युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
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छत्तीसगढ़ मॉडल महिला सशक्तिकरण के लिए नई दिशा: रक्षा खडसे


महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह और बस्तर के पारंपरिक आदिवासी शिल्प समावेशी विकास और संस्कृति के संरक्षण के प्रमुख वाहक हैं

प्रविष्टि तिथि: 01 APR 2026 12:08PM by PIB Delhi

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने आज जगदलपुर में 'छत्तीस कला' के तहत प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह के विकास केंद्र और स्टालों का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की एक श्रृंखला की समीक्षा की और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों के साथ बातचीत भी की।

श्रीमती खडसे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामुदायिक नेतृत्व वाले विकास की दिशा में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक परिवर्तन के वाहक के रूप में उभर रहे हैं।

श्रीमती खडसे ने राज्य की महिला-केंद्रित पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान कर रही हैं, जबकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री,  तैयार खाद्य उत्पाद और लखपति दीदी योजना जैसे पूरक प्रयास स्थायी आजीविका के अवसरों और बाजार तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं।

श्रीमती खडसे ने कहा कि ये पहल न केवल आय सृजन में योगदान दे रही हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक हैं। उन्होंने चल रहे प्रयासों को नारी शक्ति के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

श्रीमती खडसे ने बस्तर जिले के चिलकुटी गांव की अपनी यात्रा के दौरान, समृद्ध कलात्मक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भी जायजा लिया। धोकरा कला में उपयोग की जाने वाली  पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स तकनीक इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रही। यह तकनीक आदिवासी धातु कला का एक प्रतिष्ठित रूप है और बस्तर के कारीगर समुदायों की अनूठी पहचान और शिल्प कौशल को दर्शाती है।

श्रीमती खडसे ने इन परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह शिल्प कला मात्र एक कलात्मक अभ्यास से कहीं अधिक है; यह एक जीवंत सांस्कृति और स्थानीय आदिवासी कारीगरों की स्थायी विरासत का प्रतीक है। इस यात्रा ने सांस्कृतिक संरक्षण और आजीविका सृजन के बीच घनिष्ठ संबंध को भी रेखांकित किया। जो पारंपरिक स्थानीय शिल्प समुदायों को आजीविका के स्थायी आर्थिक अवसर प्रदान करते हैं।

श्रीमती खड़से ने कार्यक्रम के दौरान महिला उद्यमियों और कारीगरों से बातचीत की और उन्हें अपनी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर जिला कलेक्टर आईएएस श्री आकाश छिकारा,  पुलिस अधीक्षक आईपीएस श्री शलभ सिन्हाजिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी आईएएस श्री प्रतीक जैन और बस्तर के एसडीएम श्री गगन शर्मा  उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और पारंपरिक आदिवासी शिल्पों के माध्यम से हो रहा परिवर्तन महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक विकास के आकर्षक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

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पीके/केसी/जेके/एसके


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