रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
सरकार ने डीबीटी के माध्यम से उर्वरक सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की
सरकार ने उर्वरक की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े प्रवर्तन उपायों पर जोर दिया
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 2:49PM by PIB Delhi
केन्द्र सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के तहत उर्वरक सब्सिडी के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया एस. पटेल ने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली ने 2017-18 में अपनी शुरूआत से अब तक 14.72 करोड़ लाभार्थियों को लाभ पहुंचा है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के लिए 2,01,961.50 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिनमें से 16 मार्च, 2026 तक 1,92,857.77 करोड़ रुपये का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।
जमाखोरी, हेराफेरी और कालाबाजारी के मुद्दों के संदर्भ में उर्वरकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत ‘आवश्यक वस्तु’ घोषित किया गया है तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत अधिसूचित किया गया। राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उक्त कदाचारों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
किसानों को रियायती उर्वरक की बिक्री खुदरा विक्रेताओं के स्तर पर स्थापित प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) डिवाइस के माध्यम से आधार-आधारित प्रमाणीकरण द्वारा की जाती है। वर्तमान में प्रति खरीदार प्रति माह 50 बोरी की सीमा निर्धारित है, यानी प्रति खरीदार प्रति सीजन कुल 300 बोरी। खरीदार के लिए पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से पीओएस एप्लिकेशन को उन्नत किया गया है, जो अब मासिक और मौसमी सीमा के सापेक्ष खरीदार द्वारा की गई पिछली खरीदारी की मात्रा को प्रदर्शित करता है।
ये उपाय किसानों के हितों की रक्षा करने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने और सब्सिडी वितरण में जवाबदेही बनाये रखने के सरकार के संकल्प को उजागर करते हैं।
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पीके/केसी/आईएम/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2244805)
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