सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब योजना के माध्यम से समावेशी उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है
विभिन्न उद्यमियों की सफलता की कहानियां इस बात की गवाह हैं कि यह योजना अक्टूबर 2016 से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) उद्यमियों को सशक्त बनाकर परिवर्तनकारी प्रभाव डाल रही है
प्रविष्टि तिथि:
09 JUN 2026 1:43PM by PIB Delhi
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (एनएसएसएच) योजना अक्टूबर 2016 से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) उद्यमियों को सशक्त बनाकर परिवर्तनकारी प्रभाव डाल रही है, क्योंकि भारत 2047 तक एक विकसित भारत की परिकल्पना कर रहा है।
विचार से लेकर सार्वजनिक निविदा बोली जीतने तक: श्री बलवंत लाल सुमन का सफर

एनएसएसएच योजना के परिवर्तनकारी हस्तक्षेप का सबसे अच्छा उदाहरण झारखंड के हजारीबाग के प्रथम पीढ़ी के उद्यमी श्री बलवंत लाल सुमन की प्रेरणादायक कहानी है। पंद्रह वर्षों से अधिक के पेशेवर अनुभव वाले एक मैकेनिकल इंजीनियर ने एक ऐसे उद्यम का निर्माण करने के सपने के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया जिसका विस्तार किया जा सके और सार्वजनिक खरीद के लिए तैयार हो। उन्होंने बुनियादी ढांचे के अनुप्रयोगों के लिए पाइपों का उत्पादन करने वाली एक विनिर्माण इकाई, रिगटेक इंफ्रा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति केंद्र ने विशेष ऋण-आधारित पूंजी सब्सिडी योजना के माध्यम से उन्हें बड़ी सहायता प्रदान की। उन्होंने सितंबर 2023 में उन्नत विनिर्माण उपकरणों के लिए 25 लाख रुपये की पूंजी सब्सिडी का भी लाभ उठाया। मशीनों और उपकरणों के उन्नयन से उत्पादन में वृद्धि हुई, गुणवत्ता में सुधार हुआ, प्रतिस्पर्धात्मकता और ब्रांड मूल्य में बढ़ोतरी हुई। इससे उन्हें सार्वजनिक खरीद आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत होने में मदद मिली। एक बड़ी सफलता तब मिली जब उन्होंने 2025 में रेल विकास निगम लिमिटेड से बाड़ पैनल, खंभों, गेट और चढ़ाई रोधी उपकरणों के लिए निविदाएं प्राप्त कीं। उनके उद्यम ने बाजार का विस्तार किया, 16 लोगों के लिए रोजगार सृजित कर वार्षिक कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की।

एनएसएसएच की मदद से दायरा बढ़ाया : श्री बहादुरभाई पंचियाभाई चौधरी द्वारा विकास की एक कहानी

श्री बहादुरभाई पंचियाभाई चौधरी की सफलता की कहानी भी इस बात का सकारात्मक उदाहरण है कि कैसे एनएसएसएच योजना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमों को सशक्त बना रही है। गुजरात के सूरत निवासी श्री बहादुरभाई पंचियाभाई चौधरी ने जून 2023 में टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर के निर्माण के लिए मॉडफर्न बेंचक्राफ्ट एलएलपी की स्थापना की। एनएसएसएच योजना की मदद ने उन्हें संगठित बाजार और अनुपालन आवश्यकताओं के अनुरूप संचालन को सुव्यवस्थित करने में सक्षम बनाया। संस्थागत मांग को पूरा करने की दृष्टि से, इकाई ने मानकीकृत और टिकाऊ फर्नीचर समाधानों की आवश्यकता वाले सरकारी और शैक्षणिक क्षेत्रों को सेवा प्रदान करने के लिए खुद को स्थापित किया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति केंद्र ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) में एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करने में अहम भूमिका निभाई। कंपनी ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग से आपूर्ति के आदेश सफलतापूर्वक प्राप्त किए और उन्हें पूरा किया। इस विकास पथ पर आगे बढ़ते हुए, उद्यम ने विशेष ऋण-आधारित पूंजी सब्सिडी योजना का लाभ उठाते हुए मार्च 2026 में मशीनरी उन्नयन के लिए 25 लाख रुपये प्राप्त किए। इस पहल से उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई, गुणवत्ता में स्थिरता आई और संचालन को विस्तार योग्य बनाया जा सका, जिससे इकाई सतत विकास और सार्वजनिक खरीद बाजारों में भागीदारी के लिए तैयार हो गई।
बाधाओं को पार करते हुए, उपलब्धि पाई : श्रीमती देवी गुर्जर की दृढ़ संकल्प यात्रा

अजंता बेवरेजेज, राजस्थान के जोधपुर की महिला उद्यमी श्रीमती देवी गुर्जर की एक और प्रेरणादायक कहानी है, जो दर्शाती है कि सही सहयोग से व्यवसाय से जुड़ी बाधाओं को दूर कर प्रभावी ढंग से अपने संचालन का विस्तार कर सकते हैं। पेय पदार्थों और पैकेटबंद पेयजल के निर्माण में कार्यरत इस उद्यम ने संस्थागत मानकों का पालन करते हुए गुणवत्ता, सुरक्षा और विस्तारशीलता को प्राथमिकता दी। विस्तार के एक अहम चरण के दौरान, एनएसएसएच ने मई 2020 में एससीएलसीएसएस के तहत उन्हें 19.41 लाख रुपए की राशि प्राप्त करने में सहायता प्रदान की, जिससे इकाई के आधुनिकीकरण और उत्पादन प्रणालियों को और मजबूत करने में मदद मिली।
अपनी उन्नत क्षमताओं के साथ, कंपनी ने मुख्यधारा के बाजारों और सार्वजनिक खरीद में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। दिसंबर 2025 में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरएल) से ऑर्डर प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसने बड़े पैमाने पर आपूर्ति करने की इसकी क्षमता को मजबूत किया।

देश में समावेशी उद्यमिता को गति देने वाला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति केंद्र
एनएसएसएच योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लघु एवं मध्यम उद्यमों की क्षमता का निर्माण करना और उन्हें सार्वजनिक खरीद में भागीदारी के लिए सशक्त बनाना है ताकि सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति के अनिवार्य 4 प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
एनएसएसएच योजना संयंत्र एवं मशीनरी/उपकरणों की खरीद, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण, बाजार संपर्क, प्रदर्शनियों में भागीदारी की सुविधा, ऋण, उद्यम पंजीकरण और जीईएम में शामिल होने में सहायता प्रदान करती है। ये पहलें समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित कर रही हैं और पूरे देश में अधिक अवसर सृजित करके एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही हैं। इन लक्षित हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले एमएसएसई से सार्वजनिक खरीद में उल्लेखनीय 37 गुना वृद्धि हुई है, जो 2015-16 में 99.37 करोड़ रुपए (0.07 प्रतिशत ) से बढ़कर 2025-26 में 3738.34 करोड़ रुपए (1.59 प्रतिशत) हो गई है। अब तक 1.79 लाख से अधिक मौजूदा और इच्छुक अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों ने एनएसएसएच योजना से विभिन्न लाभ प्राप्त किए हैं।
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए
https://www.scsthub.in/ पर जाएं।
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पीके/केसी/एके/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2270811)
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