महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
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भारत सरकार ने मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण तथा संबंधित अपराधों से निपटने के लिए अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 लागू किया है


सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों के कार्यान्वयन हेतु एक समर्पित "निर्भया कोष" स्थापित किया है

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 12:09PM by PIB Delhi

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय राष्ट्रीय राजधानी और अन्य महानगरों में वेश्यावृत्ति की ओर रुख करने वाली महिलाओं की संख्या और पकड़ी गई महिला भिखारियों की संख्या के संबंध में केंद्रीकृत आंकड़े नहीं रखता है।

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करने, और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जांच एवं अभियोजन का दायित्व संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों पर है; वे मौजूदा कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सक्षम हैं।

भारत सरकार ने मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण तथा संबंधित अपराधों से निपटने के लिए अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (आईटीपीए) लागू किया है। यह अधिनियम व्यावसायिक यौन शोषण के संदर्भ में वेश्यावृत्ति को परिभाषित करता है और ऐसे शोषण को सुगम बनाने, बढ़ावा देने या उससे लाभ कमाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करता है। अधिनियम का कार्यान्वयन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों की जिम्मेदारी है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) 'मिशन शक्ति' नामक एक मिशन-आधारित योजना का संचालन करता है, जिसका उद्देश्य देशभर में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को सुदृढ़ करना है। मिशन शक्ति के दो मुख्य क्षेत्र हैं: महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'संबल' और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए 'समर्थ्य'। 'संबल' के अंतर्गत, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर एक ही छत के नीचे एकीकृत सहायता और सहयोग प्रदान करते हैं। यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और सलाह, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनोसामाजिक परामर्श सहित सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला भी प्रदान करता है। इसके अलावा, 'संबल' के अंतर्गत महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल) का उद्देश्य टेलीफोन शॉर्टकोड 181 के माध्यम से महिलाओं को पुलिस, वन स्टॉप सेंटर, अस्पताल, कानूनी सेवा प्राधिकरण आदि जैसे उपयुक्त अधिकारियों से जोड़कर 24x7x365 आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता प्रदान करना है। साथ ही, यह महिला कल्याण योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी भी प्रदान करता है। महिला हेल्पलाइन 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत है और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) के साथ एकीकृत है। 'समर्थ्य' योजना के अंतर्गत, शक्ति सदन संकटग्रस्त महिलाओं, जिनमें तस्करी पीड़ित महिलाएं भी शामिल हैं, के लिए एकीकृत राहत एवं पुनर्वास गृह प्रदान करता है। इसका उद्देश्य ऐसी कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण बनाना है, ताकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों से उबर सकें। संकटग्रस्त महिलाओं को राहत एवं पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाने के लिए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) ने 22 जनवरी, 2025 को मिशन शक्ति डैशबोर्ड (https://missionshakti.wcd.gov.in/) शुभारंभ किया। डैशबोर्ड में मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एएचटीयू), विभिन्न योजनाओं के नोडल अधिकारियों (ओएससी, महिला हेल्पलाइन, शक्ति सदन आदि) की अद्यतन सूचियां उपलब्ध हैं। पोर्टल पर सभी प्रमुख हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक पहुंच के लिए समेकित हैं। मिशन शक्ति डैशबोर्ड का डेटा मिशन शक्ति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी उपलब्ध है। संकट में फंसी कोई भी महिला अब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन दोनों के माध्यम से अपने निकटतम ओएससी (ऑक्यूपेशनल सपोर्ट सेंटर) में अपॉइंटमेंट बुक कर सकती है।

भारत सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों के कार्यान्वयन हेतु "निर्भया कोष" नामक एक समर्पित कोष स्थापित किया है। निर्भया कोष के अंतर्गत सभी परियोजनाएं/योजनाएं मांग आधारित हैं। यह कोष मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जैसे कि ईआरएसएस-112, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी), अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई सहित 8 प्रमुख शहरों में सुरक्षित नगर परियोजना, पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्क (डब्ल्यूएचडी), मानव तस्करी विरोधी इकाइयां (एएचटीयू), राज्य फोरेंसिक प्रयोगशालाओं (एसएफएसएल) में डीएनए विश्लेषण, साइबर फोरेंसिक और संबंधित सुविधाओं को सुदृढ़ करना, बलात्कार और पीओसीएसओ अधिनियम के अंतर्गत लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष पीओसीएसओ अदालतों सहित त्वरित विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की स्थापना आदि।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/एनजे


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