वित्त मंत्रालय
केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आज नई दिल्ली से 'ग्लोबल कन्वर्जेंस फॉर ग्रोथ समिट' पर आयोजित एक वर्चुअल बैठक में भाग लिया
संघर्षों के परिणाम विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ पर असमान रूप से पड़ते हैं और यह स्थिति समन्वित वैश्विक कार्रवाई की मांग करती है: वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन
"हाल के घटनाक्रम एक मजबूत, विविधतापूर्ण और भौगोलिक रूप से विस्तृत आपूर्ति श्रृंखला की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं"
प्रविष्टि तिथि:
11 JUN 2026 11:01PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आज नई दिल्ली से 'ग्लोबल कन्वर्जेंस फॉर ग्रोथ समिट' पर आयोजित एक वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया।

यह समिट विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नीति-निर्धारकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, ताकि एक कुशल ग्लोबल फ्रेमवर्क के भीतर संतुलित विकास को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की जा सके। फ्रांस के राष्ट्रपति महामहिम श्री इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में आयोजित इस समिट में G7 देशों, भारत, ब्राजील, चीन, केन्या, दक्षिण कोरिया के शीर्ष नेतृत्व और आईएमएफ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

समिट में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने संबोधन में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने कहा, “आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में समृद्धि और चुनौतियां साझा हैं, लेकिन संघर्षों और अनिश्चितता का परिणाम विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' पर बहुत ज़्यादा पड़ता है। इस स्थिति में दुनिया को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। हमें मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण, सतत विकास में तेजी लाने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना होगा, ताकि इसका लाभ सभी तक पहुंच सके।

वैश्विक आर्थिक विषमताओं के मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, "सभी असंतुलन एक जैसे नहीं होते; कुछ जनसांख्यिकी, विकास के चरणों, संसाधनों की उपलब्धता या आर्थिक संरचनाओं में भिन्नता को दर्शाते हैं। इसलिए, हमारा ध्यान अत्यधिक और निरंतर बने रहने वाले असंतुलनों पर केंद्रित रहना चाहिए, साथ ही हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि अलग-अलग देशों के बीच घरेलू जरूरतों का स्तर काफी भिन्न होता है।
ग्लोबल साउथ की ओर से बात रखते हुए श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आगे कहा, “सुधार का बोझ उन देशों पर नहीं पड़ना चाहिए जो इन समस्याओं के कारण नहीं हैं। भारत, कई अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तरह, वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव पैदा करने या बढ़ाने में मुख्य रूप से शामिल नहीं रहा है, फिर भी, हमें इनके गलत प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हाल के वर्षों में भारत की उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति और 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के मंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “हमारी विकास यात्रा मुख्य रूप से घरेलू मांग पर आधारित है और हमारी विनिमय दर काफी हद तक बाजार द्वारा निर्धारित है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है और मध्यम अवधि में जीडीपी वृद्धि दर के लगभग 7 प्रतिशत पर मजबूत बने रहने का अनुमान है।”
वित्त मंत्री ने बहुपक्षीय संस्थानों में विश्वास को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि वे विकासशील देशों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बने रहें। उन्होंने बेहतर, बड़े, अधिक प्रभावी और अधिक प्रतिनिधित्व वाले मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंकों की आवश्यकता पर बल दिया, जो विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को काफी अधिक वित्तीय सहायता प्रदान कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इन संस्थानों की ऋण देने की क्षमता, कार्य करने की गति और जवाबदेही को बढ़ाना बहुत महत्वपूर्ण होगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स के लिए मजबूत, विविध और भौगोलिक रूप से वितरित सप्लाई चेन के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सर्कुलरिटी, रीसाइक्लिंग और अर्बन माइनिंग पर ध्यान केंद्रित करके दुनिया के सामने आ रही आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।
अपने संबोधन के समापन में श्रीमती सीतारामन ने कहा कि भारत एक अधिक मजबूत, समावेशी और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए सभी साझेदारों के साथ मिलकर काम करने और पारस्परिक प्रगति के लिए सार्थक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2271943)
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