सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय
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भारत में अवसंरचना क्षेत्र के प्रदर्शन निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड का शुभारंभ

पैमाना द्वारा ढांचागत उप-क्षेत्रों की बेहतर प्रदर्शन निगरानी के साथ बुनियादी ढांचे की उत्कृष्टता की ओर बढ़ते कदम

प्रविष्टि तिथि: 16 APR 2026 4:00PM by PIB Delhi

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं की निगरानी के लिए पहले की ऑनलाइन कम्प्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली के स्थान पर 25 सितंबर 2025 को वेब-आधारित परियोजना मूल्यांकन, अवसंरचना निगरानी एवं विश्लेषण पैमाना (पीएआईएमएएनए) पोर्टल आरंभ किया था।

अवसंरचना निगरानी के प्रयासों को अब और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए, मंत्रालय ने प्रमुख उप-क्षेत्रों में अवसंरचना प्रदर्शन पर नज़र रखने हेतु प्रदर्शन निगरानी डैशबोर्ड आरंभ किया है, जो देश में डेटा-आधारित शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के सहयोग से तैयार यह संशोधित ढांचा, आर्थिक कार्य विभाग की अवसंरचना (2022) सामंजस्यपूर्ण मास्टर सूची (एचएमएल) के अनुरूप है।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) और आठ प्रमुख उद्योगों के प्रदर्शन के मौजूदा सूचकांकों के दोहराव से बचने के लिए संकेतकों को युक्तिसंगत बनाया गया है।
  • विद्युत, नागर विमानन, दूरसंचार, रेलवे, सड़कें, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग-के छह ढांचागत उप-क्षेत्रों के लिए व्यापक संकेतक ढांचा विकसित किया गया है। अभी प्रदर्शन निगरानी डैशबोर्ड पर 116 संकेतक उपलब्ध हैं।
  • नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और हितधारकों को बेहतर जानकारी सुनिश्चित करने के लिए इंटरैक्टिव डेटा विज़ुअलाइज़ेशन (जटिल जानकारी प्रस्तुत करने का गतिशील तरीका, जो उपयोगकर्ताओं को वास्तविक समय में डेटा के साथ जुड़ने और उसका अन्वेषण करने की सुविधा प्रदान करता है) और समय-श्रृंखला विश्लेषण के साथ क्षेत्रवार प्रदर्शन की निगरानी के लिए एक एकीकृत डिजिटल इंटरफेस है।
  • बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों का एकीकृत अंतर-क्षेत्रीय स्थिति बताने वाला केंद्रीकृत डैशबोर्ड, अंतर-क्षेत्रीय विश्लेषण बेहतर बनाता है।

2. अवसंरचना प्रदर्शन निगरानी के संशोधित ढांचे की प्रमुख विशेषताएं

  • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय 11 प्रमुख क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के प्रदर्शन की निगरानी कर रहा है, जिसमें बिजली, सड़क, रेलवे, नागर विमानन, दूरसंचार और बंदरगाह सहित अवसंरचना विकास मापने के 28 उप-संकेतक शामिल हैं। वर्तमान ढांचा निर्दिष्ट क्षेत्रों में विकास दर (साल-दर-साल, माहवार और संचयी), लक्ष्यों की प्राप्ति और क्षमता उपयोग के आधार पर क्षेत्रीय प्रदर्शन का आकलन करता है।
  • नए दृष्टिकोण में क्षेत्रीय उत्पादन (आउटपुट) मापने की बजाय बहुआयामी अवसंरचना प्रदर्शन का आकलन किया गया है। इसमें पहुंच (अवसंरचना की व्यापक उपलब्धता को मापती है), गुणवत्ता (इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता का आकलन करती है), राजकोषीय लागत और राजस्व (अवसंरचना के लिए वित्तीय संसाधनों के आवंटन और उपयोग का आकलन करती है), उपयोग (मूल्यांकन करता है कि अवसंरचना का उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए कितनी कुशलता से इस्तेमाल किया जा रहा है), और वहनीयता (निर्धारित करती है कि क्या यह लोगों के लिए आर्थिक रूप से सुलभ है) जैसे आयाम शामिल हैं। संकेतकों का वर्गीकरण सरल उत्पादन निगरानी से आगे कई आयामों में अवसंरचना प्रदर्शन के अधिक समग्र मूल्यांकन द्वारा विश्लेषण को बेहतर बनाता है। इससे सूचित नीतिगत निर्णय लेना और लक्षित हस्तक्षेप संभव हो पाता है।
  • अभी डैशबोर्ड पर प्रदर्शन निगरानी 116 संकेतक हैं।

क्रम

अवसंरचना उप-क्षेत्र

डैशबोर्ड संकेतक

1

नागर विमानन

29

2

सड़कें

9

3

विद्युत

13

4

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग

49

5

दूरसंचार

7

6

रेलवे

9

कुल

116

 

 

  • नागर विमानन क्षेत्र में 163 परिचालन हवाई अड्डों के साथ लगातार विस्तार जारी है जिससे क्षेत्रीय संपर्क बेहतर हुआ है।
  • विद्युत क्षेत्र में मजबूत वृद्धि जारी है। वित्त वर्ष 2024-25 में विद्युत स्थापन क्षमता बढ़कर 4,75,211 मेगावाट रही (7.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि)।
  • दूरसंचार क्षेत्र में व्यापक डिजिटल विस्तार जारी रहा, वित्त वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक) में औसत वायरलेस डेटा उपयोग बढ़कर 25.2 जीबी प्रति ग्राहक प्रति माह (17.2% वार्षिक वृद्धि) हो गया, जो लोगों द्वारा ब्रॉडबैंड के निरंतर इस्‍तेमाल में वृद्धि को दर्शाता है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग क्षेत्र ने स्थिर प्रगति बनाए रखी, वित्त वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक) में 4,989 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया।
  • रेल क्षेत्र का विकास जारी रहा, वित्त वर्ष 2024-25 में रेल मार्गों की लंबाई बढ़कर 1,11,641 किलोमीटर (वर्ष-दर-वर्ष 1.7%) हो गई ।
  • पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग क्षेत्र में 229 बंदरगाहों और 2.32 करोड़ यात्री यातायात के साथ स्थिर वृद्धि रही।

 

3. मुख्य बिन्दु:

  • नागर विमानन: वित्त वर्ष 2025-26 (सितंबर तक) में यात्री यातायात 20.2 करोड़ (2.6% वार्षिक वृद्धि) तक पहुंच गया और माल ढुलाई 19.8 लाख टन (4.6% वार्षिक वृद्धि) रही, जो निरंतर मांग में वृद्धि दर्शाती है। क्षमता उपयोग बेहतर बना रहा, जिसमें पैसेंजर लोड फैक्टर गुणांक 81.8% (एयरलाइन उद्योग का मापक है जो यह मापता है कि एयरलाइन की यात्री वहन क्षमता का कितना उपयोग हो रहा है।) और वेट लोड फैक्टर (किसी वाणिज्यिक विमान में भरी हुई राजस्व सीटों का प्रतिशत) 75.6% रहा , जो परिचालन में निरंतर सुधार का संकेत देता है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 से हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या (वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30/09/2025 तक)

वित्तीय वर्ष 2015-16 से सभी निर्दिष्ट भारतीय विमान संचालकों के विमानन बेड़े की क्षमता

  • विद्युत: वित्त वर्ष 2024-25 में विद्युत क्षमता उपयोग बेहतर बना रहा, जिसमें ताप विद्युत प्लांट लोड फैक्टर 69.5% और परमाणु विद्युत 79.1% रहा। विशिष्ट उद्योग के उपयोग के लिए कैप्टिव विद्युत उत्पादन 2,32,629 गीगावॉट (3.9% वार्षिक वृद्धि) रहा। ग्रिड की विश्वसनीयता मजबूत बनी रही। वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी तक) में 23,01,708.6 मेगावाट की चरम मांग केवल 0.03% के अंतर के बावजूद लगभग पूरी हुई

विद्युत उप-क्षेत्र के लिए डैशबोर्ड अवलोकन

वित्तीय वर्ष 2015-16 के बाद से बिजली की चरम मांग बनाम चरम पूर्ति (वित्तीय वर्ष 2025-26: 28/02/2026 तक)

  • दूरसंचार क्षेत्र में 8.48 लाख टावरों (2.9% वार्षिक वृद्धि) के साथ नेटवर्क अवसंरचना मजबूत हुई और दूरसंचार घनत्व बढ़कर 91.7 (7.8% वार्षिक वृद्धि) हो गया, जो दूरसंचार की गहरी पहुंच और डिजिटल व्यापकता को दर्शाता है।

वित्तीय वर्ष 2015-16 के बाद से प्रति ग्राहक प्रति माह औसत वायरलेस डेटा उपयोग (वित्तीय वर्ष 2025-26: 31/12/2025 तक)

वित्तीय वर्ष 2016-17 के बाद से दूरसंचार टावरों की संख्या (वित्तीय वर्ष 2025-26: 31/12/2025 तक)

  • सड़क परिवहन और राजमार्ग क्षेत्र: डिजिटल तरीके से टोल शुल्क भुगतान में भी मजबूती आई है, जिसमें 114.4 लाख फास्टैग जारी किए गए हैं और इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह लेनदेन बढ़कर 282.5 करोड़ (13.3% वार्षिक वृद्धि) हो गया है, जो कैशलेस टोल सिस्टम को व्यापक रूप से अपनाने का संकेत देता है।

इलेक्ट्रॉनिक टोल लेनदेन - वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपेक्षा वित्तीय वर्ष 2025-26 (वित्तीय वर्ष 2025-26: तीसरी तिमाही तक)

वित्तीय वर्ष 2015-16 के बाद से पंजीकृत मोटर वाहनों की संख्या (वित्तीय वर्ष 2025-26: 31/12/2025 तक)

  • रेल क्षेत्र: यात्री परिचालन में लगातार सुधार जारी रहा, यात्री रेलगाड़ियों की मार्ग लंबाई बढ़कर 835 मिलियन किलोमीटर (वर्ष-दर-वर्ष 4.4%) हो गई, जबकि मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की समयबद्धता सूचकांक में सुधार होकर यह 77.1% (वर्ष-दर-वर्ष 4.8%) हो गया, जो बेहतर दक्षता और विश्वसनीयता दर्शाता है।

वित्तीय वर्ष 2015-16 के बाद से यात्री रेल किलोमीटर लंबाई

वित्तीय वर्ष 2015-16 के बाद से मालगाड़ियों द्वारा तय की गई किलोमीटर लंबाई

  • पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग क्षेत्र: वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के बेड़े में जहाजों की संख्या बढ़कर 1,545 हो गई जो वर्ष दर वर्ष 1.2% की वृद्धि है। अंतर्देशीय जल परिवहन भी सुदृढ़ हुआ, जलमार्गों की लंबाई 29,267 किलोमीटर तक पहुंच गई (पिछले वर्ष की तुलना में 4.2% की वृद्धि), जिससे बेहतर बहुआयामी संपर्क को बढ़ावा मिला।

वित्तीय वर्ष 2015-16 के बाद से सामान्य बंदरगाहों पर कंटेनर यातायात प्रबंधन (वित्तीय वर्ष 2025-26: 30/10/2025 तक)

वर्ष 2017 के बाद से मार्ग आधारित जहाजों की संख्या

4. संशोधित प्रदर्शन निगरानी डैशबोर्ड का शुभारंभ अवसंरचना निगरानी में पारदर्शिता, दक्षता और उत्तरदायित्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रौद्योगिकी के उपयोग और व्यापक संकेतक ढांचा विकसित कर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का लक्ष्य देश में सतत और समावेशी अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना है।

5. प्रेस विज्ञप्ति जारी किए जाने की अगली तिथि: प्रदर्शन निगरानी के लिए डैशबोर्ड को त्रैमासिक आधार पर अद्यतन किया जाएगा। अगला अपडेट 16 जुलाई 2026 को जारी होगा।

नोट : इस प्रेस विज्ञप्ति में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के नए आरंभ किए गए प्रदर्शन निगरानी डैशबोर्ड की मुख्य विशेषताओं का सारांश दिया गया है, जो https://paimana-perf.mospi.gov.in पर या QR कोड के माध्यम से उपलब्ध है।

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