वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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एनआईसीडीसी ने नई दिल्ली में भव्य योजना और एनटीएच-बीआईएस परीक्षण अवसंरचना पर कार्यशाला का आयोजन किया


भव्य योजना के कार्यान्वयन ढांचे को सुदृढ़ करने के बारे में विचार-विमर्श सत्र आयोजित किए गए

प्रविष्टि तिथि: 29 MAY 2026 7:27PM by PIB Delhi

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के तत्वावधान में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) ने नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में भव्य योजना की रूपरेखा तथा एनटीएच और बीआईएस परीक्षण सुविधाओं पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला की अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया और उपभोक्ता कार्य विभाग (डीओसीए) की सचिव श्रीमती निधि खरे ने की। 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस सत्र में भाग लिया। डीपीआईआईटी और डीओसीए, औद्योगिक विकास निगमों, राज्य विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), राष्ट्रीय परीक्षण शाला (एनटीएच), एनआईसीडीसी और अन्य हितधारक एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यशाला में शामिल हुए।

स्वागत भाषण और विषय से संबंधित संबोधन देते हुए, एनआईसीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक, श्री रजत कुमार सैनी ने मजबूत बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता आश्वासन तंत्र और कुशल संस्थागत ढांचे की सहायता से निवेश के लिए तैयार औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास और परीक्षण तथा प्रमाणन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई पहल का विकसित भारत@2047, मेक इन इंडिया, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान होगा।

इस कार्यशाला का आयोजन दो सत्रों में किया गया था। पहले सत्र में गुणवत्ता अवसंरचना और परीक्षण सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे का संबोधन शामिल था, जिसके बाद राष्ट्रीय परीक्षण शाला (एनटीएच) के महानिदेशक डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने उत्पादों के वाणिज्यिक परीक्षण और एनटीएच प्रयोगशालाओं की स्थापना पर प्रस्तुति दी। इसके बाद भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के उप महानिदेशक श्री हरमोहन जीत सिंह पसरीचा ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) सहित गुणवत्ता नियंत्रण ढांचे पर प्रस्तुति दी। सत्र का समापन इसमें भाग लेने वाले राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारक संस्थानों के साथ एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ।

सत्र के दौरान, राष्‍ट्रीय परीक्षण शाला ने ड्रोन प्रमाणन, ईवी बैटरी परीक्षण, एयरोस्पेस कंपोनेट्स, सौर उपकरणों और जैविक खाद्य परीक्षण जैसे उभरते क्षेत्रों में क्षमताओं सहित अपने विस्तारित परीक्षण और गुणवत्ता आश्वासन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन किया गया। एनटीएच ने औद्योगिक गलियारे परियोजनाओं के भीतर परीक्षण सुविधाएं और नमूना संग्रह (सैंपल कलेक्‍शन) केंद्र स्थापित करने के लिए एनआईसीडीसी के साथ चल रहे अपने सहयोग कार्यक्रम की भी चर्चा की, जिससे उद्योगों को विनिर्माण स्थानों के नजदीक परीक्षण और प्रमाणन सेवाओं तक पहुंच बनाने में सुगमता हो। एनआईसीडीसी के औद्योगिक बुनियादी ढांचे की सराहना करते हुए, एनटीएच ने कहा कि इन  औद्योगिक केंद्रों से परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं की स्‍थापना के लिए अनुकूल माहौल उपलब्‍ध होता है।

भारतीय मानक ब्यूरो ने विकसित हो रहे राष्ट्रीय गुणवत्ता अवसंरचना ढांचे के बारे में प्रस्‍तुति दी और मानकों, प्रमाणन प्रणालियों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) तथा औद्योगिक विकास में सहायक प्रयोगशाला बुनियादी ढांचे के बढ़ते नेटवर्क की भी चर्चा की। बीआईएस ने इस बात पर जोर दिया कि मानकों और गुणवत्ता अनुपालन को अपनाने से उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बाजार तक पहुंच सुगम होगी, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।

दूसरे सत्र में भव्य योजना के ढांचे और कार्यान्वयन रोडमैप पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र की शुरुआत डीपीआईआईटी के सचिव, श्री अमरदीप सिंह भाटिया के संबोधन से हुई, जिसके बाद भव्य योजना के ढांचे पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें योजना के उद्देश्य, कार्यान्वयन संरचना, पात्रता शर्तें, भूमि आवश्यकताएं, एसपीवी संरचनाएं, वित्तपोषण प्रावधान और कार्यान्वयन एजेंसियों की भूमिका शामिल थी। प्रतिभागियों ने इस प्रस्तुति को काफी सराहा और सत्र के दौरान उठाए गए प्रश्नों के उत्‍तर दिए गए।

डीपीआईआईटी के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया ने इस बात पर जोर दिया कि भव्य की सफलता को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से नहीं, बल्कि इस बात से आंका जाएगा कि औद्योगिक पार्क किस हद तक निवेशकों को आकर्षित करते हैं और परिचालन विनिर्माण केंद्र बन पाते हैं। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निवेशक-केंद्रित प्रस्ताव तैयार करने का आग्रह किया, जिसमें प्रतिस्पर्धी लाभों, कारोबार करने में सुगमता के उपायों और सहायक पारिस्थितिकी तंत्रों के बारे में बताया जाए, ताकि उद्योगों को उचित समय सीमा के भीतर उत्पादन शुरू कर सके।

उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कार्यान्वयन के लिए तैयार प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि परियोजना मूल्यांकन का मुख्य केंद्र दीर्घकालिक औद्योगिक व्यवहार्यता और निवेश की संभावना पर होगा। उन्होंने इस बात को दोहराया कि इस योजना का उद्देश्य ऐसे औद्योगिक पार्क स्थापित करना है, जहां बुनियादी ढांचे की तत्परता के परिणामस्वरूप निवेश का त्वरित क्रियान्वयन, विनिर्माण कार्य, रोज़गार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित हो सके।

डीपीआईआईटी की संयुक्त सचिव, श्रीमती गुरनीत तेज ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस योजना को तत्काल संचालन और निवेश की तैयारी पर विशेष ध्यान देते हुए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित किया कि वे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए औद्योगिक पार्क की पहचान करें, निवेशकों तक पहुंच के लिए समानांतर कार्य करें और निवेश को तेज़ी से अमली जामा पहनाने के लिए बुनियादी ढांचे की योजना को लक्षित उद्योगों की ज़रूरतों के अनुरूप बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना में दिए गए लचीलेपन का लाभ उठाकर स्थानीय शक्ति, कनेक्टिविटी के लाभों और मौजूदा औद्योगिक परिवेश के आधार पर औद्योगिक पार्क विकसित किए जाने चाहिए।

एनआईसीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक श्री रजत कुमार सैनी ने भारत औद्योगिकी विकास योजना (भव्य) योजना के सामान्य और परिचालन दिशानिर्देशों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में योजना के प्रमुख प्रावधानों को शामिल किया गया, जिसमें पात्रता मानदंड, चुनौती-मोड चयन प्रक्रिया, कार्यान्वयन ढांचा, वित्तपोषण संरचना, निधि जारी करना, निगरानी तंत्र, समय-सीमा, मूल्यांकन मैट्रिक्स, सामाजिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना और निजी डेवलपर-नेतृत्व वाले औद्योगिक पार्कों के लिए ढांचा शामिल है। योजना के दिशा-निर्देशों और परिचालन पहलुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिए गए, ताकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार कर सकें। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे दिशा-निर्देशों की जांच करें और विचारार्थ अपने सुझाव, इनपुट तथा स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।

एनआईसीडीसी द्वारा एक अलग प्रस्तुति में भव्य के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर उसे प्रस्तुत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें परियोजना की पहचान, भूमि की तैयारी, बुनियादी ढांचे की योजना, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, उपयोगिता प्रावधान, संस्थागत व्यवस्था, मूल्यांकन प्रक्रिया और दस्तावेजीकरण की आवश्यकताएं शामिल थीं। प्रस्तुति के बाद हितधारकों के साथ व्यावहारिक कार्यान्वयन के मुद्दों और योजना दिशानिर्देशों को मजबूत करने के सुझावों पर विस्तृत चर्चा हुई।

एनआईसीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक श्री रजत कुमार सैनी ने भी भव्य पोर्टल का प्रदर्शन किया तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पोर्टल के माध्यम से अपेक्षित जानकारी प्रस्तुत करने का अनुरोध किया।

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान करने, मजबूत डीपीआर तैयार करने, स्पष्ट संस्थागत तंत्र स्थापित करने और भव्य के तहत परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के आह्वान के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

भव्‍य, भारत सरकार द्वारा 10 अप्रैल 2026 को अधिसूचित, 23 मई 2026 को जारी परिचालन दिशानिर्देशों के साथ, 33,660 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर में 100 निवेश-तैयार, प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास करना है। इस योजना का उद्देश्य तैयार बुनियादी ढांचे, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिताओं, स्मार्ट सेवाओं, लॉजिस्टिक्स पहुंच, निवेशक सुविधा तंत्र और टिकाऊ औद्योगिक योजना से संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।

भव्‍य की एक मुख्य विशेषता इसका समावेशी और साझेदारी-आधारित दृष्टिकोण है, जो राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को संभव बनाता है। यह योजना देश में औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विकास का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें निजी क्षेत्र की कार्यकुशलता, निवेश क्षमता और परियोजना निष्पादन विशेषज्ञता का लाभ उठाया जाता है।

एनआईसीडीसी, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत एकीकृत औद्योगिक गलियारों और स्मार्ट औद्योगिक शहरों को विकसित करने के अपने अनुभव से भव्‍य के कार्यान्वयन में सहायता करने के लिए अच्छी स्थिति में है। यह धोलेरा, एयूआरआईसी, विक्रम उद्योगपुरी, इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा और अन्य कॉरिडोर नोड्स जैसी परियोजनाओं पर इसका कार्य मास्टर प्लानिंग, ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, एसपीवी-आधारित कार्यान्वयन, निवेशक सुविधा और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में एक मजबूत आधार प्रदान करना है।

जैसा कि, भव्य कार्यान्वयन के प्रारंभिक चरण में है, इसलिए इस कार्यशाला से हितधारकों को पात्रता, भूमि आवश्यकताओं, डीपीआर तैयारी, संस्थागत संरचनाओं, मूल्यांकन तंत्र और परियोजना कार्यान्वयन पर व्यावहारिक इनपुट साझा करने के लिए एक मूल्यवान मंच उपलब्‍ध हुआ। आशा है कि इस कार्यशाला के दौरान किए गए विचार-विमर्श और प्राप्‍त सुझावों से योजना के सुचारू, प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी।

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