पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भारतीय वन सेवा के मध्य-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों से संवाद किया; उन्हें "मूक वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की आवाज" बताया

प्रविष्टि तिथि: 20 MAY 2026 7:10PM by PIB Delhi

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में भारतीय वन सेवा के मध्य-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

अपने प्रेरणादायक संबोधन में श्री यादव ने कहा कि 'विकसित भारत' का मार्ग 'हरित भारत' से होकर गुजरता है और उन्होंने वैश्विक संरक्षण प्रयासों में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक वन अधिकारी की जिम्मेदारी सेवानिवृत्ति के बाद भी समाप्त नहीं होती, क्योंकि वे सदैव ‘मूक वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं की आवाज’ बने रहते हैं। मंत्री महोदय ने प्रतिभागियों को यह भी जानकारी दी कि भारत जून के प्रथम सप्ताह में पहली बार आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें विश्व भर के लगभग 95 देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी होगी।

प्रश्नोत्तर आधारित संवादात्मक सत्र के दौरान श्री यादव ने वन, वन्यजीव और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अनेक विषयों पर चर्चा की। उन्होंने चीता संरक्षण, कृत्रिम ऊष्मायन के माध्यम से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण, नदी तंत्र को बनाए रखने में बाघ अभ्यारण्यों की भूमिका तथा विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए  रखने के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के शमन में भारत की प्रगति, एनडीसी लक्ष्यों की समय से पहले प्राप्त करने, वन एवं वन्यजीव गर्वनेंस प्रणालियों में सुधार तथा पर्यावरणीय प्रबंधन मे उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर भी प्रकाश डाला।

केंद्रीय राज्य मंत्री (ईएफसीसी), श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने वैश्विक संरक्षण कूटनीति में भारत के नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित किया तथा विकास तथा संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर बल दिया।

इस अवसर पर श्री तन्मय कुमार, सचिव (ईएफसीसी); श्री एस.के. अवस्थी, महानिदेशक (वन) और विशेष सचिव (ईएफसीसी) और श्रीमती भारती, निदेशक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईएनजीएफए), मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उपस्थित थे।

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पीके/केसी/आईएम/केएस


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