कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
100 जिलों पर विशेष ध्यान: भारत के अगले कृषि विस्तार को गति देगी धन-धान्य कृषि योजना
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 6:12PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (डीडीकेवाई) के अंतर्गत आने वाले 100 जिलों की पहचान कम फसल उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वितरण जैसे तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर की गई है।
डीडीकेवाई योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और सतत् कृषि पद्धतियों को अपनाने को बढ़ावा देना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद के भंडारण की व्यवस्था को मजबूत करना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना और दीर्घकालिक व अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है।
डीडीकेवाई जिलों की जिला कार्य योजना (डीएपी) को ‘जिला धन-धान्य कृषि योजना समिति’ द्वारा तैयार और कार्यान्वित किया जाता है। ये योजनाएं 11 विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं, राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के समन्वय से बनाई जाती हैं। डीएपी का उद्देश्य स्थानीय बाधाओं की पहचान करना और एमआईडीएच और आरकेवीवाई सहित प्रासंगिक योजनाओं के समन्वय के माध्यम से उनको दूर करना है। जलवायु-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना और संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई व फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे जैसी जलवायु-स्मार्ट परिसंपत्तियों के सृजन करने जैसे विशिष्ट हस्तक्षेपों को भी इन कार्य योजनाओं में शामिल किया जा सकता है।
जिला डीडीकेवाई समितियां, जिनकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करते हैं, धन-धन कृषि योजना (डीएपी) तैयार करते समय परामर्श और अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करती हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी निगरानी के लिए क्रमश: ‘राज्य धन-धान्य कृषि योजना समिति’ और ‘राष्ट्रीय कार्यकारी एवं राष्ट्रीय निगरानी समितियां’ गठित की गई है।
इसके अलावा प्रत्येक डीडीकेवाई जिले के लिए केंद्रीय नोडल अधिकारी (सीएनओ) भी नियुक्त किये गये हैं, जो क्षेत्रीय दौरा करेंगे और जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा व निगरानी करेंगे।
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आईएम/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2244675)
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