कोयला मंत्रालय
कोयला मंत्रालय ने मुंबई में सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर तीसरे रोडशो का आयोजन किया
प्रविष्टि तिथि:
18 JUN 2026 8:48PM by PIB Delhi
कोयला मंत्रालय ने आज मुंबई में सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर तीसरे रोडशो का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस आयोजन ने कोयला गैसीकरण को गति देने तथा भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव में उद्योग की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया। इस कार्यक्रम में अग्रणी उद्योग हितधारकों, राज्य के प्रतिनिधियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, निवेशकों, कोयला कंपनियों तथा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह भागीदारी देश के प्रचुर कोयला संसाधनों में मूल्य संवर्धन के लिए कोयला गैसीकरण के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है।
इस रोडशो में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस विशेष अतिथि तथा केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त, कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री सनोज कुमार झा, कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव श्रीमती रुपिंदर बरार सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कोयले के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी प्रदाता, निवेशक तथा कोयला एवं ऊर्जा क्षेत्र के अन्य प्रमुख हितधारक भी उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने महाराष्ट्र के कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने में अग्रणी राज्य के रूप में उभरने पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य ने ऐसी परियोजनाओं के लिए भूमि, बिजली तथा सहायक अवसंरचना की उपलब्धता सुनिश्चित कर एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का सक्रिय रूप से निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पाँच कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ विकासाधीन हैं तथा प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ टन कोयले का उत्पादन करने वाली वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) की मजबूत उपस्थिति के कारण महाराष्ट्र के पास एक प्रमुख कोयला गैसीकरण केंद्र के रूप में विकसित होने के लिए आवश्यक संसाधन और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध हैं। उन्होंने महाराष्ट्र को सहकारी संघवाद का एक आदर्श उदाहरण बताते हुए कहा कि केंद्र, राज्य सरकार और उद्योग मिलकर कोयला गैसीकरण की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने के लिए निकट सहयोग से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
श्री रेड्डी ने इस बात पर बल दिया कि विश्व के पाँचवें सबसे बड़े कोयला भंडार - 400 अरब टन से अधिक - से समृद्ध भारत के पास अपने प्रचुर कोयला संसाधनों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित कर देश के औद्योगिक परिदृश्य में परिवर्तन लाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता देश है। साथ ही, कोल इंडिया लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है तथा छत्तीसगढ़ की गेवरा खदान विश्व की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर, कोयला भारत की 70 प्रतिशत से अधिक विद्युत मांग को पूरा करता है और देश के ऊर्जा मिश्रण में लगभग 55 प्रतिशत का योगदान देता है, वहीं सरकार घरेलू कोयला संसाधनों के अधिक स्वच्छ और दक्ष उपयोग के माध्यम से वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध है।
कोयला गैसीकरण को भारत के भविष्य का एक रणनीतिक स्तंभ बताते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि यह दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, आयात प्रतिस्थापन, औद्योगिक आत्मनिर्भरता तथा आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करने का प्रमुख माध्यम है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण के माध्यम से सिंथेसिस गैस (सिंगैस), मेथनॉल, अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट, हाइड्रोजन, एथेनॉल, यूरिया, स्थायी विमानन ईंधन, डीआरआई-ग्रेड अपचायक गैस तथा अन्य अनेक मूल्यवर्धित रसायनों का उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिन उत्पादों का बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है, उनका उत्पादन कोयला गैसीकरण के माध्यम से देश में ही बढ़ते स्तर पर किया जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और उर्वरक, इस्पात, रसायन, परिवहन तथा स्वच्छ ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई औद्योगिक मूल्य शृंखलाओं का विकास होगा।
राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन का उल्लेख करते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले का गैसीकरण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की प्रोत्साहन योजना बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देगी, प्रौद्योगिकी को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाएगी तथा भारत को कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करेगी। उन्होंने बताया कि हितधारकों से परामर्श के लिए प्रस्ताव आमंत्रण दस्तावेज़ (आरएफपी) का प्रारूप सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है तथा कार्यान्वयन ढाँचे को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से रचनात्मक सुझाव और प्रतिक्रियाएँ आमंत्रित की गई हैं। अंत में, उन्होंने सभी हितधारकों से इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाने तथा भारत के कोयला गैसीकरण कार्यक्रम को वैश्विक सफलता की मिसाल बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण पर आयोजित इस रोडशो के लिए मुंबई सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है, क्योंकि कोयला गैसीकरण के साथ इस शहर का संबंध वर्ष 1862 से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उस समय मुंबई ने कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई थी, उसी प्रकार आज इतिहास स्वयं को दोहरा रहा है और यह शहर एक बार फिर इस परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने में केंद्र बिंदु की भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा कोयला मंत्रालय के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत आधुनिक प्रौद्योगिकियों से संचालित कोयला गैसीकरण के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। इस बात पर बल देते हुए कि आत्मनिर्भर भारत ही विकसित भारत का मार्ग है, उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्रगति और सुदृढ़ता का आधार है। उन्होंने कहा कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता देश को वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और आपूर्ति शृंखला में आने वाले व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बनाती है। इसलिए देश की ऊर्जा और औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत अक्षय और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, फिर भी देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी। उन्होंने कोयला गैसीकरण को आत्मनिर्भरता और सतत् विकास की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रौद्योगिकी घरेलू कोयला संसाधनों के अधिक स्वच्छ और दक्ष उपयोग का मार्ग प्रशस्त करती है। साथ ही, यह आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ करने, रोजगार के अवसर सृजित करने तथा राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में सहायक है। उन्होंने आगे कहा कि कोयला गैसीकरण के माध्यम से रसायन, उर्वरक, मेथनॉल, हाइड्रोजन तथा अन्य औद्योगिक कच्चे माल सहित अनेक मूल्य-वर्धित उत्पादों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ता मिलेगी तथा देश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
निवेशकों और उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों से इस परिवर्तनकारी यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए श्री फडणवीस ने निवेश के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराने की महाराष्ट्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि निवेशकों की सफलता देश की सफलता से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोयला गैसीकरण भारत के विशाल कोयला भंडार से अधिक मूल्य प्राप्त करने के साथ-साथ कोयले के अधिक स्वच्छ और दक्ष उपयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार सहायक नीतियों, प्रौद्योगिकी नवाचार तथा उद्योग के साथ निकट सहयोग के माध्यम से वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को गति देने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी हितधारकों से इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के विज़़न को समर्थन देने वाले सुदृढ़ घरेलू कोयला गैसीकरण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित इस योजना को भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक पहलों में से एक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देश के कोयला क्षेत्र में परिवर्तन लाना तथा दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि मुंबई में आयोजित यह रोडशो, जो इस श्रृंखला का तीसरा रोडशो है, योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए उद्योग जगत के हितधारकों के साथ मंत्रालय के निरंतर संवाद का हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह पहल केवल कोयला गैसीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य नई औद्योगिक क्षमताओं का विकास करना, आयात पर निर्भरता कम करना, डाउनस्ट्रीम उत्पादों के उच्च मूल्य वाले विनिर्माण को बढ़ावा देना, निवेश और रोजगार सृजित करना तथा आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप देश के प्रचुर कोयला संसाधनों की पूर्ण क्षमता का उपयोग करना है। उन्होंने जनवरी 2024 में अनुमोदित 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत 65,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली आठ परियोजनाओं पर पहले ही कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिन्हें 6,233 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन सहायता प्रदान की जा रही है। इन परियोजनाओं में कोयले से एसएनजी, एथेनॉल, हाइड्रोजन, एसीटिक अम्ल, अमोनियम नाइट्रेट, डीआरआई-आधारित इस्पात तथा स्थायी विमानन ईंधन जैसे विविध क्षेत्रों को शामिल किया गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन की सफलता केवल सरकारी समर्थन पर निर्भर नहीं है, बल्कि उद्योग का विज़न, नवाचार, निवेश और कार्यान्वयन क्षमता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने नई योजना को केवल एक वित्तीय प्रोत्साहन कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सहयोगात्मक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह योजना प्रौद्योगिकी-तटस्थ है, जिससे परियोजना विकासकर्ताओं को अपने फीडस्टॉक और उत्पाद संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त प्रौद्योगिकी अपनाने का लचीलापन मिलता है। साथ ही, यह भारत के अधिक राख वाले कोयले के अनुरूप स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास को भी प्रोत्साहित करती है। हितधारकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए श्री दत्त ने बताया कि योजना की रूपरेखा तथा प्रस्ताव आमंत्रण दस्तावेज़ (आरएफपी) के प्रारूप को हितधारकों की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया गया है तथा व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परामर्श की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है। उन्होंने उद्योग जगत से रचनात्मक सुझाव देने का आग्रह किया, जिससे योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए एक सुदृढ़, पारदर्शी तथा उद्योगोन्मुखी रूपरेखा का संयुक्त रूप से निर्माण किया जा सके।
रोडशो के दौरान योजना की रूपरेखा, पात्रता मानदंड, बोली प्रक्रिया तथा प्रस्ताव आमंत्रण दस्तावेज़ (आरएफपी) के प्रारूप पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। एयर प्रोडक्ट्स, ग्रेटा एनर्जी तथा एनटीपीसी की प्रस्तुतियों में कोयला गैसीकरण क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय प्रगति, परियोजना विकास रणनीतियों तथा उभरते अवसरों पर प्रकाश डाला गया। महाराष्ट्र सरकार ने क्लस्टर-आधारित विकास के लिए अपनी नीतिगत प्रोत्साहन व्यवस्थाओं का प्रदर्शन किया, जबकि भारतीय स्टेट बैंक ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तपोषण तंत्र पर अपने विचार साझा किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हितधारकों को देश में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए उपलब्ध नीतिगत, प्रौद्योगिकीय और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की व्यापक जानकारी प्राप्त हुई।
रोडशो के दौरान एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हितधारकों के प्रश्नों का उत्तर दिया और परियोजना कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी अपनाने, वित्तपोषण, विनियामक प्रावधानों तथा बोली प्रक्रिया सहित योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान किया। इन चर्चाओं से उद्योग जगत का सशक्त विश्वास परिलक्षित हुआ तथा भारत के प्रचुर कोयला संसाधनों के अधिक स्वच्छ और दक्ष उपयोग को बढ़ावा देते हुए औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने में कोयला गैसीकरण की अपार संभावनाएँ भी उजागर हुईं।
कोयला मंत्रालय भारत के भावी ऊर्जा एवं औद्योगिक परिदृश्य के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुंबई में आयोजित इस सफल रोडशो ने निरंतर नीतिगत समर्थन, प्रौद्योगिकीय प्रगति तथा उद्योग के साथ घनिष्ठ साझेदारी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कोयला गैसीकरण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार के संकल्प को और सुदृढ़ किया है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2274992)
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