सहकारिता मंत्रालय
सहकारी संस्थाओं को अनुदान
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 5:27PM by PIB Delhi
दुग्ध संघ, सहकारी बैंक, कृषि उपज मंडी समितियां (एपीएमसी) और राज्य परिसंघ आदि राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हैं । राज्य सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से, इन सहकारी समितियों को उनके संबंधित नियमों और विनियमों के अनुसार अनुदान और सहायता के अन्य रूपों सहित वित्तीय सहायता प्रदान करती है । इसके अतिरिक्त, भारत सरकार विभिन्न केंद्रीय क्षेत्रक और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं जैसे कि राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी), आत्मनिर्भरता अभियान, वहनीय परिवहन की दिशा में संधारणीय वैकल्पिक मिशन(सतत), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) आदि के माध्यम से सहकारी समितियों को लाभ प्रदान करती है ।
सहकारी संस्थानों पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की प्रयोज्यता अधिनियम की धारा 2 (एच) द्वारा शासित होती है जिसके अधीन केवल वे संस्थान जो उपयुक्त सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित होते हैं, इसके क्षेत्राधिकार में आते हैं ।
मौजूदा कानून के अनुसमर्थन द्वारा और सतानवेवां संविधान संशोधन के उपबंधों को अंतर्विष्ट करके बहुराज्य सहकारी समितियों (बैंकों सहित) में अन्य बातों के साथ-साथ शासन सशक्तीकरण, पारदर्शिता में वृद्धि, जवाबदेही में बढ़ोतरी और निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार, इत्यादि हेतु बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम और नियम, 2023 को क्रमश: दिनांक 03.08.2023 और दिनांक 04.08.2023 को अधिसूचित किया गया है । सहकारी समितियों के कार्यकरण में पारदर्शिता में वृद्धि के लिए उपर्युक्त संशोधन के माध्यम से अनेक उपबंध किए गए हैं जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं:
- बहुराज्य सहकारी समितियों में समयबद्ध, नियमित और पारदर्शी निर्वाचन कराने के लिए सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण का उपबंध शामिल किया गया है ।
- सदस्यों की शिकायतों के निवारण हेतु एक तंत्र प्रदान करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा सहकारी ऑम्बड्समैन की नियुक्ति ।
- पारदर्शिता में सुधार हेतु बहुराज्य सहकारी समितियों द्वारा सदस्यों को सूचना प्रदान करने के लिए सूचना अधिकारी की नियुक्ति ।
- पारदर्शिता में वृद्धि हेतु शीर्ष बहुराज्य सहकारी समितियों के संपरीक्षण रिपोर्टों को संसद में प्रस्तुत किया जाना ।
- लेखांकन और संपरीक्षा में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा बहुराज्य सहकारी समितियों के लेखांकन और संपरीक्षा मानकों का निर्धारण ।
- शासन और पारदर्शिता में सुधार हेतु बहुराज्य सहकारी समितियों की वार्षिक रिपोर्ट में बोर्ड के ऐसे निर्णयों को शामिल करना जो सर्वसम्मति से न लिए गए हों ।
- केंद्रीय सरकार द्वारा थ्रिफ्ट और क्रेडिट का व्यवसाय करने वाली बहुराज्य सहकारी समितियों के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों (तरलता, जोखिम, आदि) का निर्धारण ।
- बहुराज्य सहकारी समितियों में परिवारवाद और पक्षपात की रोकथाम हेतु किसी बहुराज्य सहकारी समिति का निदेशक उन विचार-विमर्शों में उपस्थित नहीं होगा या उन मामलों में मतदान नहीं करेगा जहां वह स्वयं या उसके परिजन हितबद्ध पक्ष हों ।
- शासन में सुधार के लिए निदेशकों की अयोग्यता के अतिरिक्त आधार बनाए गए हैं ।
- सुरक्षित निवेश और औपनिवेशिक युग से संबंधित प्रतिभूतियों को हटाने के लिए बहुराज्य सहकारी समितियों द्वारा निधियों के निवेश के उपबंधों को पुन:परिभाषित किया गया है ।
- अधिक वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के लिए बहुराज्य सहकारी समितियों के बोर्ड द्वारा अन्य गठित समितियों के साथ संपरीक्षा और आचार समिति का गठन किया जाएगा ।
- शासन सशक्तीकरण हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की शर्तों को विनिर्दिष्ट किया गया है ।
- बहुराज्य सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक निर्णयन को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की बैठकों के लिए गणपूर्ति को विनिर्दिष्ट किया गया है ।
- यदि केंद्रीय पंजीयक को यह सूचना मिलती है कि कपटपूर्ण तरीके से या किसी गैरकानूनी प्रयोजन से व्यवसाय किया जा रहा है तो वह जांच पड़ताल करा सकता है ।
- यदि किसी बहुराज्य सहकारी समिति द्वारा दुर्व्यपदेशन (misrepresentation), कपट, इत्यादि से पंजीकरण प्राप्त किया गया हो तो सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् के उसके परिसमापन का उपबंध किया गया है ।
- बहुराज्य सहकारी समितियों के सामुहिक हितों के विरुद्ध सदस्यों को कार्य करने से हतोत्साहित करने के लिए बहुराज्य सहकारी समिति के किसी निष्कासित सदस्य की निष्कासन अवधि को 1 वर्ष से बढ़ा कर 3 वर्ष कर दिया गया है ।
- केवल कुछ ही सदस्यों द्वारा समिति के संसाधनों का लाभ लेने से रोकने के लिए, सहायक संस्थान के रूप में उन संस्थानों पर विचार नहीं किया जाएगा जिनमें बहुराज्य सहकारी समितियों के सदस्यों या उनके परिजनों द्वारा अधिसंख्य इक्विटी शेयर धारित किए गए हैं ।
- 500 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर/जमा वाली बहुराज्य सहकारी समितियों के लिए केंद्रीय पंजीयक द्वारा अनुमोदित संपरीक्षकों के पैनल द्वारा कॉनकरंट संपरीक्षा का उपबंध शामिल किया गया है । कॉनकरंट संपरीक्षण से धोखाधड़ी या अनियमितताएं, यदि कोई हो, का जल्द पता लग सकेगा और तदनुसार तत्काल सुधार किया जा सकेगा ।
बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 70 के उपबंधों के अनुसार, प्रत्येक बहुराज्य सहकारी समिति को प्रत्येक वार्षिक साधारण बैठक में एक संपरीक्षक या संपरीक्षकों को नियुक्त करना आवश्यक है । ऐसे संपरीक्षकों या संपरीक्षक प्रतिष्ठानों का चयन केंद्रीय पंजीयक द्वारा अनुमोदित पैनल से किया जाना आवश्यक है । ऐसे नियुक्त संपरीक्षक को उस वित्तीय वर्ष जिससे लेखा संबंधित है, की समाप्ति से छह माह के भीतर बहुराज्य सहकारी समिति को संपरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करनी आवश्यक है ।
इसके अलावा, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 72 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बहुराज्य सहकारी समिति के संपरीक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हता प्राप्त नहीं होगा जब तक कि वह चार्टर्ड एकाउंटेंट अधिनियम, 1949 के अभिप्राय से चार्टर्ड एकाउंटेंट न हो ।
सूचना का अधिकार अधिनियम के मौजूदा उपबंधों में पहले से ही ऐसी संस्थाएं शामिल हैं जो सरकार द्वारा पर्याप्त वित्तपोषित मानदंडों को पूरा करती हैं । इसके अलावा, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 (यथासंशोधित 2023) की संशोधित धारा 106 के अधीन सभी समिति के सदस्यों को समिति के कारबार और प्रबंधन से संबंधित सूचना प्रदान करने के लिए बहुराज्य सहकारी समितियों द्वारा सहकारी सूचना अधिकारी की नियुक्ति का उपबंध किया गया है।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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AK/AP
(रिलीज़ आईडी: 2244582)
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