सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के कार्यान्वयन हेतु सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ‘पीएम-अजय’ पोर्टल एवं पीएम-अजय मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय आदर्श ग्राम, कौशल विकास एवं रोजगार हेतु अनुदान सहायता तथा शैक्षणिक संस्थानों में छात्रावास—इन तीनों घटकों के जमीनी स्तर के कार्यप्रवाहों के पूर्ण डिजिटलीकरण हेतु पीएमअजय पोर्टल एवं अजय (अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना) मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च करेगा

प्रविष्टि तिथि: 25 MAY 2026 7:18PM by PIB Delhi

पीएम-अजय पोर्टल एवं अजय मोबाइल ऐप का शुभारंभ माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार द्वारा माननीय राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत तथा भारत सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया जाएगा। इस अवसर पर सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से सम्मिलित होंगे।

यह पोर्टल हितधारकों के बीच निर्बाध समन्वय को सुगम बनाने के साथ-साथ लाभार्थियों को अधिक तीव्र एवं जवाबदेह सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। पीएमअजय डैशबोर्ड में 47,000 से अधिक अनुसूचित जाति बहुल गांवों तथा सभी घटकों के अंतर्गत 40 लाख से अधिक लाभार्थियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति दर्ज की गई है। पीएम-अजय पोर्टल माइलस्टोन-आधारित निधि प्रवाह को सक्षम बनाने हेतु एक केंद्रीय डेटाबेस-लिंक्ड डिजिटल फेस के रूप में कार्य करता है।

विशेष रूप से आदर्श ग्राम घटक के अंतर्गत, कागज-आधारित नियोजन का स्थान ग्राम स्तर पर डिजिटल योजना प्रक्रिया ले लेगी। यह पोर्टल आदर्श ग्राम घटक के लिए 10 विकासात्मक क्षेत्रों के अंतर्गत 50 निगरानी योग्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर मॉडल ग्राम विकास की निगरानी हेतु राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर के समग्र डैशबोर्ड उपलब्ध कराएगा। ग्राम विकास योजना (वीडीपी) के डिजिटल अनुमोदन के साथ ही यह माइलस्टोन-आधारित ट्रैकिंग को स्वचालित कर देता है।

इसके अतिरिक्त, अनुदान सहायता (जीआईए) घटक के अंतर्गत यह पोर्टल एक केंद्रीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) के रूप में कार्य करता है, जो आजीविका हेतु बड़े पैमाने पर किए गए वित्तीय व्यय एवं निधि आवंटन की निगरानी के लिए राज्य-स्तरीय आंकड़ों का समेकन करता है। यह पोर्टल छात्रावास घटक की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के लिए भी मंच प्रदान करता है। यह योजना की प्रगति में पूर्ण पारदर्शिता तथा त्वरित निष्पादन अवधि सुनिश्चित करता है।

पीएम अजय मोबाइल ऐप की परिकल्पना एवं विकास एक एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में किया गया है, जिससे वर्तमान पीएमएजीवाई एवं पीएम अजय पोर्टलों की सेवाओं एवं कार्यात्मकताओं को मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक विस्तृत किया जा सके। यह एप्लीकेशन उपयोगकर्ता-अनुकूल मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से योजना-संबंधी जानकारी, निगरानी, प्रतिवेदन तथा लाभार्थी-केंद्रित सेवाओं तक निर्बाध पहुंच प्रदान करती है। पीएम अजय मोबाइल ऐप का उद्देश्य योजना की सेवाओं तक मोबाइल-आधारित पहुंच उपलब्ध कराना, क्षेत्रीय स्तर की निगरानी में सुधार करना, रिअल-टाइम रिपोर्टिंग को सुगम बनाना तथा पारदर्शिता एवं डिजिटल सुशासन को सुदृढ़ करना है।

इस एप्लीकेशन में आदर्श ग्राम, अनुदान सहायता (जीआईए) तथा छात्रावास घटक सम्मिलित हैं, जिनमें एकीकृत निगरानी, रिपोर्टिंग, प्रस्ताव प्रबंधन, निरीक्षण एवं लाभार्थी ट्रैकिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। आदर्श ग्राम घटक में यह मोबाइल ऐप 10 विकासात्मक क्षेत्रों के अंतर्गत 50 सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर आधारित घर-घर ऑफलाइन सर्वेक्षण तथा ग्राम विकास योजनाओं (वीडीपी) के रिअल टाइम निर्माण को सक्षम बनाता है। अनुदान सहायता (जीआईए) घटक में यह मोबाइल एप्लीकेशन क्षेत्रीय दलों को लाभार्थियों के डिजिटल पंजीकरण की सुविधा प्रदान करता है तथा राज्यों की कार्यान्वयन एजेंसियों को व्यक्तिगत आजीविका पहलों एवं कौशल प्रशिक्षण की संपूर्ण प्रगति को रिअल टाइम में निर्बाध रूप से ट्रैक करने में सक्षम बनाती है। मोबाइल ऐप का छात्रावास घटक परियोजना स्थल से ही नए निर्माण एवं मरम्मत प्रस्तावों के त्वरित इलेक्ट्रॉनिक प्रस्तुतिकरण को सुगम बनाता है। यह क्षेत्रीय निरीक्षकों को भवन निर्माण के महत्वपूर्ण चरणों में अनिवार्य जियो-टैग्ड एवं समय-मुद्रित छायाचित्रों को संकलित एवं अपलोड करने में सक्षम बनाता है, जिससे भौतिक अवसंरचना से संबंधित माइलस्टोन का दृश्यात्मक सत्यापन किया जा सके।

एकीकृत लॉगिन प्रणाली, भूमिका-आधारित एक्सेस कंट्रोल, जियो-टैगिंग, डैशबोर्ड रिपोर्टिंग, मोबाइल निरीक्षण, फोटो अपलोड, अधिसूचनाएं तथा वर्तमान पोर्टलों के साथ एकीकरण जैसी सुविधाएं इसमें उपलब्ध हैं। इसके अपेक्षित लाभों में दक्षता में सुधार, रिअल-टाइम निगरानी, अधिक पारदर्शिता, त्वरित रिपोर्टिंग, बेहतर समन्वय तथा डेस्कटॉप-आधारित कार्यप्रणाली पर कम निर्भरता शामिल हैं। इसका उपयोग मंत्रालय के अधिकारी, राज्य एवं जिला प्राधिकरण, कार्यान्वयन एजेंसियां, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), निरीक्षण अधिकारी, छात्रावास प्रशासक तथा क्षेत्रीय कार्यकर्ता करेंगे।

यह लॉन्च समावेशी सामाजिक-आर्थिक विकास तथा नागरिक-केंद्रित सेवा प्रदायगी के लिए डिजिटल सुशासन के प्रभावी उपयोग की दिशा में विकसित भारत हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम है।

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