वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने उद्योग- सरकार सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया तथा वैश्विक अनिश्चितताओं को सुधार और सुदृढ़  विकास के अवसरों में बदलने पर दिया जोर


श्री गोयल ने कहा कि भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों को तेज सुधारों, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और अधिक निर्यात के अवसरों में बदलना चाहिए

श्री पीयूष गोयल ने सेवा क्षेत्र में भरोसा जताया तथा एआई, साइबर सुरक्षा और डेटा सेंटर इकोसिस्टम में अवसरों पर बल दिया

भारतीय प्रतिभा पर भरोसे के कारण तेजी से बढ़ रहे हैं भारतीय जीसीसी: श्री पीयूष गोयल

बड़े पैमाने पर स्थापित हो रहे डेटा सेंटर्स अपना खुद का इकोसिस्टम बनाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को लाभ होगा: श्री गोयल

श्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से सुधार के लिए लीक से हटकर नए विचारों का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 19 MAY 2026 2:28PM by PIB Delhi

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एसोचैम (एएसएसओसीएचएएम) इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट 2026 को संबोधित करते हुए उद्योग और  सरकार के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया, ताकि व्यापार सुगमता को आगे बढ़ाया जा सके, भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता क्षमता को मजबूत किया जा सके और और विकसित भारत 2047 कि दिशा मे देश की यात्रा को गति दी जा सके।

मंत्री महोदय ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को भारत के लिए एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि व्यावसायिक प्रक्रियाओं मजबूत किया जा सके, तेजी से सुधार किए जा सकें अधिक सुदृढ़ता लाई जा सके और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कभी भी किसी संकट को व्यर्थ नहीं जाने दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश मौजूदा वैश्विक जोखिमों को विकास और सुधार के अवसरों में बदल देगा।

वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों और पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए श्री गोयल ने कहा कि व्यवसायों को बिना घबराए अवसरों और जोखिमों दोनों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और अधिक स्मार्ट और कुशल व्यावसायिक तौर-तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें अपव्यय को कम करना, उत्पादकता में सुधार करना और ऊर्जा दक्षता के उपायों को लागू करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि कोविड काल के अनुभवों ने डिजिटल सहभागिता और दूरस्थ कार्य प्रणाली (वर्क फ्रोम होम मॉडल) की प्रभावशीलता को साबित किया है। भारत में तेजी से बढ़ रहे वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि देश में लगभग 1,800 जीसीसी संचालित हो रहे हैं, जो लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और करीब एक करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रही है, जिसके पास वैश्विक परिचालन को संभालने में सक्षम युवा और प्रतिभाशाली मानव संसाधन मौजूद है।

मंत्री महोदय ने भारत के सेवा क्षेत्र में विश्वास व्यक्त किया और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां नए अवसर पैदा करेंगी।

श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों, व्यापार सुधारों और वैश्विक घटनाक्रमों को अवसरों के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विश्वसनीय वैश्विक साझेदारियों, कम लागत पर डेटा की उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और मजबूत विद्युत अवसंरचना के माध्यम से डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए अनुकूल इको-सिस्टम का निर्माण कर रही है।

उन्होंने बताया कि भारत या भारतीय डेटा केंद्रों से दुनिया के बाकी हिस्सों को प्रदान की जाने वाली क्लाउड सेवाओं को 2047 तक 100 प्रतिशत कर-मुक्त दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि डेटा केंद्रों में निवेश से रियल एस्टेट, आतिथ्य, लॉजिस्टिक्स, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में मांग पैदा होगी, जिससे आर्थिक विकास का एक सकारात्मक चक्र शुरू होगा।

श्री गोयल ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, जिनमें जापानी विनिर्माण प्रणालियां भी शामिल हैं, से सीख लेकर अधिक दक्षता अपनाएं और अपव्यय को कम करें। उन्होंने कहा कि टैरिफ, यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात पिछले वर्ष 863 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं दोनों के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

श्री गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत मजबूती की स्थिति से जुड़ रहा है और देश वस्तुओं का एक प्रतिस्पर्धी निर्माता और सेवाओं का प्रदाता है। 38 देशों को शामिल करने वाले मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये समझौते व्यापक जुड़ाव के द्वार खोलते हैं और इस बात पर जोर दिया कि भारतीय व्यवसायों को केवल आयात में वृद्धि होने देने के बजाय निवेश आकर्षित करने और निर्यात बढ़ाने के लिए इनका लाभ उठाना चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि सरकार एक सहायक के रूप में कार्य करना जारी रखेगी और उन्होंने भव्य पहल तथा 100 नए औद्योगिक पार्कों के स्थान निर्धारण के संबंध में हितधारकों के साथ परामर्श का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 20 पार्क पहले से ही विकास के विभिन्न चरणों में हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चाओं के दौरान प्राप्त सुझावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक पार्कों में एक एकल निकाय स्थापित करने की संभावना की जांच कर रही है, जो सभी केंद्रीय और राज्य मंजूरियों के लिए ‘वन-स्टॉप शॉप’ के रूप में कार्य कर सके।

श्री गोयल ने सरकारी प्रणालियों में सुधार के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का आग्रह किया और कहा कि कोविड-19 के बाद शुरू की गई राष्ट्रीय एकल-खिड़की प्रणाली को उद्योग जगत से पर्याप्त भागीदारी और प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने व्यवसायों से आग्रह किया कि वे सरकार के साथ मिलकर विशिष्ट समस्याओं की पहचान करें और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से व्यापार करने में सुगमता में सुधार करें।

मंत्री महोदय ने कहा कि भारत को ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता सामान और कृषि आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों सहित अधिक मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि किसानों और मछुआरों को बेहतर कीमतें और बेहतर मूल्य प्राप्ति का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को कच्चे माल के रूप में नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों के रूप में वैश्विक बाजारों तक पहुंचना चाहिए।

श्री गोयल ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पर्यटन और घरेलू खपत के महत्व पर भी प्रकाश डाला और नागरिकों से भारतीय पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। भारत की ऊर्जा दक्षता पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने उजाला एलईडी बल्ब कार्यक्रम की सफलता को याद किया, जिससे ऊर्जा खपत में उल्लेखनीय कमी आई और सालाना लगभग एक लाख करोड़ रुपये की बचत हुई।

उन्होंने कहा कि भारत अब 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रख रहा है और निर्यातकों से आग्रह किया कि वे आगामी एफटीए का सक्रिय रूप से लाभ उठाएं, नए बाजारों को तलाश करें, नमूनाकरण और परीक्षण ऑर्डर शुरू करें तथा समझौतों के औपचारिक रूप से लागू होने से पहले ही वैश्विक जुड़ाव बढ़ाएं।

मंत्री महोदय ने दोहराया कि सरकार अलग-अलग विभागों में काम करने के बजाय एकीकृत तरीके से काम करती है और उद्योग जगत से सरकार को लीक से हट कर सुझाव देने के लिए आंमत्रित किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय खुद दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए आंतरिक सुधार कर रहा है।

श्री गोयल ने बताया कि मंत्रालय, जिसके 46 संगठनों के तहत 216 शहरों में 482 कार्यालय हैं, राज्य की राजधानियों और प्रमुख शहरों में एकल- संपर्क केंद्रों में परिचालन को समेकित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे व्यवसायों को एकीकृत और डिजिटल रूप से जुड़े सिस्टम के माध्यम से डीजीएफटी, कॉफी बोर्ड, मसाला बोर्ड, जीईएम और अन्य निकायों से संबंधित सेवाओं तक पहुंच प्राप्त करने में सुविधा होगी।

गुणवत्ता, उत्पादकता, स्थानीयकरण और नवाचार पर केंद्रित संस्कृति का आह्वान करते हुए श्री गोयल ने सुझाव दिया कि उद्योग और सरकार संयुक्त रूप से स्वदेशीकरण, आयात प्रतिस्थापन, निर्यात, ऊर्जा दक्षता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में प्रगति की  निगरानी के लिए स्कोरकार्ड विकसित करें।

श्री गोयल ने सभी हितधारकों से ‘विकसित भारत’ की ओर ‘अमृत काल’ की इस यात्रा को अधिक परिणाम-उन्मुख, कुशल और सहयोगात्मक बनाने के लिए मिल कर काम करने का आग्रह किया।

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पीके/केसी/आईएम/केएस

 


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