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लेह में तथागत के पवित्र अवशेषों का पावन प्रदर्शनी संपन्न


लेह और ज़ांस्कर में 14-दिवसीय प्रदर्शन के दौरान एक लाख 18 हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए

उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना समापन समारोह में शामिल हुए; लद्दाख के लोगों के धैर्य और अनुशासन की सराहना की

लद्दाख शांति और आध्यात्मिक जागृति के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है: उपराज्यपाल

प्रविष्टि तिथि: 14 MAY 2026 8:40PM by PIB Delhi

लद्दाख में बुद्ध के पवित्र अवशेषों की पावन प्रदर्शनी आज संपन्न हो गई। इस अवसर पर जीवन के सभी क्षेत्रों से जुड़े लोग लेह स्थित धर्म केंद्र में भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उमड़ पड़े। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना, चोगलमसर स्थित धर्म केंद्र में तथागत के पवित्र अवशेषों की 14-दिवसीय पावन भव्य प्रदर्शनी के समापन समारोह में शामिल हुए।

यह समापन समारोह पवित्र 'मोनलम चेनमो' के साथ ही आयोजित हुआ। मोनलम चेनमो लद्दाख का वार्षिक 'महान प्रार्थना उत्सव' है, जो विश्व शांति और सार्वभौमिक सुख को समर्पित है; यही इस प्रदर्शनी का भी मुख्य विषय था। इस महान प्रार्थना उत्सव में हजारों भिक्षुओं, भिक्षुणियों, पूजनीय रिंपोचेस और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर भिक्षुओं ने पवित्र मुखौटा नृत्य का प्रदर्शन किया जिसे 'छाम्स' कहा जाता है।

कुल मिलाकर, इस पावन प्रदर्शनी को लद्दाख, भारत के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से आए श्रद्धालुओं से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली। चौदह दिनों तक चली इस प्रदर्शनी के दौरान 1,18,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र अवशेषों के दर्शन किए। इससे यह लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित अब तक के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागमों में से एक बन गया।

पवित्र अवशेषों को 1 मई 2026 को आम जनता के दर्शनार्थ औपचारिक रूप से खोला गया था। यह शुभ अवसर 2569वीं बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व के साथ आया था। इस कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, श्री अमित शाह ने लेह के जीवत्सल में किया था। श्री अमित शाह स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने लद्दाख में दो दिन बिताए, जो लद्दाख की बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को बढ़ावा देने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उपराज्यपाल श्री सक्सेना ने कहा कि यह प्रदर्शनी न केवल गहन आध्यात्मिक मौका थी, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सद्भाव का प्रतीक भी थी। उन्होंने कहा कि लद्दाख की धरती स्वयं भगवान बुद्ध द्वारा धन्य प्रतीत होती है, और इस प्रदर्शनी के दौरान उत्पन्न आध्यात्मिक ऊर्जा यहाँ के लोगों के साथ हमेशा बनी रहेगी।

उपराज्यपाल ने कहा कि भारत और विदेशों के विभिन्न हिस्सों से धार्मिक नेताओं, भिक्षुओं, इतिहासकारों, विद्वानों, शोधकर्ताओं, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों ने इस प्रदर्शनी में भाग लिया। इससे लद्दाख वैश्विक आध्यात्मिक गंतव्य में बदल गया।

उपराज्यपाल श्री सक्सेना ने कहा, "भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष कल दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय ले जाए जाएंगे, लेकिन उनका आशीर्वाद यहाँ हमेशा बना रहेगा। आइए, हम सब मिलकर लद्दाख को वैश्विक स्तर पर शांति, चिंतन और आध्यात्मिक जागरण के केंद्र के रूप में स्थापित करें।"

उपराज्यपाल ने लद्दाख के लोगों की तहे दिल से सराहना की, जिन्होंने पवित्र अवशेषों से आशीर्वाद लेने के लिए घंटों तक अनुशासन, धैर्य और भक्ति के साथ लंबी कतारों में खड़े होकर इंतजार किया; उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनता के सहयोग के बिना इस कार्यक्रम की सफलता संभव नहीं थी।

उपराज्यपाल ने सभी पूजनीय रिंपोचे, लद्दाख बौद्ध संघ और अखिल लद्दाख गोम्पा संघ के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, आईटीबीपी और लद्दाख पुलिस के अधिकारियों को इस प्रदर्शनी का सफल आयोजन सुनिश्चित करने में अमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

इस प्रदर्शनी में कई विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, केंद्रीय मंत्री श्री किरण रिजिजू, श्रीलंका और थाईलैंड के राजदूत, संसद सदस्य, वरिष्ठ बौद्ध नेता, भिक्षु, विद्वान और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री शामिल थे।

लेह में 29 अप्रैल को पवित्र अवशेषों के आगमन पर लोगों की अत्यंत भावुक प्रतिक्रिया देखने को मिली; हजारों निवासी पारंपरिक वेशभूषा में सजकर लेह हवाई अड्डे से जीवत्सल तक जाने वाली सड़कों के किनारे कतारों में खड़े हो गए, ताकि पवित्र अवशेषों का भव्य स्वागत किया जा सके। दूरदराज के गांवों, मठों और सीमावर्ती क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने इस प्रदर्शनी के दौरान आशीर्वाद लेने के लिए लंबी यात्राएं कीं।

पवित्र अवशेष 11 और 12 मई को ज़ांस्कर स्थित कर्शा गोम्पा ले जाए जाने से पहले, नौ दिनों तक लेह के जीवत्सल में आम जनता के दर्शनार्थ रखे गए थे। इस प्रदर्शनी के दौरान विशेष प्रार्थनाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मेलन और आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। 

परम पूज्य द्रुकपा थुकसे रिनपोचे ने कहा कि लद्दाख के लोग सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला;  उन्होंने इस कार्यक्रम को भव्य रूप से सफल बनाने के लिए भारत सरकार, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना और सभी संबंधित एजेंसियों तथा संगठनों का आभार व्यक्त किया।

एलबीए के अध्यक्ष श्री चेरिंग दोरजे लकरुक, एलजीए के अध्यक्ष वेन दोरजे स्तानज़िन, एमआईएमसी से वेन संघसेना, धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रमुखों के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोगों ने समापन समारोह में भाग लिया।

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पीके/केसी/पीके/एसएस


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