जल शक्ति मंत्रालय
मंत्रिमंडल की मंजूरी और संरचनात्मक सुधारों के अनुपालन के बाद, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पांच राज्यों को धनराशि जारी की गई
संशोधित संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद, 5 राज्यों को जल जीवन मिशन 2.0 के तहत धनराशि प्राप्त हुई
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अनिवार्य अनुपालन शर्तों की पूर्ति पर धनराशि जारी की गई
प्रविष्टि तिथि:
31 MAR 2026 1:37PM by PIB Delhi
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 को मंजूरी दी, जो मिशन के पुनर्गठन और पुनर्रचना का प्रतीक है। अब यह मिशन बुनियादी ढांचे पर केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर सेवा वितरण मॉडल की ओर अग्रसर है। यह परिवर्तन सुदृढ़ पेयजल प्रबंधन और एक संस्थागत परितंत्र द्वारा समर्थित है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
इस पुनर्गठन के अंतर्गत, मंत्रिमंडल ने कुल परिव्यय को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है, जिसमें कुल केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये है, जो 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जिससे केंद्र की ओर से 1.51 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त हिस्सेदारी प्राप्त हुई है। इस पुनर्गठित मिशन का मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय, सुरक्षित और टिकाऊ पेयजल सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक सुधार करना है।
मंत्रिमंडल से अनुमोदित सुधारों के अनुरूप, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय के साथ सुधार संबंधी समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना शुरू कर दिया है। ये समझौता ज्ञापन सेवा वितरण मानकों, सतत विकास उपायों और जल आपूर्ति प्रणालियों के सामुदायिक नेतृत्व वाले प्रबंधन सहित प्रमुख सुधारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को औपचारिक रूप देते हैं। अब तक, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत 12 राज्यों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
13 मार्च को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी)/ग्रामीण जल आपूर्ति (आरडब्ल्यूएस) और पंचायती राज विभागों के मंत्रियों के साथ जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन रोडमैप पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने योजनाओं को समय पर पूरा करने और जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चूंकि जल राज्य का विषय है, इसलिए मिशन की सफलता ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय नल जल आपूर्ति प्रदान करने में राज्य सरकारों की जवाबदेही पर निर्भर करती है।
इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, केंद्रीय मंत्री ने जल महोत्सव 2026 के समापन के दौरान 22 मार्च को जेजेएम 2.0 परिचालन दिशानिर्देशों को ई-रिलीज किया।
तदनुसार, अनिवार्य अनुपालन शर्तों की पूर्ति के बाद, पांच राज्यों - उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए धनराशि जारी कर दी गई है।
कुल 1,561.53 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। उत्तर प्रदेश को 792.93 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 536.53 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 154.02 करोड़ रुपये, ओडिशा को 65.31 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 12.74 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए संरचित सत्यापन की एक प्रणाली लागू की गई है, जिसे राज्यों को धनराशि जारी करने से पहले पूरा करना आवश्यक है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- राज्य ने जेजेएम 2.0 के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
- योजना सत्यापन: सुजलाम भारत जीआईएस-लिंक्ड एसेट रजिस्ट्री के विरुद्ध सत्यापन वाली योजनाएं।
- तकनीकी अनुपालन: राज्य सरकार द्वारा सीपीएचईईओ डिजाइन मानदंडों के अनुपालन का प्रमाणन और एनजेजेएम द्वारा जारी तकनीकी सलाह।
- योजनाओं पर किए गए व्यय का उचित वित्तीय मिलान।
स्वीकृत योजनाओं के लिए धनराशि जारी कर दी गई है, और समयबद्ध तरीके से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उनके समय पर पूरा होने की बारीकी से निगरानी की जाएगी। इसके लिए एक व्यापक समीक्षा तंत्र भी बनाया गया है, जिसके तहत मंत्रालय धनराशि जारी करने से पहले वित्तीय उपयोग, तकनीकी अनुपालन और डेटा सत्यापन का आकलन करता है। पहली बार लागू की जा रही यह पद्धति जवाबदेही को मजबूत करने और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रदर्शन-आधारित और अनुपालन-संबंधित तंत्र प्रस्तुत करती है।
पृष्ठभूमि
देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार राज्यों के सहयोग से अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन (जेजेएम) - हर घर जल योजना का कार्यान्वयन कर रही है। इस मिशन का लक्ष्य घरों में नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित और दीर्घकालिक आधार पर निर्धारित गुणवत्ता वाले पेयजल की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराना है।
मिशन की शुरुआत में, केवल 3.23 करोड़ (16.7 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल के जल का कनेक्शन था। तब से इसमें काफी प्रगति हुई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 12.59 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल के जल का कनेक्शन प्रदान किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, देश के लगभग 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.83 करोड़ (लगभग 81.8 प्रतिशत) परिवारों को अब नल के जल की आपूर्ति मिल रही है।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सेवा वितरण उन्मुख दृष्टिकोण की ओर बदलाव के साथ, ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों में जवाबदेही, पारदर्शिता, प्रभावी निगरानी और शिकायत निवारण सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। इस संदर्भ में, किसी ग्राम पंचायत को "हर घर जल" तभी घोषित किया जाएगा जब राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा पर्याप्त ग्राम संचालन और रखरखाव तंत्र स्थापित किए जाने की पुष्टि हो जाएगी।
सामुदायिक स्वामित्व और भागीदारी के महत्व को पहचानते हुए, यह कार्यक्रम जल उत्सव को रखरखाव और समीक्षा के लिए एक वार्षिक, समुदाय-नेतृत्व वाली पहल के रूप में बढ़ावा देगा। इसे तीन स्तरीय अभियान के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर जल महोत्सव, राज्य स्तर पर राज्य जल उत्सव या नदी उत्सव और ग्राम पंचायत स्तर पर लोक जल उत्सव शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में जल के स्थानीय सांस्कृतिक महत्व को शामिल किया जाएगा और जल-सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करेगा।
पहले, सीमित तत्क्षण (रीयल टाइम) निगरानी, परिसंपत्ति ट्रैकिंग में कमियां, शिकायत निवारण में देरी और खंडित डेटा सिस्टम जैसी चुनौतियों ने एक मजबूत डिजिटल और फीडबैक-आधारित तंत्र की आवश्यकता को उजागर किया था। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, "सुजलम भारत" नामक एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा स्थापित किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव या सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की गई है, जिससे स्रोत से नल तक पेयजल आपूर्ति प्रणालियों की संपूर्ण डिजिटल मैपिंग और रीयल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो पाती है। आज तक, 1,77,156 सुजल गांव आईडी (सेवा क्षेत्र) 1,13,849 सुजलम भारत आईडी (जल आपूर्ति योजना आईडी) से जुड़ी हुई हैं।
इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायत स्तर पर जल सेवा आंकलन आयोजित किया जाएगा ताकि सेवा वितरण पर नागरिकों की प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके और इन परिणामों को मेरी पंचायत एप्लिकेशन के माध्यम से प्रदर्शित किया जा सके, जिससे शिकायत निवारण को सुदृढ़ किया जा सके और सेवा वितरण परिणामों में सुधार किया जा सके। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को "जल अर्पण" प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं के शुभारम्भ और औपचारिक हस्तांतरण में शामिल किया जाएगा।
जेजेएम 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक देश भर के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन सुनिश्चित करके सभी ग्राम पंचायतों को "हर घर जल" घोषित करना है। इस निर्धारित समयसीमा का पालन योजनाओं की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने और नागरिक-केंद्रित जल सेवाओं के वितरण के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा, जिसे राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ अलग-अलग सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापनों द्वारा समर्थित किया जाएगा।
इन संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से, जेजेएम 2.0 विकसित भारत @2047 के विज़न के अनुरूप है और एक नागरिक-केंद्रित, उपयोगिता-आधारित सेवा वितरण प्रणाली की ओर अग्रसर है जो यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध हो। ऐसा सशक्त सामुदायिक भागीदारी (जन भागीदारी) और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव पर ध्यान केंद्रित करने से संभव होगा जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान मिलता रहेगा।
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पीके/केसी/एके/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2247380)
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