जनजातीय कार्य मंत्रालय
टीएसपी दिशानिर्देशों का कार्यान्वयन
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 4:15PM by PIB Delhi
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) तंत्र को जारी रखा गया है लेकिन इसका नाम बदलकर अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) कर दिया गया है। नीति आयोग ने 2017 में डीएपीएसटी के लिए धनराशि आवंटन हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किया। इन दिशा-निर्देशों की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
मंत्रालयों/विभागों को योजनाओं के कुल आवंटन का एक निश्चित प्रतिशत आवंटित करने की जिम्मेदारी।
आवंटित निधि का प्रतिशत जनसंख्या अनुपात के 50 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए या फिर कार्य बल द्वारा निर्धारित या वास्तविक आंकड़ों में से जो भी अधिक हो।
मंत्रालयों/विभागों को एससीएसपी और डीएपीएसटी के लिए निर्धारित धनराशि को अलग-अलग बजट मदों के अंतर्गत रखना आवश्यक।
केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा विभिन्न केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत राज्यवार आवंटन का वितरण, विशेषकर लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं के अंतर्गत, संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए जनसंख्या के अनुपात में होना आवश्यक।
निगरानी के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र।
सरकार अनुसूचित जनजातियों और देश में जनजातीय बहुलता वाले क्षेत्रों, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है, के विकास की रणनीति के रूप में डीएपीएसटी को लागू कर रही है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अलावा, 41 मंत्रालय/विभाग अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और गैर-अनुसूचित जनजातियों आबादी के बीच विकास के अंतर को पाटने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़कों, आवास, विद्युतीकरण, रोजगार सृजन, कौशल विकास आदि से संबंधित विभिन्न जनजातीय विकास परियोजनाओं के लिए डीएपीएसटी के अंतर्गत जनजातीय विकास के लिए प्रति वर्ष अपने कुल योजना बजट का एक निश्चित प्रतिशत आवंटित कर रहे हैं।
राज्य सरकारों को राज्य में अनुसूचित जनजाति आबादी (जनगणना 2011) के अनुपात में कुल योजना आवंटन के अंतर्गत टीएसपी निधि आवंटित करनी होती है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उनके कोष से टीएसपी के लिए किए गए आवंटन एवं व्यय का विवरण https://statetsp.tribal.gov.in पर उपलब्ध है।
केंद्रीय बजट दस्तावेज़ के व्यय प्रोफाइल के विवरण 10बी में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए बाध्य मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटित योजनाओं और निधियों का विवरण दिया गया है, जिसका लिंक नीचे दिया गया है:
https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/stat10b.pdf.
केंद्र सरकार ने योजनाओं के दिशा-निर्देशों को कड़ाई से लागू करने और अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच विभिन्न जनजातीय विकास योजनाओं संबंधित जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
जनजातीय कार्य मंत्रालय समय-समय पर संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ बैठकें आयोजित करता है ताकि दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन, आवंटन और डीएपीएसटी निधि के व्यय की समीक्षा की जा सके। संबंधित मंत्रालयों/विभागों की सभी प्रमुख योजनाओं के संबंधित अधिकारियों से अनुरोध है कि वे उचित और सार्थक चर्चाओं के लिए इन बैठकों में उपस्थित रहें। समीक्षा बैठकों में डीएपीएसटी आवंटन के अंतर्गत आने वाली व्यक्तिगत योजनाओं के आवंटन, व्यय एवं कार्यान्वयन पर चर्चा की जाती है। संबंधित मंत्रालयों/विभागों से आग्रह किया जाता है कि वे अनुसूचित जनजातियों को विशिष्ट लाभ प्रदान करने वाली योजनाओं के अंतर्गत डीएपीएसटी निधि के आवंटन के लिए नीति आयोग द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करें और आवंटित निधि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें।
मंत्रालय ने डीएपीएसटी के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के पास उपलब्ध धन के संमिलन के माध्यम से एसटी के विकास के लिए दो मिशन शुरू किए हैं, जिनमें पहला प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) और दूररा धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान है। डीएपीएसटी के अंतर्गत आवंटन की प्रभावी निगरानी के लिए, मंत्रालयों/विभागों द्वारा योजना/कार्यक्रम-वार आवंटन केंद्रीय बजट के विवरण 10बी में दर्शाए गए हैं, जिसमें अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए मंत्रालय-वार आवंटन दिए गए हैं। इसके अलावा, विवरण 10बीबी और विवरण 10बीबीबी क्रमशः पीएम-जनमन और धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए आवंटन संबंधी विशेष जानकारी प्रदान करते हैं। सही लेखांकन और धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए, डीएपीएसटी के अंतर्गत आवंटन को मंत्रालयों/विभागों द्वारा अनुदान के लिए विस्तृत मांगों में '796' नामक उपशीर्षक के तहत दर्शाया जाता है।
मंत्रालय द्वारा डीएपीएसटी निधि की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन निगरानी प्रणाली (https://stcmis.gov.in) विकसित किया गया है। यह प्रणाली सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) से सीधे डेटा प्राप्त करता है और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटन की तुलना में व्यय की रियल टाइम निगरानी को सक्षम बनाता है। इसके अलावा, पीएम गति शक्ति पोर्टल पर इंटरैक्टिव डैशबोर्ड मंत्रालय-वार और हस्तक्षेप-वार प्रगति की निगरानी करते हैं, रियल टाइम डेटा का उपयोग करते हुए, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए लक्षित योजना और अंतर विश्लेषण को सक्षम बनाता है।
सही लेखांकन एवं निगरानी के लिए तथा किसी अन्य योजना में धन हस्तांतरण को रोकने के लिए, डीएपीएसटी के अंतर्गत आवंटित निधियों को सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अपने 'अनुदान के लिए विस्तृत मांग' में कार्यात्मक मुख्य मद/ मुख्य उप मदों के नीचे लघु मद '796' के अंतर्गत दर्शाया जाता है। अनियमितताओं के लिए प्रत्येक योजना या दिशा-निर्देश के तहत लागू नियमों के अनुसार दंडात्मक प्रावधानों में कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल, मंत्रालय निम्नलिखित कारणों से निधि आवंटन एवं उपयोग में सुधार के लिए केंद्रीय स्तर पर कोई कानून लाने पर विचार नहीं कर रहा है:
- केंद्रीय बजट 2026-27 में, संबंधित मंत्रालयों/विभागों के कुल योजना बजटीय आवंटन में से 1,39,189.53 करोड़ रुपये (केंद्र शासित प्रदेश आवंटन को छोड़कर) डीएपीएसटी निधि के रूप में आवंटित किए गए हैं, जो वित्त वर्ष 2016-17 (23206.14 करोड़ रुपये) की तुलना में डीएपीएसटी निधि आवंटन में लगभग छह गुना बढ़ोत्तरी है।
- पिछले पांच वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा में डीएपीएसटी निधि का उपयोग 92 प्रतिशत से अधिक रहा है।
- सही लेखांकन एवं निगरानी के लिए तथा किसी अन्य योजना में उनके गैर-दुरुपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, डीएपीएसटी के अंतर्गत आवंटित निधियों को सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा उनके 'अनुदान के लिए विस्तृत मांग' में कार्यात्मक मुख्य मद/ मुख्य उप मदों के नीचे लघु मद '796' के अंतर्गत दर्शाया जाता है।
- नीति आयोग नियमित रूप से मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा करता है और आवश्यकतानुसार अपडेट या नए दिशा-निर्देश जारी करता है।
- मंत्रालय ने डीएपीएसटी के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के पास उपलब्ध निधियों के समन्वय के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए दो मिशन शुरू किए हैं, जिनका नाम पीएम-जनमन और धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान है। इस विधेयक के पारित होने से डीएपीएसटी का दायरा सीमित हो सकता है और मंत्रालय के लिए अनुसूचित जनजाति एवं आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए इस तरह की नई पहल शुरू करना कठिन हो सकता है।
इसके अलावा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तराखंड, राजस्थान और तमिलनाडु ने जनजातीय उप योजना के संबंध में पर्याप्त आवंटन एवं प्रभावी व्यय सुनिश्चित करने के लिए अपने-अपने राज्यों में कानून बनाए हैं।
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पीके/केसी/एके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2248583)
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