जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

दिल्ली के विज्ञान भवन में 3 जून 2026 को एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं के सुदृढ़ीकरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन


जनजातीय कार्य मंत्रालय का भारत के अंतिम छोर तक महत्वपूर्ण पहल और योजनाएं पहुंचाने का राष्ट्रव्यापी जनजातीय संपर्क अभियान - जनजातीय गरिमा उत्सव 2026, कल्याणकारी उपायों और सार्वजनिक सेवाओं को दूरस्थ समुदायों तक पहुंचाने को नया आकार दे रहा है

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग, भारतीय विज्ञान संस्थान और 75 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण सुविधा का उद्घाटन करेंगी

प्रविष्टि तिथि: 02 JUN 2026 6:42PM by PIB Delhi

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के दूरदर्शी नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अभूतपूर्व इतिहास रचा है। इसमें एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय नेटवर्क को 499 कार्यरत स्कूलों तक विस्तारित किया गया है, लगभग 30 लाख जनजातीय छात्रों को प्रतिवर्ष 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई है, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान – पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे ऐतिहासिक मिशन आरंभ किए गए हैं, जिनका कुल परिव्यय 1 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। मंत्रालय का वार्षिक बजट 4,295 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 13,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह सब एक विकसित भारत के दृढ़ संकल्प के तहत किया गया है कि विकास यात्रा में कोई भी जनजातीय समुदाय पीछे न छूटे।

जनजातीय कार्य मंत्रालय कल 3 जून, 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं के सुदृढ़ीकरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजित करेगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधान सचिव, जनजातीय कल्याण विभागों के आयुक्त, जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के निदेशक, भारत में जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए गठित प्रशासनिक और विकासात्मक संस्थाएं - एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना के अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और देशभर के पेशेवर प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन में 26 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

भारत की विकास गाथा में कई वर्षों से सबसे बड़ी कमियों में कल्याणकारी योजनाओं का अभाव नहीं, बल्कि दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में उन्हें प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने की चुनौती रही है। भारत के बड़े आदिवासी क्षेत्रों में, नागरिकों को आधार अद्यतन, जाति प्रमाण पत्र, पेंशन स्वीकृति, स्वास्थ्य सेवा पंजीकरण या बैंकिंग जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए प्रायः लंबी दूरी तय करनी होती थी। कई वन और पहाड़ी जिलों में, साधारण प्रशासनिक कार्य के लिए भी प्रखंड या जिला कार्यालयों के कई बार चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे दैनिक मजदूरी का नुकसान, विलम्ब और कल्याणकारी उपायों से वंचित रहना पड़ता था।

18 से 25 मई, 2026 तक जनजातीय क्षेत्रों में संचालित जनभागीदारी अभियान में लंबे समय से चली आ रही शासन संबंधी चुनौती के समाधान के प्रयास किये जा रहे हैं कि भौगोलिक रूप से दुर्गम और सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरकारी सेवाओं को भौतिक रूप से कैसे पहुंचाया जाए। इस अभियान का मूल सिद्धांत है: सबसे दूर, सबसे पहले।

शासन व्यवस्था नागरिकों के और करीब: पारंपरिक जागरूकता अभियानों से अलग, यह अभियान जमीनी स्तर पर प्रत्यक्ष भागीदारी पर केंद्रित है। 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला प्रशासन, जनजातीय कल्याण विभाग, एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियां - आईटीडीए, स्वास्थ्यकर्मी, स्वयंसेवक और सामुदायिक संस्थाएं जनजातीय गांवों और दूरदराज के इलाकों में शिविर आयोजित कर रही हैं। यह दृष्टिकोण सरल पर महत्वपूर्ण है: लोगों से प्रशासनिक कार्यालयों तक जाने की अपेक्षा करने की बजाय, शासन व्यवस्था सीधे गांवों तक पहुंच रही है। कई दूरस्थ समुदायों के लिए, इससे कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंचने का वित्तीय और प्रचालन बोझ दोनों कम हुआ है।

पहुंच की व्यापकता: संसाधनों को पहुंचाने का पैमाना अत्यंत व्यापक रहा है। अब तक संकलित अभियान आंकड़ों के अनुसार, लोगों तक लाभ पहुंचने के उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं:

  • 57,000 से अधिक आउटरीच शिविर और फील्ड गतिविधियां,
  • 90 लाख से अधिक जनजातीय लाभार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया,
  • 1.52 लाख मनरेगा सुविधा पहल,
  • 2.27 लाख आधार सेवा संबंधी पहल,
  • 1.76 लाख आयुष्मान भारत नामांकन,
  • 1.09 लाख राशन कार्ड सुविधा संबंधी गतिविधियां,
  • जाति प्रमाण पत्र सहायता के 98 हजार,से अधिक मामले
  • लगभग 1.19 लाख सिकल सेल रोग स्क्रीनिंग गतिविधियां आयोजित,
  • और पेंशन संबंधी 70 हजार से अधिक सेवा सहायता।

जन धन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पोषण वाटिका, सुकन्या समृद्धि योजना, पीएम मातृ वंदना योजना और पीएम विश्वकर्मा से जुड़े कई अतिरिक्त पहल भी एक साथ किए जा रहे हैं।

जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी: अभियान की एक और महत्वपूर्ण विशेषता जमीनी स्तर पर जागरूकता और इसका जनभागीदारी पर जोर है। फील्ड रिपोर्टों के अनुसार इस अभियान में निम्नलिखित उपाय शामिल हैं:

  • 37 हजार से अधिक जागरूकता होर्डिंग्स और सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) स्थापन,
  • शिविरों और प्रचार स्थलों पर 21 हजार से अधिक सेल्फी पॉइंट,
  • जनजातीय बस्तियों में लगभग 20 हजार भित्तिचित्र।

इन गतिविधियों से कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और समुदाय की अधिक भागीदारी प्रोत्साहित करने में मदद मिली है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सूचना की कमी के कारण पात्र व्यक्ति सरकारी लाभों तक पहुंचने में असमर्थ रहते हैं। इस अभियान में जन सुनवाई, ग्राम स्तर पर संवाद सत्र और स्थानीय स्वयंसेवकों और सामुदायिक संस्थानों को शामिल कर जागरूकता गतिविधियां सम्मिलित हैं।

कल्याणकारी योजनाएं पहुंचाने से परे: जनजातीय गरिमा उत्सव कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ने का प्रयास है। विभिन्न राज्यों में, सेवा प्रदान किये जाने वाले शिविरों के साथ ही जनजातीय नृत्य उत्सव, हस्तशिल्प प्रदर्शनियां, युवा भागीदारी कार्यक्रम, उद्यमिता प्रदर्शनियां और डिजिटल समावेशन कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। यह व्यापक दृष्टिकोण जनजातीय समुदायों को सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं, सांस्कृतिक संरक्षण और उभरते आजीविका तंत्रों में योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने के प्रयास को दर्शाता है। इसमें उद्यमशीलता और डिजिटल पहुंच का समावेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि जनजातीय क्षेत्र वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और स्थानीय आर्थिक विकास से संबंधित व्यापक चर्चाओं का हिस्सा बन रहे हैं।

महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव: जनजातीय गरिमा उत्सव जनजातीय भारत की हर चुनौती का समाधान का दावा नहीं करता। अभी भी स्वास्थ्य सेवा, आजीविका, शिक्षा, संपर्क और संस्थागत क्षमता से संबंधित संरचनात्मक मुद्दे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनके लिए निरंतर दीर्घकालिक प्रयास की आवश्यकता है। लेकिन यह अभियान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव का संकेतक है। यह मानता है कि दूरस्थ क्षेत्रों में शासन केवल राजधानियों से घोषित योजनाओं पर निर्भर नहीं रह सकता। इनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर पहुंच, स्थानीय सहयोग और ग्राम स्तर पर निरंतर भागीदारी आवश्यक है। कल्याणकारी व्यवस्थाएं वर्षों से प्रायः लोगों द्वारा प्रशासन से सहायता मांगने पर निर्भर रही हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव जैसे अभियान शासन को नागरिकों के निकट लाकर इस प्रारूप को बदलने का प्रयास है।

3 जून, 2026 को राष्ट्रीय सम्मेलन: यह सम्मेलन देश भर में जनजातीय विकास लाभ पहुंचाने के लिए उत्तरदायी संस्थागत प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें शासन सुधार, अभिसरण तंत्र और प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवा वितरण शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान के नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र में स्थापित प्रशिक्षण सुविधा का आभासी तौर पर उद्घाटन करेंगी। जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से विकसित इस सुविधा का उद्देश्य जनजातीय छात्रों को सेमी कंडक्टर निर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों में उन्नत प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है, जिससे वे विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते रणनीतिक क्षेत्रों में से एक में अवसरों के लिए तैयार बनें।

राष्ट्रपति देश के विभिन्न भागों में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित 75 अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं का भी उद्घाटन करेंगी। ये अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सहयोग से संचालित हैं और इनका उद्देश्य खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स और उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुभवात्मक शिक्षा द्वारा आदिवासी छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना है। इस पहल से आदिवासी युवाओं के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा से जुड़ने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आजीविका-भविष्य बनाने के नए मार्ग खुलने की संभावना है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में जनजातीय कार्य मंत्रालय "सबसे दूर सबसे पहले" नामक फिल्म भी प्रदर्शित करेगा, जो जनजातीय गरिमा उत्सव के परिवर्तनकारी प्रभाव और देश भर में जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

सम्मेलन के दौरान चार मुख्य क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होगा: संस्थागत ढांचा और मानव संसाधन; निधि प्रवाह और वित्तीय संरचना; निगरानी, ​​मूल्यांकन और सूचना प्रौद्योगिकी; और अभिसरण और योजना कार्यान्वयन। इन विमर्श के परिणामस्वरूप आईटीडीए और आईटीडीपी को सुदृढ़ बनाने के लिए एक राष्ट्रीय भविष्य कार्य योजना तैयार होने की संभावना है। यह सम्मेलन मंत्रालय के उन व्यापक प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीतिगत पहल और संस्थागत बदलाव द्वारा जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सुशासन में बेहतरी, सेवा प्रदान करने में सुधार लाना और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान करना है।

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पीके/केसी/एकेवी/एसके


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