वित्‍त मंत्रालय
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आरबीआई, आईआरडीएआई और सेबी ने नागरिकों को बिना दावे वाली जमा राशि वापस दिलाने में मदद करने के लिए उपाय बढ़ाए


आसान दावा प्रक्रिया, डिजिटल पोर्टल और नियामक सुधार तक पहुंच, पारदर्शिता और दावों के तेजी से निपटान को बेहतर करते हैं

“आपकी पूंजी, आपका अधिकार” राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत 22.95 लाख दावों में ₹5,777 करोड़ की बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियां वापस की गईं

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 4:06PM by PIB Delhi

वित्तीय क्षेत्र के नियामक निकाय, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचित किया कि 28.02.2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के माध्यम से आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) कोष में हस्तांतरित की गई गैर प्रतिबंधित राशि ₹60,518 करोड़ (31.1.2026 तक) है। इसके साथ ही, बीमाकर्ताओं के पास बकाया गैर प्रतिबंधित बीमा राशि ₹8,973.89 करोड़ (28.2.2026 तक) है। साथ ही, सेबी के नियमों के अंतर्गत म्यूचुअल फंड में गैर प्रतिबंधित राशि का मूल्य ₹3,749.34 करोड़ (28.2.2026 तक) है।

 

सही दावेदारों की समय पर पहचान सुनिश्चित करने, बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों के मौजूदा भंडार के साथ-साथ उसमें होने वाली नई बढ़ोतरी को कम करने और नागरिकों के लिए दावा प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए, वित्तीय क्षेत्र नियामकों की ओर से कई उपाय किए गए हैं, जिनमें अन्य बिंदुओं के साथ निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. आरबीआई ने बैंकों के मृत ग्राहकों से संबंधित दावों के निपटान के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें अब आरबीआई के उत्तरदायी व्यापार संचालन निर्देश, 2025 के अंतर्गत समेकित किया गया है। इसके साथ ही, 1.10.2025 से एक प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है, जिसके अंतर्गत दावों के सफल निपटान पर बिना दावे वाली जमा राशि का 5% से 7.5% (एक सीमा के अधीन) का भुगतान किया जाएगा। बैंकों को जमाकर्ताओं, उनके नामित लोगों या कानूनी वारिसों का पता लगाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाने, बिना दावे वाली जमाओं की सूची प्रकाशित करने और जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी गई है। बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत बैंक खातों में एकाधिक नामांकन की सुविधा दी गई है, जिसमें चार तक क्रमिक और एक साथ नामांकन शामिल हैं। इसके साथ ही, भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने बैंकों के एक समर्पित पोर्टल के जरिए लावारिस जमाओं के निपटान के लिए एक सामान्य आवेदन पत्र और मानक कार्यान्वयन प्रक्रिया (एसओपी) शुरू की है।
  2. आईआरडीएआई ने सूचित किया कि प्रस्तावक और नामांकित व्यक्ति का विवरण एकत्र करना अनिवार्य है और इसे प्रस्ताव चरण में ही इकट्ठा करना आवश्यक है। बीमाकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने ग्राहकों से नियमित रूप से संपर्क करने के लिए सभी संभव उपाय करें, जिसमें दावों की देय तिथि के बारे में अग्रिम सूचना भेजना और बकाया राशि के सही प्राप्तकर्ता का पता लगाने के प्रयासों को बेहतर करना और उसका कुशल वितरण सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), आम तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और जागरूकता वीडियो आईआरडीएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
  3. सेबी ने हस्तांतरण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें नामांकन को प्रोत्साहन देना, ₹5 लाख तक के दावों के लिए सरलीकृत दस्तावेजीकरण और कई परिस्थितियों के लिए आवश्यक प्रपत्रों और दस्तावेजों सहित विस्तृत दिशानिर्देशों की उपलब्धता शामिल है। ये दिशानिर्देश एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, 27.06.2024 को जारी सेबी के म्यूचुअल फंड संबंधी मास्टर सर्कुलर के अनुसार, एएमसी को नामांकित व्यक्ति/ संयुक्त धारक के दावों के लिए तस्वीर-आधारित प्रोसेसिंग लागू करनी होगी, जिससे प्रक्रिया में लगने वाले समय में सुधार हो सके और निवेशकों को हस्तांतरण प्रक्रिया में सहायता के लिए एक समर्पित हेल्प डेस्क और वेबपेज तैयार करना होगा।

 

इसके साथ ही, नागरिकों को उनकी बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों का पता लगाने और उन पर दावा करने में सरलीकृत तरीके से सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, वित्तीय सेवाएं विभाग ने आरबीआई, सेबी और आईआरडीएआई की सम्मिलन से अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान "आपकी पूंजी, आपका अधिकार" शीर्षक से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। 748 जिलों में विशेष शिविर आयोजित किए गए और 28.2.2026 तक, 22.95 लाख दावों से संबंधित ₹5,777 करोड़ की बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियां उनके सही मालिकों को वापस कर दी गई हैं।

 

डीईए फंड योजना, 2014 के अनुसार, बैंकों को उन खातों में जमा राशि को डीईए फंड में स्थानांतरित करना आवश्यक है, जिन पर 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इसके साथ ही, जमाकर्ताओं को देय लावारिस जमा राशि की कुल राशि, जिसे डीईए फंड में स्थानांतरित किया गया है, संबंधित बैंकों की आकस्मिक देयता (असंतुलन पत्रक मद के रूप में) का हिस्सा है।

 

आरबीई ने केंद्रीकृत वेब पोर्टल उद्गम (अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स- गेटवे टू एक्सेस इन्फॉर्मेशन) तैयार किया है, जो पंजीकृत उपयोगकर्ताओं को एक ही स्थान पर कई बैंकों में बिना दावे वाले जमा/ खातों की खोज करने की सुविधा प्रदान करता है। आरबीआई ने सूचित किया कि 1.3.2026 तक उदगम पोर्टल पर 18.86 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।

 

आईआरडीएआई का बीमा भरोसा पोर्टल और सेबी का मित्रा प्लेटफॉर्म क्रमशः बिना दावे वाली बीमा राशि और म्यूचुअल फंड की राशि का पता लगाने के लिए तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, आरबीआई ने एक एकीकृत वेब पोर्टल तैयार करने के लिए एक अंतर-नियामक कार्य समूह का गठन किया है, जिससे नागरिक अपनी बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों को खोज सकें और उन पर दावा कर सकें।

 

यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में दी।

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पीके/केसी/एमएम


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