कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स -आईआईसीए ऋण शोधन अक्षमता सुधारों के एक दशक और भारत के पुनर्गठन पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा

प्रविष्टि तिथि: 04 JUN 2026 7:04PM by PIB Delhi

केंद्रीय कॉर्पोरेट मंत्रालय के अधीन भारतीय कॉर्पोरेट मामले के संस्थान- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स और ऋण शोधन अक्षमता से संबंधित पेशेवर संस्थाओं का संघ (एआईपीई) संयुक्त रूप से इस महीने 13 जून को प्रधानमंत्री संग्रहालय सभागार, नई दिल्ली में "भारत के पुनर्गठन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्परिभाषित करने: सीखने के एक दशक - भविष्य के लिए दिशाएं" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा।

यह अवसर भारत में ऋण शोधन अक्षमता और पुनर्गठन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (आईबीसी) के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं। कार्यक्रम में नीति निर्माता, नियामक, न्यायिक प्राधिकरण, दिवालियापन विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, उद्योग जगत के दिग्गज, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी भारत में दिवालियापन क्षेत्र की प्रगति और पुनर्गठन प्रणाली की भविष्य दिशा पर विमर्श करने के लिए एकत्रित होंगे।

कार्यक्रम में प्रमुख आकर्षण पोस्ट ग्रेजुएट इनसॉल्वेंसी प्रोग्राम (पीजीआईपी) के छठे बैच का दीक्षांत समारोह होगा, जो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की प्रमुख शैक्षणिक पहल है जिसे भविष्य में ऋण शोधन अक्षमता पेशेवरों को विकसित करने के लिए तैयार किया गया है।

भारत के वित्तीय और कॉर्पोरेट क्षेत्रों की बदलती आवश्यकताए पूरी करने में सक्षम उच्च कुशल दिवालियापन विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी तैयार करने की दृष्टि से स्नातकोत्तर ऋण शोधन अक्षमता कार्यक्रम आरंभ किया गया था। यह कार्यक्रम वर्षों से, एक अद्वितीय क्षमता-विकास पहल के रूप में उभरा है, जिसने ऋण शोधन अक्षमता पेशेवर विशेषज्ञो के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

दीक्षांत समारोह में कॉर्पोरेट मामले राज्य मंत्री, के श्री हर्ष मल्होत्रा ​​मुख्य अतिथि होंगे। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण -एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण दीक्षांत संबोधन देंगे, जबकि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण -एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल विशिष्ट अतिथि रहेंगे। कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय की सचिव श्रीमती दीप्ति गौर मुखर्जी और आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह भी आयोजन को संबोधित करेंगे।

पिछले एक दशक में, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता ने पारदर्शी, समयबद्ध और बाजार-उन्मुख ढांचा स्थापित कर, कंपनियों के संकट समाधान में भारत के दृष्टिकोण में मौलिक बदलाव किया है। इस सुधार से ऋण अनुशासन मजबूत हुआ है, निवेशकों का विश्वास बढ़ा है, मूल्य संवर्धन सुगम बनाया है और देश में समग्र व्यापार सुगमता बढ़ाई है।

भारत के विकसित भारत की भविष्य योजना की ओर बढ़ते कदम के बीच इस सम्मेलन का उद्देश्य संस्थागत सुदृढ़ीकरण, नवाचार, हितधारक सहयोग और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रगतिवादी चर्चाओं को बढ़ावा देना है जो भारत के दिवालियापन ढांचे के निरंतर विकास का समर्थन करे।

सम्मेलन में चार उच्च स्तरीय विषयगत सत्र होंगे जिनमें निम्नलिखित विषय शामिल होंगे:

· दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता-आईबीसी के अंतर्गत सीमा पार दिवालियापन ढांचा: वैश्विक मानक, घरेलू तैयारी और रणनीतिक चुनौतियां;

  • आईबीसी के तहत प्रारंभिक चरण के समाधान की पुनर्कल्पना (वस्तु या प्रक्रिया में बदलाव कर उसे एक नया और बेहतर दृष्टिकोण देना): प्री-पैकेज्ड इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया    (यह प्रक्रिया कंपनी के प्रबंधन को अपने पास रखते हुए लेनदारों के साथ मिलकर कर्ज चुकाने की योजना बनाने की अनुमति देती है) लेनदार-प्रेरित दिवाला समाधान प्रक्रिया, हाइब्रिड समाधान मॉडल और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र की विस्तारित भूमिका;
  • संकटग्रस्त परिसंपत्तियों में मूल्य उजागर करना: एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी , वैकल्पिक निवेश कोष और संस्थागत पूंजी द्वारा एक परिपक्व संकटग्रस्त परिसंपत्ति पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण; और
  • प्रौद्योगिकी, नवाचार, सूचना अवसंरचना और संस्थागत स्थिति अनुरूपन के माध्यम से भविष्योन्मुखी दिवालियापन पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित करना।

कार्यक्रम में कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय, भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण, दिवालियापन पेशेवर एजेंसियों, सूचना उपयोगिताओं, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों, वैकल्पिक निवेश फंडों, कानूनी और सलाहकार फर्मों, कॉर्पोरेट नेताओं, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स -आईआईसीए एक प्रमुख विचार मंच, क्षमता निर्माण और नीति सलाहकार संस्थान है। आईआईसीए कॉर्पोरेट गवर्नेंस, दिवालियापन, प्रतिस्पर्धा कानून, पर्यावरण, सामाजिक और शासन-ईएसजी, दायित्वपूर्ण व्यावसायिक आचरण, सार्वजनिक नीति और आर्थिक शासन में उत्कृष्टता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह आयोजन भारत के लिए मजबूत, स्थिति अनुकूल ढलने और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी दिवालियापन तंत्र के समर्थन में विचार नेतृत्व, पेशेवर उत्कृष्टता, क्षमता विकास, नीतिगत संवाद और संस्थागत विकास को बढ़ावा देने की आईआईसीए की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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पीके/केसी/एकेवी/केएस


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