आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिवों ने शहरी क्षेत्रों में पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की
110 उच्च प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क विस्तार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, इन क्षेत्रों में 150 से अधिक जिले और 260 से अधिक नगर निकाय शामिल हैं
राज्यों, जिलों, नगर निकायों तथा शहरी गैस वितरण इकाइयों को पीएनजी विस्तार एवं कनेक्शन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 6:46PM by PIB Delhi
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री श्रीनिवास कातिकिथला तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव श्री नीरज मित्तल की संयुक्त अध्यक्षता में 2 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का आयोजन राज्यों के शहरी विकास सचिवों तथा नागरिक आपूर्ति विभागों, जिला मजिस्ट्रेटों और शहरी स्थानीय निकायों के नगर आयुक्तों/कार्यपालक अधिकारियों के साथ किया गया। जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उन्हें इस बैठक से अलग रखा गया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 110 चिन्हित प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पी एन जी) अवसंरचना के विस्तार में तेजी लाना तथा अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करना था।
बैठक में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पी एन जी आर बी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। चिन्हित क्षेत्रों में कार्यरत सिटी गैस वितरण इकाइयों के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित रहे। इस बैठक में 110 से अधिक भौगोलिक क्षेत्रों से अधिकारियों की भागीदारी रही, जो 190 से अधिक जिलों तथा 300 से अधिक नगरपालिकाओं/शहरी प्राधिकरणों का प्रतिनिधित्व था। इसके अतिरिक्त, 150 से अधिक जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों/कलेक्टरों तथा 260 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों के नगर आयुक्तों अथवा कार्यपालक अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।
इससे पूर्व 28 मार्च 2026 को शहरी क्षेत्रों में “पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) सेवाओं के विस्तार तथा आवश्यक सेवाओं के सुचारु संचालन” विषय पर गोलमेज समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी और उसी के क्रम में यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई। 28 मार्च की बैठक की संयुक्त अध्यक्षता आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के माननीय केंद्रीय मंत्रियों द्वारा की गई थी।
बैठक का आयोजन पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाने तथा आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया था।

आज की बैठक में वर्तमान परिस्थितियों के संबंध में राज्यों, जिलों तथा शहरी स्थानीय निकायों को संवेदनशील बनाने तथा पीएनजी अवसंरचना की संभावनाओं के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया। पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाने हेतु शहरी स्थानीय निकायों द्वारा आवश्यक अनुमतियों एवं स्वीकृतियों को शीघ्र प्रदान करने के निर्देश जारी किए गए।

बैठक में सिटी गैस वितरण नेटवर्क की वर्तमान स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पहले से स्थापित महत्वपूर्ण अवसंरचना को रेखांकित किया गया। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि इस कार्य को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए, जिसके लिए मंत्रालयों, राज्यों, जिलों तथा शहरी स्थानीय निकायों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने राज्यों तथा शहरी स्थानीय निकायों को पीएनजी पाइपलाइन नेटवर्क के मानचित्रण को सुगम बनाने, घरेलू पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार में तेजी लाने तथा चिन्हित भौगोलिक क्षेत्रों में अपूर्ण मांग को पूरा करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य शहरी परिवारों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती ईंधन की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा उनके जीवन स्तर एवं जीवन की सुगमता में सुधार लाना है।
बैठक में सरकार द्वारा किए गए प्रमुख नीतिगत एवं विनियामक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें उन क्षेत्रों में, जहाँ पाइपलाइन अवसंरचना पहले से उपलब्ध है, घरेलू पीएनजी कनेक्शनों को तत्काल प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों में लगभग 30 लाख कनेक्शनों के लक्ष्य के माध्यम से उपलब्ध संभावनाओं का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सभी जिलों एवं शहरी स्थानीय निकायों को तीन सप्ताह की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिसमें वार्ड स्तर पर लक्ष्य निर्धारण, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान तथा अनुमोदन और क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए। शहरी स्थानीय निकायों को निर्देशित किया गया कि वे उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दें, जहाँ पाइपलाइन अवसंरचना पहले से उपलब्ध है, मांग वाले उच्च प्राथमिकता क्षेत्रों तथा समूह आवासीय सोसाइटियों में कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि शीघ्र लक्ष्य प्राप्त किए जा सकें। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में अनुमतियों की प्रक्रिया को तेज करना आवश्यक है, जिससे तत्काल प्रगति का स्पष्ट प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव ने अवगत कराया कि गैस आपूर्ति के संबंध में मंत्रालय द्वारा मार्च 2026 से विभिन्न अधिसूचनाएँ जारी की गई हैं। 24 मार्च 2026 को प्रकाशित “प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश - 2026” इस संबंध में पूर्व में जारी सभी अधिसूचनाओं का स्थान लेता है। उन्होंने आगे बताया कि सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा शहरी स्थानीय निकायों को भी उपयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि जहाँ संभव हो, प्रक्रियात्मक मानकों में आवश्यक ढील दी जा सके तथा पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार को निर्धारित समय-सीमा में तेजी से सुनिश्चित किया जा सके।
अतः नवीनतम अधिसूचनाओं में दिए गए निर्देश प्रभावी होंगे तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, जिला प्राधिकरण, शहरी स्थानीय निकाय तथा सिटी गैस वितरण इकाइयों सहित सभी संबंधित हितधारकों को अपने कार्यों एवं क्रियान्वयन रणनीतियों को इन अधिसूचनाओं के अनुरूप सख्ती से समन्वित करना होगा। इसका उद्देश्य कार्यान्वयन में एकरूपता, स्पष्टता तथा प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने लगभग 60 लाख पीएनजी कनेक्शनों की संभावनाओं को लक्षित अभियान तथा सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के माध्यम से तेजी से बढ़ाने पर विशेष बल दिया। अहमदाबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, सूरत तथा वाराणसी सहित प्रमुख शहरों के लिए संतृप्ति आधारित दृष्टिकोण प्रस्तावित किया गया, ताकि व्यापक नेटवर्क विस्तार और घरेलू कनेक्शनों को अधिकतम कर लगभग सार्वभौमिक पीएनजी कवरेज सुनिश्चित किय
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रगति की प्रभावी निगरानी तथा बाधाओं के त्वरित समाधान के लिए केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर सतत निगरानी तंत्र को प्रौद्योगिकी आधारित मंचों, जैसे एमआईएस पोर्टल, के माध्यम से और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। पीएनजी विस्तार की दैनिक निगरानी के लिए एक समर्पित एमआईएस/पोर्टल विकसित किया जाएगा। शहरी स्थानीय निकायों को पोर्टल पर प्रतिदिन रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। इस बीच, सिटी गैस वितरण इकाइयों को निर्देशित किया गया कि वे समन्वित योजना, जनसंख्या आधारित परियोजनाओं तथा भूमिगत उपयोगिता नेटवर्कों के एकीकरण के उद्देश्य से अपने पीएनजी पाइपलाइन नेटवर्क का मानचित्रण पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल पर करें।
इसके अतिरिक्त, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा शहरी स्थानीय निकायों को पीएनजी से संबंधित कार्यों के लिए सिंगल विंडो और समयबद्ध अनुमोदन तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए। यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया कि सिविल कार्यों हेतु आवश्यक अनुमतियाँ शीघ्र प्रदान की जाएँ तथा पीएनजी अवसंरचना के निर्बाध क्रियान्वयन के लिए शहरी विकास विभाग और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया जाए।
इसके अतिरिक्त, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा शहरी स्थानीय निकायों को निर्देशित किया गया कि वे मांग समूहों की पहचान कर तथा संभावित क्षेत्रों का मानचित्रण करते हुए बड़ी संख्या में एवं घरेलू दोनों प्रकार के उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी कवरेज के विस्तार में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। इन संभावित क्षेत्रों में छात्रावास, कैंटीन, संस्थान तथा व्यक्तिगत परिवारों को भी शामिल किया जाए। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिए गए कि वे आवश्यक सामग्रियों की अग्रिम भंडार योजना तैयार करें, ताकि आपूर्ति पक्ष से संबंधित बाधाओं से बचा जा सके तथा कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा शहरी स्थानीय निकायों को शहर स्तर और नगरपालिका स्तर पर कार्ययोजनाएँ तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि नए पीएनजी कनेक्शनों के लिए संभावित क्षेत्रों की व्यवस्थित पहचान की जा सके तथा लक्षित जनसंपर्क गतिविधियाँ संचालित की जा सकें। इसके अतिरिक्त, शहरी स्थानीय निकायों को निर्देशित किया गया है कि वे पीएनजी स्थापना कार्यों के लिए कुशल जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय प्लंबर संघों के साथ निकट समन्वय स्थापित करें। प्रमाणित प्लंबरों का एक डेटाबेस विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल एवं पाइप लाइन स्थापित करने के लिए मानकों पर छोटे-छोटे स्तर पर नियमित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए।
इसके अतिरिक्त, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशित किया गया है कि वे जिला एवं शहर स्तर पर जिला कलेक्टर/नगर आयुक्त के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में समर्पित त्वरित कार्रवाई दल (क्यूआरटी)/कार्य बल का अनिवार्य रूप से गठन करें। ये दल पीएनजी अवसंरचना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी से बचने के लिए दैनिक निगरानी, सभी हितधारकों के बीच निकट समन्वय तथा परिचालन संबंधी मुद्दों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करेंगे।
शहरी परिवारों द्वारा पीएनजी लगवाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु जन-जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके लिए राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों तथा सिटी गैस वितरण इकाइयों को लक्षित जनसंपर्क पहलें संचालित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी की सुरक्षा, सुविधा तथा लागत-प्रभावशीलता के संबंध में जागरूकता बढ़ाई जा सके और पीएनजी कनेक्शनों को तेजी से अपनाया जा सके। सिटी गैस वितरण इकाइयों से आग्रह किया गया कि वे क्रियान्वयन प्रक्रिया में पूर्णतः सक्रिय और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली भूमिका निभाएँ। साथ ही, राज्यों को सलाह दी गई कि वे यह सुनिश्चित करें कि क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों तक पर्याप्त निर्देश एवं आवश्यक जानकारी समय पर पहुँचाई जाए, ताकि उपभोक्ताओं के लिए बिना किसी असुविधा के निर्बाध परिवर्तन सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि समन्वित और सतत प्रयासों के माध्यम से पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार की वर्तमान गति को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाकर उच्च स्तर तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए केंद्र–राज्य–जिला स्तर पर सुदृढ़ समन्वय, उच्च संभावनाओं वाले शहरी क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप, उपभोक्ता जागरूकता में वृद्धि, समन्वय के लिए मजबूत तंत्र तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी व्यवस्था को और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया, ताकि पीएनजी के लाभ पात्र परिवारों एवं प्रतिष्ठानों तक समयबद्ध, सुगम और प्रभावी ढंग से पहुँच सकें।
यह भी रेखांकित किया गया कि सभी प्रयास राष्ट्रीय शहरी परिवर्तन एजेंडे की व्यापक परिकल्पना के अनुरूप होने चाहिए तथा पीएनजी अवसंरचना के विस्तार को राष्ट्र स्तरीय प्राथमिकता के साथ लिया जाना आवश्यक है। हालांकि बैठक में अनुमोदनों में विलंब, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय संबंधी चुनौतियों तथा उपभोक्ताओं में सीमित जागरूकता को लेकर चिंता व्यक्त की गई।
राज्य अधिकारियों तथा सिटी गैस वितरण इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भी पीएनजी अवसंरचना के विस्तार के संबंध में अपने विचार रखते हुए जमीनी स्तर पर सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया तथा प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक उपाय सुझाए। विचार-विमर्श का मुख्य केंद्र उपभोक्ताओं द्वारा पीएनजी को अपनाने की दर बढ़ाने तथा चिन्हित प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार को तेज करने के लिए प्रभावी रणनीतियों की पहचान करना रहा। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को अपनाते हुए पीएनजी विस्तार को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
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पीके/केसी/डीटी / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2248664)
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