जल शक्ति मंत्रालय
जल जीवन मिशन और अटल भूजल योजना
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 4:25PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अगस्त 2019 में राज्यों के सहयोग से ‘जल जीवन मिशन (जेजेएम) – हर घर जल’ की शुरुआत की थी। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत, हर घर में नल के माध्यम से नियमित, पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्ता वाला पेयजल दीर्घकाल तक उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस मिशन की शुरुआत में केवल 3.23 करोड़ (16.7%) ग्रामीण परिवारों के पास ही नल जल कनेक्शन उपलब्ध थे। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 03.03.2026 तक उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, जल जीवन मिशन (जेजेएम) – ‘हर घर जल’ के तहत 12.58 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल के माध्यम से पेयजल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।
इसके परिणामस्वरूप, 03 मार्च 2026 तक देश के लगभग 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से करीब 15.82 करोड़ (81.71%) परिवारों के घरों तक नल से जल आपूर्ति सुनिश्चित हो चुकी है। इस मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में दिए गए इन नल जल कनेक्शनों की वर्ष-वार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार, जिला-वार एवं गांव-वार विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, जिसे जल जीवन मिशन (जेजेएम) के आधिकारिक डैशबोर्ड पर देखा जा सकता है।
https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/JJMIndia.aspx
अब तक 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों—अरुणाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, पंजाब, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली तथा दमन एवं दीव (डीएनएच & डीडी) व पुद्दुचेरी—ने ग्रामीण परिवारों को 100% नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। इसके साथ ही, इन सभी क्षेत्रों को ‘हर घर जल (एचजीजे)’ का दर्जा प्राप्त हो चुका है।
परिचालन दिशानिर्देशों के तहत, जिनमें ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के दीर्घकालिक, टिकाऊ संचालन एवं रखरखाव की परिकल्पना की गई है, राज्यों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग की सलाह दी गई है। इसमें फ्लो मीटर, प्रेशर सेंसर, ऑनलाइन जल गुणवत्ता निगरानी उपकरणों और एससीएडीए जैसे रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं। ये उन्नत उपकरण जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का समय रहते पता लगाने, त्वरित समाधान सुनिश्चित करने और निर्णय-प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं। परिणामस्वरूप, जल आपूर्ति की निरंतरता बनी रहती है और जल जीवन मिशन (जेजेएम) के सेवा मानकों के अनुरूप घरों तक सुरक्षित, पर्याप्त एवं विश्वसनीय पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।
अटल भूजल योजना एक निर्धारित अवधि और निश्चित बजट वाली पायलट परियोजना थी, जिसे सात राज्यों गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 80 जिलों के 229 ब्लॉकों की 8,203 जल-संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में लागू किया गया। यह योजना सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी है और इसने समुदाय-आधारित सहभागी भूजल प्रबंधन की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है। इस योजना ने एक व्यवहारिक व दोहराए जा सकने वाले मॉडल के रूप में कार्य किया है, जिसे अन्य राज्य अपने संसाधनों और बजट के अनुसार अपनाकर लागू कर सकते हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सहभागी जल सुरक्षा योजनाओं का निर्माण, जल-कुशल तकनीकों को अपनाना, सामुदायिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करना तथा जल पुनर्भरण संरचनाओं का विकास जैसे सभी प्रयासों ने बेहतर जल शासन और भूजल संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने के लिए इन सात राज्यों में 83,800 से अधिक आपूर्ति-पक्ष संरचनाएं जैसे चेक डैम, तालाब, रिचार्ज शाफ्ट/गड्ढे आदि का निर्माण या पुनरोद्धार किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
अटल भूजल योजना के समग्र प्रभाव का आकलन भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) द्वारा किया गया है। योजना क्षेत्रों में किए गए विस्तृत फील्ड सर्वेक्षणों और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद के आधार पर इस अध्ययन में कई महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव सामने आए हैं। इनमें क्षमता निर्माण और आईईसी गतिविधियों के माध्यम से भूजल संबंधी मुद्दों पर समुदाय में जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि शामिल है। साथ ही, भूजल प्रबंधन में नेतृत्व और निर्णय-प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे सामाजिक समावेशिता को भी बल मिला है। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ है कि समुदाय के ज्ञान स्तर में समग्र रूप से वृद्धि हुई है और लोग अब भूजल संरक्षण तथा जल प्रबंधन गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अधिक तत्पर हैं।
यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एनके / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2248634)
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