कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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डीएलसी अभियान 4.0: भारत में पेंशनभोगियों के बेहतर कल्याण हेतु चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा अभियान


पेंशनभोगियों के जीवन को सुगम बनाने में डिजिटल सशक्तिकरण: महत्वपूर्ण उपलब्धियां – 1.91 करोड़ डीएलसी बनाए गए

फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग करके 1.16 करोड़ से अधिक डीएलसी बनाए गए, जो कुल डीएलसी का 60 प्रतिशत से अधिक हैं और यह आंकड़ा पिछले अभियान की तुलना में 220 गुना अधिक है

वृद्ध/बीमार/दिव्यांग पेंशनभोगियों की सहायता हेतु अभियान: 14 लाख से अधिक अति वरिष्ठ पेंशनभोगियों ने घर पर सेवाएं प्राप्त कीं

प्रविष्टि तिथि: 06 APR 2026 6:17PM by PIB Delhi

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) नवंबर 2022 से जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के लाभों को पेंशनभोगियों तक पहुंचाने हेतु डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र अभियान चला रहा है। यह पहल पेंशनभोगियों, विशेष रूप से अति वरिष्ठ/बीमार/दिव्यांग पेंशनभोगियों के जीवन को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस उद्देश्य को साकार करने हेतु, देश भर के चिन्हित शहरों में हर वर्ष 1 से 30 नवंबर तक शिविर आयोजित किए जाते हैं। इस अभियान का उद्देश्य देश के सुदूरतम क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों तक पहुंचना है।

डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) अभियान 4.0 का शुभारंभ 5 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में माननीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया और इसका संचालन माननीय राज्यमंत्री के नेतृत्व में किया गया।

इस अभियान में 19 बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी), रक्षा लेखा महानियंत्रक, डाक विभाग, रेलवे, डीओटी, ईपीएफओ, यूआईडीएआई, एमईआईटीवाई और 57 पेंशनभोगी कल्याण संघों सहित कई हितधारकों का सहयोग शामिल था।

विभाग ने 1 से 30 नवंबर, 2025 तक आयोजित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान 4.0 का सफलतापूर्वक समापन किया। इसमें नवीन तकनीकों का लाभ उठाते हुए और सभी हितधारकों के व्यापक सहयोग से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं। इस अभियान के दौरान, देशभर के 2000 शहरों एवं जिलों में 75000 शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 1400 से अधिक नोडल अधिकारियों ने सुचारू संचालन सुनिश्चित किया, तकनीकी चुनौतियों का समाधान किया और डीएलसी जमा करने की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने में सहायता प्रदान की। पेंशनभोगियों की सहायता और उन्हें घर पर सेवा प्रदान करने हेतु 1.8 लाख पोस्टमैन/डाक सेवक तैनात किए गए।

1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक की अवधि में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गईं, जो इस बात का संकेत है कि यह अभियान भारत में पेंशनभोगियों के बेहतर कल्याण हेतु  चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा अभियान है।

प्रमुख उपलब्धियां

• इस अवधि के दौरान 1.91 करोड़ से अधिक डीएलसी बनाए गए, जो पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण में वृद्धि, डिजिटलीकरण को आसानी से अपनाने और पेंशनभोगियों द्वारा डिजिटल प्रक्रियाओं को सहजता से स्वीकार करने को रेखांकित करता है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि पेंशनभोगियों के बीच आधार-आधारित डिजिटल सत्यापन की बढ़ती स्वीकृति को भी दर्शाती है।

• 1.16 करोड़ से अधिक डीएलसी (60 प्रतिशत) फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग करके बनाए गए, जो डीएलसी 3.0 अभियान की तुलना में 220 गुना अधिक है। यह अभूतपूर्व तकनीक विशेष रूप से उन बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए लाभदायक साबित हुई जिनके फिंगरप्रिंट धुंधले पड़ गए हैं और जो चलने-फिरने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों को घर पर सेवा से बहुत लाभ हुआ, जिससे एलसी जमा करने हेतु लंबी दूरी तय करने की जरूरत और असुविधा के बिना वे अपने घरों में आराम से डीएलसी पा सके।

• देश भर में पेंशनभोगियों तक पहुंचने हेतु घर पर सेवाएं प्रदान करने, ऑपरेटरों को प्रशिक्षण देने और एक केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाने से 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनभोगियों द्वारा बड़ी संख्या में डीएलसी जमा किए गए हैं। अति वरिष्ठ पेंशनभोगियों द्वारा 14 लाख से अधिक डीएलसी जमा किए गए हैं। बैंकों, आईपीपीबी और पेंशनभोगी कल्याण संघों ने वृद्ध/बीमार/दिव्यांग पेंशनभोगियों को घर पर सेवाएं प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई।

• इस अभियान का उद्देश्य देश भर में व्यापक कवरेज प्रदान करना था, ताकि सुदूरतम क्षेत्रों में भी पेंशनभोगियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके और विशेष रूप से सेवाओं से वंचित आबादी पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके। विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग और समग्र सरकार के दृष्टिकोण ने एक सार्वभौमिक मॉडल तैयार किया, जिससे व्यापक पहुंच संभव हुई।

• मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार-प्रसार से जागरूकता बढ़ी और देशभर में 2 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा गया। डीडी न्यूज, संसद टीवी और आकाशवाणी पर पैनल चर्चा/स्पॉटलाइट कार्यक्रमों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर मानक संचालन प्रक्रियाओं/लघु फिल्मों के जरिए  व्यापक प्रचार संभव हुआ।

• इस अभियान में पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य जांच, आधार कार्ड अपडेट एवं शिकायत निवारण जैसे कल्याणकारी सेवाओं का एक युग्म शामिल था, जिन्हें विभिन्न शिविरों में पेंशनभोगियों के लिए आयोजित किया गया था।

• दैनिक रिपोर्टों वाले एक राष्ट्रीय डीएलसी पोर्टल ने सेवाओं से वंचित रहने वाले क्षेत्रों में पेंशनभोगियों तक लक्षित पहुंच के साथ निरंतर निगरानी को संभव बनाया।

विभिन्न अभियानों के दौरान हासिल उपलब्धियां

डीएलसी 1.0 (2022): 37 शहरों को कवर किया गया, 91 लाख जीवन प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया पूरी की गई (मार्च 2023 तक 1.41 करोड़ डीएलसी)।

डीएलसी 2.0 (2023): 100 शहरों तक विस्तारित किया गया, 1.17 करोड़ डीएलसी बनाए गए (मार्च 2024 तक 1.47 करोड़ डीएलसी)।

डीएलसी 3.0 (2024): 845 शहरों को कवर किया गया, 1.30 करोड़ डीएलसी बनाए गए (मार्च 2025 तक 1.62 करोड़ डीएलसी)।

डीएलसी 4.0 (2025): 2000 शहरों को कवर किया गया, 1.19 करोड़ डीएलसी बनाए गए (31 मार्च 2026 तक 1.91 करोड़ से अधिक डीएलसी के साथ उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई)।

बैंकों और आईपीपीबी की भूमिका: अभियान की सफलता के प्रमुख स्तंभ

डीएलसी अभियान 4.0 की सफलता में एसबीआई, पीएनबी और आईपीपीबी जैसे प्रमुख बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने क्रमशः 25.99 लाख, 3.78 लाख और 3.64 लाख डीएलसी जमा किए। इन बैंकों ने 300 शहरों और 1,250 से अधिक स्थानों पर विशेष शिविर आयोजित किए, जिससे डिजिटल संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले पेंशनभोगियों को सहायता प्रदान की गई। उनके प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि स्मार्टफोन या इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित पेंशनभोगी भी आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकें। कुल मिलाकर, पेंशन वितरित करने वाले बैंकों ने सामूहिक रूप से अपने लक्ष्य का 63 प्रतिशत से अधिक हासिल किया, जो डीएलसी अभियानों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

राज्यों के बीच डीएलसी का वितरण

महाराष्ट्र: सशक्त समन्वय और जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से 25.86 लाख डीएलसी प्राप्त किए गए।

उत्तर प्रदेश: 15.93 लाख डीएलसी पूरे किए गए, जिससे सुदूरतम क्षेत्रों में भी पहुंच सुनिश्चित हुई।

तमिलनाडु: नवीन प्रचार रणनीतियों के जरिए 15.31 लाख डीएलसी प्राप्त किए गए।

कर्नाटक: 13.08 लाख डीएलसी जमा किए गए।

प्रमुख मंत्रालयों/विभागों द्वारा किए गए उत्कृष्ट योगदान

केन्द्रीय नागरिक विभाग: फेस ऑथेंटिकेशन के व्यापक उपयोग जरिए 9.57 लाख से अधिक डीएलसी को सुगम बनाया।

रक्षा विभाग: सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों के 32.92 लाख डीएलसी बनाए गए।

रेलवे: सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सहायता प्रदान करते हुए 6.91 लाख डीएलसी वितरित किए गए।

डाक विभाग: 2.89 लाख डीएलसी जमा किए गए।

दूरसंचार विभाग: अपने व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाते हुए 4.67 लाख डीएलसी को संभव  बनाया गया।

यूआईडीएआई एवं एमईआईटीवाई ने सुचारू रूप से डीएलसी बनाना सुनिश्चित करने हेतु  तकनीकी सहायता प्रदान की।  

इन योगदानों ने डीएलसी अभियान 4.0 की पहुंच और प्रभाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उत्कृष्ट कार्यप्रणालियां

व्यापक प्रचार और संपर्क: इस अभियान का स्थानीय समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, डीडी, आकाशवाणी और सोशल मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार किया गया। इस कार्यक्रम से पहले पीआईबी के बयानों एवं विज्ञापनों के माध्यम से घोषणाएं की गईं और जागरूकता बढ़ाने हेतु सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लघु फिल्में, मानक परिचालन प्रक्रियाएं और जिंगल साझा किए गए।

समर्पित अवसंरचना के जरिए शिविरों में सहायता: बैंकों और अन्य स्थानों पर विशेष  डीएलसी काउंटर स्थापित किए गए, जहां उपस्थित लोगों के लिए बैठने की आरामदायक व्यवस्था और जलपान उपलब्ध कराया गया। पेंशनभोगियों को फेस ऑथेंटिकेशन के बारे में शिक्षित करने और संबंधित मोबाइल ऐप डाउनलोड एवं उपयोग करने के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु जागरूकता अभियान चलाए गए।

पेंशनभोगियों के लिए सुगम्यता में वृद्धि: इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी), बैंकों और पेंशनभोगी कल्याण संघों द्वारा घर पर सेवाएं प्रदान की गईं और बुजुर्ग/बीमार/बिस्तर पर पड़े पेंशनभोगियों को घर पर सेवाएं दी गईं। अधिक मांग वाले क्षेत्रों के लिए अलग काउंटर स्थापित किए गए, जिनमें चलने-फिरने में असमर्थ पेंशनभोगियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर समर्पित लाउंज, आधार अपडेट और स्वास्थ्य जांच सुविधाएं प्रदान की गईं।

सहयोगात्मक दृष्टिकोण के साथ अतिरिक्त सुविधाएं: बैंकों और पेंशनभोगी कल्याण संघों (पीडब्ल्यूए) ने पेंशनभोगियों को संगठित करने में सक्रिय रूप से भाग लिया। यूआईडीएआई की टीमों ने मौके पर ही आधार कार्ड अपडेट करने और ऐप इंस्टॉल करने में सहायता प्रदान की। शिविरों में पेंशनभोगियों को निवेश संबंधी विकल्पों और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।

फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक पर जोर: डीएलसी को आसानी और तेजी से प्राप्त करने हेतु फेस ऑथेंटिकेशन ऐप के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई और इसका प्रचार किया गया। शिविरों के दौरान पेंशनभोगियों और उनके रिश्तेदारों के स्मार्टफोन में ऐप इंस्टॉल किया गया।

अति वरिष्ठ/बीमार/दिव्यांग पेंशनभोगियों तक पहुंच: 90 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों और बिस्तर पर पड़े व्यक्तियों सहित सबसे कमज़ोर समूहों तक पहुंचने हेतु विशेष प्रयास किए गए। यात्रा करने में असमर्थ लोगों के लिए डाक सेवकों द्वारा घर पर जाकर सेवा प्रदान की गई।

ज्ञान साझा करना: उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को दस्तावेजीकरण किया गया और सोशल मीडिया एवं अन्य संचार माध्यमों के जरिए साझा किया गया, जिससे बैंकों को अन्य क्षेत्रों में सफल मॉडलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

नुक्कड़ नाटक: पेंशनभोगियों में जागरूकता फैलाने हेतु उत्तर मध्य रेलवे और सिक्किम सरकार द्वारा डीएलसी से संबंधित नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया।

पेंशनभोगी कल्याण संघों की भूमिका

57 पेंशनभोगी कल्याण संघों ने डीएलसी अभियान 4.0 के दौरान विशेष रूप से ग्रामीण और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने, पेंशनभोगियों को संगठित करने और उनकी सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से सबसे कमजोर वर्ग द्वारा भी आसानी से डिजिटल प्रणाली का उपयोग कर पाना, शिविरों में भाग ले पाना और घर पर डीएलसी बनाने में सहायता हासिल कर पाना सुनिश्चित हो सका। पेंशनभोगी कल्याण संघों ने व्हाट्सएप समूहों, पत्रिकाओं और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए प्रशिक्षण सहित विभिन्न माध्यमों से जागरूकता फैलाने में भी मदद की।

निगरानी और जनसंपर्क

पेंशन और पेंशन कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) के वरिष्ठ अधिकारियों ने 17 राज्यों में जमीनी स्तर पर समीक्षा की और अभियान के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु नई दिल्ली, अहमदाबाद और चेन्नई में आयोजित पांच मेगा शिविरों में भाग लिया। इन मेगा शिविरों में केन्द्र सरकार, ईपीएफओ, राज्य सरकारों और स्वायत्त निकायों सहित विभिन्न पेंशनभोगियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल 71 पीआईबी बयानों, 2,900 से अधिक ट्वीट, डीडी न्यूज तथा संसद टीवी पर चर्चाओं और आकाशवाणी पर रेडियो प्रसारणों सहित व्यापक मीडिया अभियानों ने देशभर में 20 करोड़ से अधिक लोगों तक जागरूकता फैलाने में मदद की। इस अभियान के दौरान कई सफलता की कहानियां सामने आईं, जिन्हें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया।

आगे की राह

डीओपीपीडब्ल्यू ने पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए कई पहलें की हैं और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक कदम के रूप में पेंशनभोगियों के कल्याण को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। विभिन्न हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय और ‘समग्र सरकार’ के दृष्टिकोण के साथ शुरू किया गया डीएलसी अभियान 4.0 इस उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। डीएलसी अभियान 4.0 पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण के प्रति डीओपीपीडब्ल्यू की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, यह पहल आने वाले वर्षों में और भी बड़ी उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करती है। 

 

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पीके/केसी/आर / डीए


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