नागरिक उड्डयन मंत्रालय
डीजीसीए ने विमानन के व्यापक क्षेत्रों—जिनमें विमानन इंजीनियरिंग और विमानन प्रबंधन शामिल है— में युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया
नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि विमानन क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हम देश में एक मजबूत विमानन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र कितनी अच्छी तरह विकसित कर पाते हैं
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 9:02PM by PIB Delhi
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी)) ने विमानन, विमानन इंजीनियरिंग और विमानन प्रबंधन के व्यापक क्षेत्रों में वैज्ञानिक, तकनीकी तथा प्रबंधन संबंधी पहलुओं से जुड़ी जानकारी और कौशल के आदान-प्रदान एवं बढ़ाने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते पर डीजीसीए के श्री फैज़ अहमद किदवई और जीएसवी के कुलपति प्रोफेसर मनोज चौधरी ने केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू तथा केन्द्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर, नागरिक उड्डयन सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री सतीश कुमार तथा डीजीसीए, रेलवे और जीएसवी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा, “गति शक्ति और डीजीसीए के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर, मैं सबसे पहले दोनों संस्थानों को बधाई देना चाहूंगा, क्योंकि यह उन सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक की नींव है, जो भविष्य के लिए हम जिस कार्यबल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, उसके संदर्भ में पूरे विमानन क्षेत्र को परिवर्तित करने वाला है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में हमने जबरदस्त सफलता देखी है। विशेष रूप से वह मंत्र जो ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज़ का सफ़र’ के रूप में शुरू हुआ था, जहां हमारा उद्देश्य विमानन को सिर्फ एक विशेष यात्रा क्षेत्र न बनाकर, बल्कि एक समावेशी क्षेत्र बनाना था।”
इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) का मुख्य उद्देश्य उद्योग–शैक्षणिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाकर विमानन और एमआरओ क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करना है। इसके अंतर्गत एविएशन मेंटेनेंस इंजीनियरिंग(एएमई) में स्नातक डिग्री शुरू की जाएगी। यह पाठ्यक्रम आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026-27 (अगस्त 2026) से लागू किया जाएगा। अपने उद्घाटन संबोधन में माननीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि इस एमओयू पर हस्ताक्षर एक ऐतिहासिक क्षण है। जीएसवी और डीजीसीए मिलकर भविष्य के लिए तैयार तीन वर्षीय बी.एससी. (एएमई) पाठ्यक्रम तैयार करेंगे, जिसमें शैक्षणिक गहराई, नियामकीय अनुपालन और उद्योग-उन्मुख कौशलों का समन्वय होगा, ताकि भारत के अगली पीढ़ी के एमआरओ क्षेत्र को मजबूती मिल सके। इस एमओयू में यह भी प्रस्तावित है कि जीसीवी, सतत विमानन ईंधन (एसएएफ), विमान रखरखाव, पुर्जों के निर्माण तथा उनके एकीकरण के क्षेत्र में डीजीसीए के शोध/जानकारी साझेदार के रूप में कार्य करेगा। इसके अलावा जीएसवी, डीजीसीए के अधिकारियों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण में भी सहयोग प्रदान करेगा।
देश में विमानन क्षेत्र के भविष्य के बारे में बात करते हुए मंत्री नायडू ने कहा, “विमानन क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हम देश में एक मजबूत विमानन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र कितन अच्छी तरह विकसित कर पाते हैं, और यही वह क्षेत्र है जिस पर हमने विशेष ध्यान केंद्रित किया है। हमने पिछले 5 वर्षों में उल्लेखनीय सफलता देखी है, विशेष रूप से एमआरओ के क्षेत्र में, जिनकी संख्या लगभग 160 से बढ़कर 240 से अधिक हो गई है।”
श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने आगे विस्तार से बताया, “हम हमेशा इस बात की बात करते हैं कि भारत विमानन क्षेत्र में कितनी बड़ी मांग पैदा कर रहा है। यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है—हमारे पास लगभग 1700 विमानों के ऑर्डर हैं, जो वर्तमान बेड़े का लगभग दोगुना (2 गुना) है। ये विमान आने वाले कुछ वर्षों में हमारे हवाई क्षेत्र में शामिल होंगे। जब पूरा विकसित हो जाएगा, तब संभवतः वर्ष 2036 तक हमारे हवाई क्षेत्र में 3,000 तक विमान हो सकते हैं।” उन्होंने कहा कि तब तक इन सभी विमानों को सही कार्यबल का सहयोग मिलना आवश्यक होगा। अगले 10 वर्षों में पायलटों की आवश्यकता लगभग 10,000 से 12,000 के बीच होने की संभावना है। वर्तमान में कई पायलट प्रशिक्षण के लिए विदेश जाना पसंद करते हैं और बाद में भारत लौट आते हैं।
वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा, “वर्ष 2047 तक हमारा लक्ष्य एक विकसित देश बनना है और इसके लिए हमें आत्मनिर्भर होना होगा। हम एक आत्मनिर्भर भारत देखना चाहते हैं—जहां हम ‘मेक इन इंडिया’ करें और ‘ट्रेन इन इंडिया’ को बढ़ावा दें। ये सभी घटक मिलकर उसी दिशा में काम करेंगे, जिस पर यह एमओयू केंद्रित है।”
अपने समापन भाषण में केन्द्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि जीएसवी पहले ही वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा स्थापित कर चुका है और उद्योग के लिए तैयार पेशेवरों को तैयार करने हेतु 62 उद्योग साझेदारों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है। उन्होंने जीएसवी में प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का भी आह्वान किया, ताकि विकसित भारत के पहल को समर्थन मिल सके।
यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) नियमन, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच एक व्यवस्थित सेतु का काम करेगा। जहां डीजीसीए, सीएआर-66 और सीएआर-147 ढांचे के तहत लाइसेंसिंग मानकों को निर्धारित करता रहेगा, वहीं जीएसवी पाठ्यक्रम नवाचार, प्रशिक्षक विकास, अनुसंधान एकीकरण और उद्योग से जुड़े अप्रेंटिसशिप मॉडल के लिए एक राष्ट्रीय शैक्षणिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा। एएमई शिक्षा में व्यावहारिक एमआरओ प्रशिक्षण, सिमुलेशन लैब, ओईएम साझेदारी और क्षमता-आधारित सीखने के मार्गों को शामिल करके, जीएसवी– डीजीसीए सहयोग एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करेगा जो भारत के बढ़ते विमान बेड़े को सहयोग देने में सक्षम होगा। साथ ही, यह भारत को न सिर्फ विमान रखरखाव बल्कि विमान निर्माण के क्षेत्र में भी एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक एमआरओ गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
***
पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2247152)
आगंतुक पटल : 60
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English