कोयला मंत्रालय
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कोयला मंत्रालय ने हैदराबाद में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं पर सफल रोडशो आयोजित किया

प्रविष्टि तिथि: 11 JUN 2026 9:21PM by PIB Delhi

कोयला मंत्रालय ने आज हैदराबाद में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं पर एक बड़े रोडशो का सफलतापूर्वक समापन किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधि, तकनीकी प्रदाता, निवेशक, वित्तीय संस्थान, कोयला और लिग्नाइट कंपनियां, उद्योग संघ तथा केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह भारत सरकार के कोयला गैसीकरण को तेज करने और देश के प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कोयला संसाधनों के स्वच्छ, मूल्य-वर्धित उपयोग को बढ़ावा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्यक्रम था। रोडशो में निवेश के अवसरों, नीति समर्थन तंत्र, तकनीकी उन्नयन, कार्यान्वयन रणनीतियों और देश में मजबूत कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर गहन चर्चा हुई।

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इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने मुख्य अतिथि के तौर पर तथा कोयला और खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने सम्मानित अतिथि के तौर पर भाग लिया। इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त, कोयला मंत्रालय के अपर सचिव श्री सनोज़ कुमार झा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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हैदराबाद में कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं पर आयोजित रोडशो में अपने मुख्य भाषण के दौरान, केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने भारत के मजबूत संसाधन आधार और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश के पास लगभग 400 बिलियन टन कोयले का भंडार है - जो दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा भंडार है और कई दशकों तक के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि आज भारत कोयले का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है; देश में बिजली उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा कोयले पर निर्भर है और लाखों लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी है। इस प्रचुर संसाधन के बेहतर इस्तेमाल की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने कोयला गैसीकरण को भारत के ऊर्जा और औद्योगिक भविष्य के लिए एक परिवर्तनकारी अवसर बताया।

श्री रेड्डी ने उल्लेख किया कि कोयले के विशाल भंडार के बावजूद, भारत अभी भी मेथनॉल, अमोनिया, उर्वरक फीडस्टॉक और कई ज़रूरी औद्योगिक रसायन के आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जिससे हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। उन्होंने बताया कि कोयला गैसीकरण घरेलू कोयले को ज़्यादा मूल्य वाले उत्पादों में बदलने, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और आर्थिक सुदृढ़ता बढ़ाने का एक रणनीतिक रास्ता है। पारदर्शी और सलाह-मशविरा आधारित लागू करने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने हितधारकों को बताया कि 'प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) का मसौदा को पहले ही सुझावों और राय के लिए सार्वजनिक कर दिया गया है। इस फ्रेमवर्क को और मज़बूत करने के लिए उन्होंने उद्योग जगत के हितधारकों को अपने कीमती सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया।

मंत्री ने बताया कि कुल ₹46,000 करोड़ की लागत से 'सतह कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने' की संयुक्त योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी भारत की ऊर्जा और औद्योगिक यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है और यह पूरे देश में बड़े पैमाने पर गैसीकरण परियोजनाओं को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में सुधार करने, जिसमें कारोबार करने में आसानी एक प्रमुख प्राथमिकता है तथा निवेशकों और तकनीकी प्रदाताओं के लिए एक सहायक इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा, उन्होंने सरकार की पारदर्शिता और जिम्मेदारी के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि कोयला गैसीकरण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए परामर्श-आधारित, उद्योग-मित्रवत और निवेशक-केंद्रित दृष्टिकोण केंद्रीय रहेगा। कोयला गैसीकरण निवेशों के लिए दुनिया के सबसे पसंदीदा देशों में से एक के रूप में भारत के उभरने के प्रति आशा व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि देश कोयला गैसीकरण युग में प्रवेश करने के लिए तैयार है।उन्होंने कहा, “हमारे पास कोयला प्रचुर मात्रा में है, हमारे पास नीतिगत समर्थन है, और हमारे पास प्रतिबद्धता है। कोयला गैसीकरण औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत का नया संचालक बनेगा।

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रोडशो को संबोधित करते हुए, कोयला और खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने आत्मनिर्भर और विकसित भारत के विज़न को साकार करने में कोयला गैसीकरण के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपने घरेलू संसाधनों से ईंधन, उर्वरक, रसायन और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक इनपुट्स निर्माण में सक्षम देश दीर्घावधि के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, आयात पर निर्भरता कम करने और अपनी आर्थिक मजबूती बढ़ाने के लिए बेहतर स्थिति में होता है।

श्री दुबे ने यह रेखांकित किया कि सतह कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ₹37,500 करोड़ की योजना इस बात को दर्शाती है कि वह भारत के भरपूर कोयला संसाधनों का अधिक कुशल, स्थायी और मूल्य वर्धित तरीके से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस क्षेत्र की परिवर्तनकारी संभावनाओं पर भरोसा व्यक्त करते हुए, श्री दुबे ने कहा कि कोयला गैसीकरण बड़ी निवेश राशि को आकर्षित करेगा, उन्नत तकनीकों को अपनाने को प्रोत्साहित करेगा, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा और पूरे देश में औद्योगिक विकास को गति देगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोयले को उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में बदलकर, गैसीकरण आर्थिक विकास के नए रास्ते खोल सकता है और भारत की औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि कोयला गैसीकरण भारत के विशाल कोयला भंडार को विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता के शक्तिशाली इंजन में बदलने की क्षमता रखता है, जिससे 2047 तक एक मजबूत, सुदृढ़ और विकसित भारत बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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अपने उद्घाटन भाषण में, श्री विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय, ने कहा कि सरकार ने सतह कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी है, जो एक बड़े पैमाने और रणनीतिक महत्व का कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण भारत के अपने संसाधनों से ईंधन, उर्वरक, रसायन और औद्योगिक इनपुट्स उत्पादन का रास्ता प्रदान करता है, जिन्हें वर्तमान में पर्याप्त मात्रा में और काफी लागत पर आयात किया जा रहा है। भारत के विशाल कोयला भंडार को एक रणनीतिक संपत्ति बताते हुए, उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में कोयला गैसीकरण की भूमिका पर जोर दिया।

श्री दत्त ने हितधारकों को बताया कि जैसा कि नई दिल्ली रोडशो के दौरान वादा किया गया था, प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) मसौदे पर उद्योग की प्रतिक्रिया के लिए इसे सार्वजनिक कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि रोडशो का उद्देश्य योजना और आरएफपी को स्पष्ट रूप से समझाना और साथ ही हितधारकों के सवाल, चिंताएं और सुझाव सुनना था। उद्योग, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और वित्तीय संस्थानों से सक्रिय भागीदारी आमंत्रित करते हुए, उन्होंने उन्हें अंतिम फ्रेमवर्क को आकार देने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में आत्मनिर्भरता के बढ़ते महत्व को उजागर करते हुए, श्री दत्त ने कहा कि पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम ने सुदृढ़ घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता को मजबूत किया है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्रीय कैबिनेट ने योजना को मंजूरी दी है और केंद्रीय समर्थन, राज्य प्रोत्साहन, सुनिश्चित कोयला लिंक और सहायक (डाउनस्ट्रीम) अवसंरचना मिलकर एक मजबूत निवेश इकोसिस्टम बनाते हैं। इस राष्ट्रीय मिशन में उद्योग से साझेदारी करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "यह मौका अभूतपूर्व है। इसकी ज़रूरत तत्काल है। भरपूर सहयोग मिल रहा है। आरएफपी आपके हाथों में है।"

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रोडशो के दौरान, 'सतह पर कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना' के तहत ' प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) मसौदे पर पर एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी गयी। इस प्रस्तुति में योजना के मुख्य पहलुओं को शामिल किया गया, जैसे कि पात्रता मानदंड, बोली लगाने का तरीका, प्रोत्साहन संरचना, कोयला लिंकेज के प्रावधान, परियोजना के मुख्य पड़ाव, मूल्यांकन के पैमाने और भागीदारी की समय-सीमा। हितधारकों को आरएफपी मसौदे पर अपनी राय और सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया गया; इसे एक पारदर्शी और विचार-विमर्श वाली प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक किया गया है। इसके अलावा, बीएचईएल और सीआईएमएफआर ने स्वदेशी कोयला गैसीकरण तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिससे तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता उजागर हुई। महाराष्ट्र ने क्लस्टर-आधारित विकास के लिए अपनी नीतिगत प्रोत्साहनों पर प्रकाश डाला, जबकि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना ने उद्योग की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने और कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम के विकास में तेज़ी लाने के लिए निवेश के आकर्षक अवसर पेश किए।

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रोडशो में एक आपसी-संवाद सत्र और सवाल-जवाब का दौर भी शामिल था, जिसके दौरान हितधारकों ने परियोजना वित्तपोषण, तकनीकी साझेदारी, कोयले की उपलब्धता, नियामक मंज़ूरी, पर्यावरण संबंधी मंज़ूरी, अवसंरचना की ज़रूरतों और डाउनस्ट्रीम अवसरों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजना के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत जवाब दिए, और चर्चाओं से उभरते कोयला गैसीकरण क्षेत्र में उद्योग, निवेशकों, तकनीक प्रदाता और वित्तीय संस्थानों की गहरी रुचि का पता चला।

भारत के ऊर्जा और औद्योगिक भविष्य के एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को मज़बूती से दोहराने के साथ रोडशो का समापन हुआ। निरंतर नीतिगत समर्थन, उद्योग की भागीदारी, तकनीकी साझेदारी और हितधारकों के सहयोग से, यह पहल निवेश, रोज़गार सृजन, आयात प्रतिस्थापन और घरेलू कोयला संसाधनों के मूल्य-वर्धित उपयोग के लिए नए अवसर खोलने के लिए तैयार है। घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मज़बूत करके और महत्वपूर्ण आयातों पर निर्भरता कम करके, कोयला गैसीकरण से भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत तथा सुदृढ़ औद्योगिक भविष्य के विज़न को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

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पीके/केसी/जेके


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