वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया
इस विधेयक में 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है
विधेयक में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और जीवन सुगमता को बढावा देने के लिए 67 संशोधनों का प्रावधान है
प्रविष्टि तिथि:
27 MAR 2026 6:38PM by PIB Delhi
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत किया।
यह विधेयक व्यापार करने में सुगमता और जीवन यापन में सुगमता को बढ़ावा देने के साथ-साथ विश्वास और आनुपातिक विनियमन पर आधारित शासन ढांचे को आगे बढ़ाने के सरकार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
विधेयक में निम्नलिखित प्रस्ताव हैं:
▪︎ 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन
▪︎ व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना
▪︎ जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए 67 प्रावधानों में संशोधन
इस विधेयक का उद्देश्य 1000 से अधिक अपराधों को सुव्यवस्थित करना, अप्रचलित और अनावश्यक प्रावधानों को हटाना और इस प्रकार समग्र नियामक वातावरण में सुधार करना है।
विधेयक में मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूकों के लिए आपराधिक दंडों की जगह नागरिक और प्रशासनिक प्रवर्तन तंत्रों की ओर बदलाव का प्रावधान है।
प्रमुख उपायों में शामिल हैं :
▪︎ कारावास प्रावधानों को आर्थिक दंड या चेतावनी से प्रतिस्थापित करना
▪︎ क्रमबद्ध प्रवर्तन तंत्र, जिसमें पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी भी शामिल है
▪︎ अपराध की प्रकृति के अनुपात में जुर्माने और दंडों का युक्तिकरण
कुशल और समयबद्ध प्रवर्तन सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में निम्नलिखित प्रावधान हैं:
• न्यायनिर्णय अधिकारियों की नियुक्ति
• अपीलीय प्राधिकरणों की स्थापना
इन उपायों का उद्देश्य मामलों का शीघ्र निपटान करना और न्यायालयों पर मुकदमेबाजी का बोझ कम करना है, साथ ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना है।
विधेयक में निम्नलिखित अधिनियमों के अंतर्गत 67 संशोधन भी प्रस्तावित हैं:
• नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994
• मोटर वाहन अधिनियम, 1988
इन संशोधनों का उद्देश्य नगरपालिका कराधान और वाहन संबंधी अनुपालन जैसे क्षेत्रों में प्रक्रियाओं को सरल बनाना और नागरिकों की सुविधा बढ़ाना है।
परामर्शात्मक दृष्टिकोण
प्रस्तावित सुधार एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया पर आधारित हैं, जिसमें अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठकें, नीति आयोग के अंतर्गत उच्च स्तरीय समिति की बैठकें, उद्योग संघों और नागरिक समाज संगठनों के साथ संवाद शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 पर गठित चयन समिति ने समिति के सदस्यों, संबंधित मंत्रालयों, बाहरी हितधारकों और विषय विशेषज्ञों के साथ 49 बैठकों वाली एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया का संचालन किया।
विश्वास-आधारित शासन
यह विधेयक सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत एक विश्वास-आधारित कानूनी और अनुपालन वातावरण को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां नागरिकों और व्यवसायों को मामूली उल्लंघन के लिए आपराधिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। आपराधिक दायित्व के बोझ को कम करके और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, इस विधेयक से अनुपालन में वृद्धि, निवेश को बढ़ावा और आर्थिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान विधेयक छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की सुधार पहल पर आधारित है। इस पहल की शुरुआत जन विश्वास अधिनियम, 2023 से हुई, जिसने 19 मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रशासित 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इसी क्रम में, जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को 18 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। 2025 के विधेयक में 10 मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रशासित 16 केंद्रीय अधिनियमों के 355 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव था और इसे एक चयन समिति को भेजा गया।
श्री तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 49 बैठकें कीं और 13 मार्च 2026 को लोकसभा को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने व्यापक विचार-विमर्श किया और विचाराधीन प्रावधानों के अलावा, उन्हीं अधिनियमों के अन्य प्रावधानों की भी जांच की और 62 अतिरिक्त केंद्रीय अधिनियमों में भी अपराध की श्रेणी से बाहर करने की सिफारिश की।
इसके बाद जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को वापस ले लिया गया और जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को आज लोकसभा में पेश किया गया।
निष्कर्ष
जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 भारत के नियामक ढांचे के आधुनिकीकरण और इसे वैश्विक स्तर पर स्वीकृत आनुपातिक एवं जोखिम-आधारित विनियमन के सिद्धांतों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि यह विधेयक देश में व्यापार करने और जीवनयापन करने में सुगमता लाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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पीके/केसी/जेएस / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2246281)
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