कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
कौशल प्रशिक्षित युवाओं के लिए नौकरियां
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 4:02PM by PIB Delhi
कौशल भारत मिशन (सिम) के तहत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के अंतर्गत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा देश भर में समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करना है।
एमएसडीई की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवारों का ब्यौरा निम्नलिखित है:
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पीएमकेवीवाई
(स्थापना से लेकर 31.12.2025 तक)
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जेएसएस
(2018-19 से 31.12.2025 तक)
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नैप्स
(2018-19 से 31.12.2025 तक)
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सीटीएस/आईटीआई
(2018-19 से 31.12.2025 तक)
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1,64,34,210
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34,14,181
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47,19,923
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1,07,42,151
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एमएसडीई की योजनाओं में से, पीएमकेवीवाई के पहले तीन चरणों (पीएमकेवीवाई 1.0, पीएमकेवीवाई 2.0 और पीएमकेवीवाई 3.0) में केवल अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) घटक के तहत ही प्लेसमेंट पर नजर रखी गयी थी, जो 2015-16 से 2021-22 तक लागू किए गए थे। पीएमकेवीवाई 3.0 तक एसटीटी प्रमाणित उम्मीदवारों की बताई गई प्लेसमेंट दर 43% थी। पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत, प्रशिक्षित उम्मीदवारों को उनके विभिन्न करियर अवसर चुनने के लिए सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है और उन्हें उद्योग-संबंधित कौशल पाठ्यक्रमों के माध्यम से इसके लिए उपयुक्त रूप से तैयार किया जाता है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के एक स्वायत्त संस्थान, अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एजेएनआईएफएम) द्वारा किए गए पीएमकेवीवाई 4.0 के तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार, नियोजित और स्व-नियोजित अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) प्रतिभागियों का संयुक्त हिस्सा प्रशिक्षण से पहले 26.6% से बढ़कर पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण के बाद 45.4% हो गया, जो 18.8 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्शाता है। आय से संबंधित परिणामों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई देता है, जिसमें एसटीटी उम्मीदवारों में से 41.4% और पूर्व शिक्षा मान्यता (आरपीएल) उम्मीदवारों में से 48.9% ने प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद आय में वृद्धि की सूचना दी है।
एमएसडीई की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले कौशल उद्योग की आवश्यकताओं और प्रौद्योगीकीय प्रगति के अनुरूप हों, जिससे कौशल-प्रशिक्षित उम्मीदवारों की रोजगार क्षमता में सुधार हो सके, यह सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी उद्योग निकायों को अवार्डिंग बॉडीज (एबीएस) और/या मूल्यांकन एजेंसियों (एए) के रूप में मान्यता देता है।
- अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार चिन्हित ट्रेड़ों के साथ संरेखित करें तथा उद्योग से मान्यता प्राप्त करें। एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 9026 योग्यताओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 2599 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं तथा 6427 योग्यताएं संग्रहीत हैं।
- एनसीवीईटी ने राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम (एनपीएआई) कौशल ढांचा विकसित किया है, जो एआई, डेटा साइंस और उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय रोडमैप, संरचना और दिशानिर्देशों की रूपरेखा तैयार करता है और मानकीकृत, उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या विकसित करने के लिए मूलभूत दस्तावेज के रूप में कार्य करता है।
- प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) आईटीआई के छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी समझौता ज्ञापन योजना और प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है।
- राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, एडब्ल्यूएस, ऑटोडेस्क आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
- पीएमकेवीवाई के तहत, नई पीढ़ी/भविष्य के कौशल से संबंधित जॉब रोल्स को विशेष रूप से उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप, खासकर एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में, आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
- डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क तकनीशियन, एआई प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- उद्योग के लिए तैयार कार्यबल को उभरते आर्थिक अवसरों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में अहमदाबाद और मुंबई में दो (02) भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं।
सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में कौशल की कमी को दूर करने के लिए बनाए और लागू किए गए हैं। वहीं, एमएसडीई ने स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है, जो कौशल संवर्धन के लिए एक व्यापक और सुलभ प्लेटफॉर्म है। यह देश के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशल पाठ्यक्रम, रोजगार के अवसर और उद्यमशीलता सहायता प्रदान करता है। एसआईडीएच (सिद्ध) के माध्यम से, उम्मीदवार अपनी पसंद के भौगोलिक क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षुता के अवसरों तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, प्रमाणित उम्मीदवारों को रोजगार और शिक्षुता के अवसर प्रदान करने के लिए कौशल मेले और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) आयोजित किए गए हैं। पूरे देश में। जेएसएस के तहत, उद्यमशीलता और आजीविका संवर्धन के लिए उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करने हेतु आजीविका प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है।
यह जानकारी आज लोक सभा में कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री जयन्त चौधरी द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2247027)
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