ष एवं समान लाभ साझा करने वाले लक्ष्य 13 में। यह संरचना गरीबी कम करने, सम्मानजनक काम एवं आर्थिक विकास, जिम्मेदार खपत एवं उत्पादन, जलवायु कार्रवाई और स्थलीय जीवन से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों में भी योगदान देता है।
266 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि जुटाने एवं लगभग 145 करोड़ रुपये लाभार्थियों के साथ साझा करने के साथ, भारत का एबीएस संरचना जैव-विविधता संरक्षण को लोगों एवं प्रकृति के लिए ठोस लाभ में परिवर्तित करने वाले एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त मॉडल रूप मे काम करता है।
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पीके/केसी/एके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2275839)
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