पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

हरित अर्थव्यवस्था से 'हरित रोजगार' और 'हरित उद्यमिता' के नए अवसर उत्पन्न होंगे, भारत के सतत विकास में युवाओं की अहम भूमिका रहेगी: डॉ. जितेंद्र सिंह


भारत का विकास मॉडल हरित विकास की ओर एक महत्वपूर्ण रूपांतरणकारी से गुजर रहा है: जामिया मिलिया इस्लामिया में डॉ. जितेंद्र सिंह

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा और हरित परिवर्तन न केवल विभिन्न क्षेत्रों में नए रोजगार सृजित करेगा, बल्कि भारत को सतत और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास की ओर तेजी से ले जाएगा: पर्यावरण सततता सम्मेलन में डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 23 APR 2026 5:16PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हरित ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसे सेक्टरों के माध्यम से युवाओं के लिए व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ, "हरित नौकरियां" और "हरित उद्यमिता" भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था के निर्णायक चालक बनने जा रहे हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि यह परिवर्तन न केवल रोजगार सृजित करेगा बल्कि भारत को सतत और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास की ओर बढ़ने में भी तेजी लाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली में आयोजित "21वीं सदी में पर्यावरण स्थिरता: विज्ञान, समाज और समाधान" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। इस सत्र में कुलपति प्रो. मजहर आसिफ, रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी, विशिष्ट अतिथि प्रो. डीपी सिंह, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और छात्रों सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भारत के बढ़ते हरित इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट से समर्थित राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहल स्वच्छ औद्योगिक परिवर्तन की नींव रख रही हैं। उन्होंने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियां इस्पात और सीमेंट जैसे प्रमुख सेक्टरों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं, जिससे भारत वैश्विक हरित परिवर्तन में अग्रणी स्थान प्राप्त कर रहा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि तकनीकी बदलाव की गति इतनी तीव्र है कि आज जिन समाधानों की कल्पना की जा रही है, वे समय के साथ तेजी से बदल सकते हैं, इसलिए निरंतर नवाचार करना आवश्यक है। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र से उदाहरण देते हुए कहा कि लागत प्रभावी जमीनी स्तर के नवाचारों के माध्यम से पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे स्थिरता को किफायती और व्यापक बनाया जा रहा है।

रोजगार के नए अवसरों के उद्भव पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन, बैटरी उत्पादन, ग्रिड प्रबंधन और जैव ईंधन जैसे क्षेत्रों में हरित रोजगारों का विस्तार होगा। उन्होंने प्रयुक्त खाना पकाने के तेल को जैव ईंधन में परिवर्तित करने सहित चक्रीय अर्थव्यवस्था को उद्यमिता और रोजगार सृजन के लिए एक आशाजनक क्षेत्र बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने समुद्री ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जो भारत की विशाल तटरेखा के बावजूद बहुत हद तक अनछुआ रहा है और कहा कि यह आने वाले वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा का पूरक होगा।

ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में प्रगति कर रहा है, साथ ही नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को सक्षम बना रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य सरकार और निजी हितधारकों के बीच सहयोगात्मक वित्तपोषण मॉडल के साथ नवोन्मेषकों और स्टार्टअप्स को उनके विचारों को बड़े पैमाने पर विकसित करने में सहायता करना है।

भारत की वैश्विक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 1.4 बिलियन की आबादी वाले इस देश की जलवायु परिवर्तन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित "पर्यावरण के लिए जीवनशैली (लाइफ)" की परिकल्पना के मार्गदर्शन में भारत वैश्विक हरित परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त स्थिति में है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को सतत विकास के क्षेत्र में उभरते अवसरों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि भविष्य युवाओं द्वारा संचालित नवाचार, अनुकूलनशीलता और सूचित विकल्पों द्वारा आकार लेगा।

 

***

पीके/केसी/एसकेजे/ओपी


(रिलीज़ आईडी: 2254957) आगंतुक पटल : 95
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Gujarati