कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
एनएसक्यूएफ का कार्यान्वयन और परिणाम
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 4:00PM by PIB Delhi
भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के माध्यम से, कौशल विकास केंद्रों/संस्थानों आदि के व्यापक नेटवर्क और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई\) द्वारा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के जरिए तमिलनाडु राज्य सहित देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करना है।
भारत सरकार ने दिसंबर 2013 में, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) शुरू किया और जून 2023 में इसे तर्कसंगत बनाकर अधिसूचित किया गया। एनएसक्यूएफ एक परिणाम और योग्यता-आधारित ढांचा है जो ज्ञान, कौशल, योग्यता और जिम्मेदारी के स्तरों की एक श्रृंखला के अनुसार योग्यताओं को व्यवस्थित करता है। ये स्तर अधिगम परिणामों के संदर्भ में परिभाषित हैं जिन्हें शिक्षार्थी को औपचारिक, गैर-औपचारिक या अनौपचारिक अधिगम के माध्यम से प्राप्त करना आवश्यक है। इसमें अकादमिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशलीकरण तथा प्रासंगिक अनुभव और अर्जित प्रवीणता/पेशेवर स्तर सहित अनुभवात्मक शिक्षा शामिल हो सकती है, जो मूल्यांकन के अधीन है। एनएसक्यूएफ को स्तर 1 से 8 में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक स्तर कौशल, जटिलता, ज्ञान, जिम्मेदारी और स्वायत्तता के एक अलग स्तर का प्रतिनिधित्व करता है।
एनएसक्यूएफ विभिन्न शैक्षणिक आयामों, कौशल विकास और अनुभवात्मक शिक्षा सहित व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल अधिगम को एकीकृत करने और मान्यता प्रदान करने का प्रावधान करता है, जिसमें प्रासंगिक अनुभव और अर्जित दक्षता/पेशेवर स्तर शामिल हैं, जो मूल्यांकन के अधीन हैं। यह व्यावसायिक और सामान्य शिक्षा के बीच शैक्षणिक समानता स्थापित करता है, साथ ही उनके भीतर और उनके बीच गतिशीलता को सक्षम बनाता है और सभी क्षेत्रों में इंटर्नशिप, शिक्षुता और कार्य-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से उद्योग और नियोक्ताओं के साथ घनिष्ठ साझेदारी के माध्यम से अधिगम को मान्यता देता है।
दिनांक 31.12.2025 तक, कुल 9549 योग्यताओं को एनएसक्यूएफ़ के अनुरूप और अनुमोदित किया गया है, जिनमें से 3122 योग्यताएं (एनओएस और एमसी सहित) सक्रिय और वैध हैं, जबकि 6427 योग्यताएं अब तक संग्रहीत की जा चुकी हैं। इन 3122 योग्यताओं में से 502 राष्ट्रीय व्यवसाय मानक (एनओएस) और 268 माइक्रो क्रेडेंशियल (एमसी) हैं। इन सक्रिय योग्यताओं में विभिन्न क्षेत्रों जैसे एआई/एमएल, बिग डेटा, आईओटी, ग्रीन एनर्जी, सेमी- कंडक्टर आदि से संबंधित 678 भावी योग्यताएं भी शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में और वर्तमान वर्ष में दिनांक 31.12.2025 तक भारत में लगभग 1.40 करोड़ उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से इस मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत 7.28 लाख उम्मीदवारों को तमिलनाडु राज्य में प्रशिक्षण दिया गया।
समय-समय पर किए जाने वाले कौशल अंतर अध्ययन विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक कौशल और कौशल अंतर के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। ये अध्ययन सरकार द्वारा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से किए जाने वाले उपायों का मार्गदर्शन करते हैं। सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) ने वर्ष 2019 से इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों में कौशल अंतर अध्ययन किए हैं, जिनसे मांग-आपूर्ति आकलन और जन शक्ति आवश्यकता अनुमान प्राप्त होते हैं।
इसके अलावा, देश में कौशल विकास की पहलों में समन्वय स्थापित करने और क्षेत्रीय कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, एमएसडीई की योजनाएं राज्य कौशल विकास मिशन (एसएसडीएम) और जिला कौशल समितियों (डीएससी) के माध्यम से राज्यों और जिलों की भागीदारी के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर केंद्रित हैं। डीएससी रोजगार के अवसरों वाले क्षेत्रों के साथ-साथ जिले में कौशलीकरण संबद्ध मांग की पहचान करते हैं और कौशल प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध सुविधाओं का पता लगाते हैं। सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में कौशल की कमियों को दूर करने के लिए तैयार और कार्यान्वित किए जाते हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को संरेखित करने और इस प्रकार कुशल मानव संसाधन की रोजगार क्षमता में सुधार करने के लिए, एमएसडीई द्वारा निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है जो तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करती है।
- ii. एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बोडीएस से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार पहचाने गए व्यवसायों के साथ मैप करें और उद्योग से मान्यता प्राप्त करें।
- संबंधित क्षेत्रों के अग्रणी उद्योग जगत के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदें (एसएससी) स्थापित की गई हैं, जो संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करती हैं।
- iv. एमएसडीई के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना और दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य आईटीआई के छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करना है।
- पीएमकेवीवाई के तहत, नए युग/भविष्य के कौशलों से संबंधित जॉब रोल्स को आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में,उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष रूप से तैयार किया गया है, ।
- vi. डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क तकनीशियन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, एडब्ल्यूएस आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
- अहमदाबाद और मुंबई में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस), उद्योग के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सुसज्जित उद्योग-तैयार कार्यबल का एक पूल बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
- ix. प्रमाणित उम्मीदवारों को रोजगार और शिक्षुता के अवसर प्रदान करने के लिए कौशल मेले और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) का आयोजन किया जाता है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में चरणबद्ध तरीके से सभी शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रमों को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ एकीकृत करने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा (एनसीआरएफ) प्राथमिक, स्कूली, उच्च और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को समाहित करने वाला एक व्यापक क्रेडिट संचय एवं हस्तांतरण ढांचा है। एनसीआरएफ शिक्षा के विभिन्न आयामों, जैसे अकादमिक, व्यावसायिक कौशल और अनुभवात्मक शिक्षा, प्रासंगिक अनुभव और अर्जित प्रवीणता/पेशेवर स्तरों के क्रेडिटाईजेशन को एकीकृत करता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने यह भी अनिवार्य किया है कि स्नातक/स्नातकोत्तर कार्यक्रम की कुल क्रेडिट आवश्यकता का 50% तक कौशल पाठ्यक्रमों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है, जिसमें एनएसक्यूएफ से संबंधित योग्यताएं भी शामिल हैं।
यह जानकारी आज लोक सभा में कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री जयन्त चौधरी द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।
*****
पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2246976)
आगंतुक पटल : 55