रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरक आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम - जेपी नड्डा

प्रविष्टि तिथि: 31 MAR 2026 6:11PM by PIB Delhi

उर्वरक विभाग, भारत सरकार ने क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन (स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण) और डीकार्बनाइजेशन (कार्बन कम करने) की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है।

फ़र्टिलाइज़र कंपनियों और ग्रीन अमोनिया बनाने वाली कंपनियों के बीच ग्रीन अमोनिया खरीदने (GAPA) और ग्रीन अमोनिया सप्लाई (GASA) करने के समझौते किए गए हैं।

ये समझौते नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट्स के संचालन में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम हैं।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए ग्रीन अमोनिया एग्रीमेंट (कुल 11 प्रोजेक्ट) का आदान-प्रदान माननीय केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, माननीय केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और माननीय विद्युत नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image002BH65.jpg

इस अवसर पर उर्वरक विभाग के सचिव श्री रजत कुमार मिश्र, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, उर्वरक कंपनियों के CMD/CEO और ग्रीन अमोनिया उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

 

एग्रीमेंट साइनिंग समारोह के दौरान, माननीय केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री, श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा:

ग्रीन अमोनिया एग्रीमेंट का यह आदान-प्रदान सस्टेनेबल फर्टिलाइज़र प्रोडक्शन की दिशा में भारत की यात्रा में एक ऐतिहासिक कदम है।

ग्रीन अमोनिया को अपनी सप्लाई चेन में शामिल करके हम सिर्फ़ कार्बन उत्सर्जन कम कर रहे हैं, बल्कि देश की लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता भी मजबूत कर रहे हैं।

यह पहल हमारे किसानों और पूरे देश के लिए एक स्वच्छ और हरित भविष्य बनाने के प्रति सरकार के दृढ़ संकल्प को दिखाती है।

 

https://x.com/JPNadda/status/2038624732539720042

Image

वर्तमान में भारत लगभग 165-170 लाख मीट्रिक टन फॉस्फेटिक और पोटासिक (P&K) उर्वरक उत्पादन होता है, जिसमें DAP और NPK जैसे उर्वरक शामिल हैं। हालांकि, घरेलू उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा आयातित अमोनिया पर निर्भर है। दुनिया में चल रही जियो-पॉलिटिकल घटनाओं की वजह से ग्लोबल अमोनिया बाजार में काफी अस्थिरता गई है। इससे अमोनिया की उपलब्धता और कीमत दोनों में बार-बार उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिसका सीधा असर भारत में उर्वरक उत्पादन की स्थिरता पर पड़ रहा है।

 

इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने 10 साल के लंबे समय के लिए फिक्स्ड कीमत पर ग्रीन अमोनिया की सप्लाई के लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट किए हैं। इस रणनीतिक कदम से अमोनिया की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है। इससे P&K उर्वरकों का घरेलू उत्पादन लगातार होता रहेगा और भारतीय बाजार में उर्वरक की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी।

 

इसके अलावा, ग्रीन अमोनिया अपनाने के और भी कई फायदे हैं। यह आयात पर हमारी निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा की बचत करेगा। साथ ही फर्टिलाइजर सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा और नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। इतना ही नहीं देश में ग्रीन अमोनिया की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा। एक स्थिर आपूर्ति का माहौल फर्टिलाइजर सेक्टर में नए प्लेयर्स को आकर्षित करेगा, जिससे भविष्य में और अधिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित होंगी।

Image

कुल मिलाकर, ग्रीन अमोनिया की ओर बढ़ने का यह बदलाव भारत की उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने, स्थिरता बढ़ाने और इस क्षेत्र में लंबे समय तक लचीलापन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।ये समझौते ग्रीन अमोनिया की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगे।

भारत सरकार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को ₹19,744 करोड़ के बजट के साथ लागू कर रही है।इस मिशन का मुख्य लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक हर साल कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाए।

इस मिशन को भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादों (डेरिवेटिव्स) के लिए दुनिया का एक प्रमुख हब बनाने के लिए तैयार किया गया है। साथ ही यह सस्टेनेबल विकास को बढ़ावा देगा और आयातित जीवाश्म ईंधन पर आधारित इनपुट्स पर हमारी निर्भरता को कम करेगा।

उर्वरक विभाग, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), SECI और उर्वरक निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर एक कम-कार्बन वाला और भविष्य के लिए तैयार उर्वरक क्षेत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

यह पहल भारत की उर्वरक मूल्य श्रृंखला में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादों को शामिल करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। साथ ही यह स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के प्रति देश की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है।

मुख्य विशेषताएं:

  • ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांज़िशन के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप (SIGHT) कार्यक्रम के तहत, सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने पूरे देश में उर्वरक इकाइयों को ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया चलाई।
  • इस बोली में कीमतें बहुत प्रतिस्पर्धी रहींये 49.75 से 64.74 प्रति किलोग्राम के बीच थीं। ये कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार (लगभग110 प्रति किलोग्राम) से काफी कम हैं।
  • SECI ने देशभर की 13 फर्टिलाइज़र यूनिट्स को हर साल कुल 7,24,000 टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति आवंटित की है।
  • आज हुए सभी समझौतों की अवधि 10 साल की है। ये समझौते ग्रीन अमोनिया उत्पादन बढ़ाने के लिए लंबे समय तक मांग की गारंटी, पारदर्शिता और निवेश की सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • इस पहल से नॉन-यूरिया फर्टिलाइज़र यूनिट्स में आयातित ग्रे अमोनिया की जगह ग्रीन अमोनिया के इस्तेमाल से 10 साल में लगभग 2.5 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाने की उम्मीद है।

उर्वरक क्षेत्र के लिए प्रमुख लाभ

इस पहल से उम्मीद है कि:

  • उर्वरक उद्योग का कार्बन फुटप्रिंट (कार्बन उत्सर्जन) काफी कम हो जाएगा।
  • ग्रेअमोनिया सेग्रीनअमोनिया की ओर बदलाव संभव हो सकेगा।
  • भारत की स्थिति एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में और मजबूत बनेगी।
  • उर्वरक उत्पादन में दीर्घकालिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

 

निम्नलिखित कंपनियाँ समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाली हैं:

क्रम. सं.

उर्वरक कंपनी का नाम

विनिर्माण इकाई

ग्रीन अमोनिया की मात्रा (MT प्रति वर्ष)

डेवलपर / विनर

निर्धारित मूल्य ( रुपये /किग्रा)

1.

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO)

कांडला (गुजरात)

1,00,000

ACME क्लीनटेक

54.73

 

 

पारादीप (ओडिशा)

1,00,000

ACME क्लीनटेक

49.75

2.

कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड (CIL)

काकीनाडा (आंध्र प्रदेश)

85,000

जैक्सन ग्रीन & OCIOR

50.75

 

 

विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)

50,000

ACME क्लीनटेक

51.89

3.

पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड (PPL)

पारादीप (ओडिशा)

75,000

ACME क्लीनटेक

55.75

 

 

जुआरीनगर (गोवा)

25,000

ACME क्लीनटेक

62.84

 

पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड (PPL)

मंगलौर

15,000

SCC इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड

57.65

4.

ओस्तवाल

कृष्णा फॉस्केम लिमिटेड, मेघनगर (मध्य प्रदेश)

70,000

NTPC अक्षय ऊर्जा

51.80

 

 

मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड-II, सागर (मध्य प्रदेश)

60,000

ओरियाना पावर लिमिटेड

52.25

 

 

मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड-III, धुले (महाराष्ट्र)

70,000

SCC  इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड

53.05

6.

इंडोरामा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (IIPL)

हल्दिया (पश्चिम बंगाल)

20,000

ACME क्लीनटेक

64.74

                                                            ******

 

 

नीरज कुमार भट्ट/ शत्रुघ्न प्रसाद


(रिलीज़ आईडी: 2247333) आगंतुक पटल : 707
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu