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शहरी सड़कों का कायापलट: सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी ने टिकाऊ सड़क पुनर्निर्माण और गड्ढों की त्वरित मरम्मत के लिए रणनीतिक साझेदारी की

प्रविष्टि तिथि: 12 JUN 2026 1:59PM by PIB Delhi

सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के बीच 10 जून 2026 को सड़कों के कार्यात्मक और संरचनात्मक मूल्यांकन, निर्माण गुणवत्ता पर्यवेक्षण और एमसीडी के इंजीनियरों तथा कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर, सीएसआईआर-सीआरआरआई द्वारा विकसित लौह और इस्पात स्लैग समुच्चय आधारित त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक - इकोफिक्स के कार्यान्वयन के लिए एक द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इस साझेदारी का उद्देश्य वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता आश्वासन और नवीन रखरखाव प्रौद्योगिकियों को अपनाते हुए दिल्ली के सड़क बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, स्थायित्व और निरंतरता को बढ़ाना है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए एमसीडी आयुक्त श्री संजीव खीरवार, आईएएस ने शहरी सड़क नियोजन और रखरखाव में प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोणों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग एमसीडी की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करेगा और साथ ही इकोफिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से त्वरित और अधिक टिकाऊ मरम्मत को सक्षम बनाएगा।

सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी के अधिकृत प्रतिनिधियों के बीच एमसीडी सड़कों के संरचनात्मक मूल्यांकन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान

सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी के अधिकृत प्रतिनिधियों के बीच इकोफिक्स तकनीक का उपयोग करके तत्काल गड्ढों की मरम्मत के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. चौधरी रवि शेखर ने अतिथिगणों का स्वागत करते हुए सड़क क्षेत्र में संस्थान के सात दशकों के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि यह साझेदारी एमसीडी को सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने आगे कहा कि स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी- इकोफिक्स, रेजुपेव और एमएसएस+ जैसी प्रौद्योगिकियां संसाधन संरक्षण, चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों और कार्बन उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देती हैं।

इस पहल का नेतृत्व सीएसआईआर-सीआरआरआई के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड और इकोफिक्स तकनीक के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को सहयोग के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और उन्नत रखरखाव तकनीकों को अपनाने से सड़क की उपयोगिता, टिकाऊपन और जीवनचक्र प्रदर्शन में सुधार होगा, साथ ही रखरखाव संबंधी व्यवधानों को भी कम किया जा सकेगा।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण इकोफिक्स के उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर करना था। इकोफिक्स एक त्वरित और टिकाऊ गड्ढा मरम्मत तकनीक है जिसे संसाधित लोहे और इस्पात स्लैग एग्रीगेट का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह तकनीक औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग करके टिकाऊ सड़क रखरखाव के माध्यम से अपशिष्ट से धन-संपन्नता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का समर्थन करती है, जिससे स्थायित्व में सुधार होता है और वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय प्रभावों को कम किया जा सकता है। बेहतर सड़क स्थिति और समय पर रखरखाव से सड़क पर धूल का उत्पादन कम होने की उम्मीद है, जबकि इस्पात स्लैग और पुनर्चक्रण-आधारित तकनीकों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं का समर्थन करता है।

इस कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें एमसीडी के अपर आयुक्त श्री एल.डी. मेघवाल; एमसीडी में इंजीनियर-इन-चीफ श्री प्रेम चंद मीना; एमसीडी में मुख्य अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण) श्री बृजेश कुमार; मुख्य अभियंता (भंडार) श्री संदीप मल्होत्रा, और एमसीडी में सलाहकार (योजना) तथा पूर्व मुख्य अभियंता श्री मनीष रस्तोगी; मुख्य वैज्ञानिक और पीएमई प्रमुख डॉ. विनोद करार; सीएसआईआर-सीसीआरआई में मुख्य वैज्ञानिक और आईएलटी डिवीजन प्रमुख डॉ. के. रविंदर शामिल थे। इनके साथ ही शहरी अवसंरचना क्षेत्र के वैज्ञानिक, अभियंता और अन्य हितधारक भी मौजूद थे।

यह पहल राष्ट्रीय राजधानी के लिए सुदृढ़, टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित सड़क अवसंरचना विकसित करने की दिशा में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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पीके/केसी/एके/एमपी

 


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