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विद्युत मंत्रालय
देश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की पहल
प्रविष्टि तिथि:
23 MAR 2026 4:54PM by PIB Delhi
विद्युत समवर्ती सूची में आती है इसलिए उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति एवं वितरण कार्य राज्य सरकार/वितरण कंपनियों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के नियम (10) में यह प्रावधान है कि वितरण लाइसेंसधारी सभी उपभोक्ताओं को 24x7 बिजली की आपूर्ति करेगा। हालांकि, आयोग कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति के घंटे कम कर सकता है। ये नियम सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित सभी क्षेत्रों पर लागू होते हैं।
भारत सरकार ने पूरे देश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित पहल की हैं:
- 2014 से अब तक 2,96,388 मेगावाट उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है, जिससे हमारा देश बिजली की कमी से बिजली आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हुआ है। जनवरी 2026 में कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 5,20,511 मेगावाट है।
- 2014 से अब तक 2,12,325 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) पारेषण लाइनें, 8,98,375 एमवीए रूपांतरण क्षमता और 84,390 मेगावाट अंतर-क्षेत्रीय क्षमता जोड़ी गई है।
- वितरण क्षेत्र में, डीडीजीजेवाई, सौभाग्य और आईपीडीएस योजनाओं के अंतर्गत 1.85 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को लागू किया गया, जिनमें 2,927 नए सबस्टेशन जोड़े गए और 3,965 मौजूदा सबस्टेशनों का उन्नयन किया गया। 6,96,302 वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए, 7,833 मिश्रित लोड फीडरों का फीडर पृथक्करण किया गया और 8.4 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) एचटी और एलटी लाइनें जोड़ी/अपग्रेड की गईं। डीडीजीजेवाई, सौभाग्य और आईपीडीएस योजनाएं 31.03.2022 को बंद कर दी गईं।
- राज्यों द्वारा वितरण कंपनियों को गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति में सहायता करने के प्रयासों को पूरक बनाने के लिए, आरडीएसएस के अंतर्गत नुकसान कम करने वाले अवसंरचना और स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए 2.83 लाख करोड़ रुपये के वितरण अवसंरचना कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है।
विद्युत मंत्रालय, राज्य सरकारों एवं वितरण कंपनियों के समन्वित प्रयासों के कारण, कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक (एटी एंड सी) घाटा वित्त वर्ष 2021 में 21.91% से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 15.04% हो गया है। एटी एंड सी घाटे में कमी से विद्युत कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे वे प्रणाली का बेहतर रखरखाव कर सकेंगी और आवश्यकतानुसार विद्युत खरीद सकेंगी, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत बिजली वित्त वर्ष 2015 में 12.5 घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 22.6 घंटे हो गई है। शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 23.6 घंटे हो गई है।
राज्य वितरण उपयोगिताओं की वित्तीय देनदारियां संबंधित राज्य सरकारों की आकस्मिक देनदारियां हैं और उन्हें इसी रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। हालांकि, भारत सरकार विभिन्न पहलों के माध्यम से वितरण कंपनियों के वित्तीय एवं परिचालन प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए उनका समर्थन कर रही है। कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:
- पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) वर्ष 2021 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य वित्तीय रूप से चिरस्थायी एवं परिचालन रूप से कुशल वितरण क्षेत्र के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता में सुधार लाना है। इस योजना के अंतर्गत धनराशि का आवंटन राज्यों/वितरण इकाइयों के वित्तीय एवं परिचालन मापदंडों पर प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, स्मार्ट मीटरिंग कार्यों से विद्युत कंपनियों को सटीक लेखांकन के माध्यम से अपने कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक नुकसान में कमी लाने में मदद मिलेगी। आरडीएसएस के अंतर्गत जारी की गई धनराशि का राज्यवार विवरण अनुलग्नक 1 में दिया गया है।
- राज्य सरकारों को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.5% के बराबर अतिरिक्त उधार लेने की सुविधा प्रदान की गई है, जो इस शर्त पर आधारित है कि वे विद्युत क्षेत्र में विशिष्ट सुधार करेंगे, जिसमें वितरण उपयोगिताओं के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार शामिल है।
- राज्य के स्वामित्व वाली विद्युत कंपनियों को ऋण स्वीकृत करने के लिए अतिरिक्त विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित किए गए हैं, जो निर्धारित शर्तों के अनुरूप विद्युत वितरण कंपनियों के प्रदर्शन पर आधारित हैं।
- ईंधन एवं विद्युत खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) और लागत-अनुरूप टैरिफ के कार्यान्वयन के लिए नियम इस प्रकार तैयार किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विद्युत आपूर्ति के लिए सभी विवेकपूर्ण लागतें ग्राहकों तक पहुंच सके।
- उचित सब्सिडी लेखांकन एवं समय पर भुगतान के लिए नियम और मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।
ट्रांसमिशन प्रणालियों की योजना पहले से ही बनाई जाती है और राष्ट्रीय ग्रिड को लगातार मजबूत किया जाता है, जिसमें बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का पूरे देश में निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करना भी शामिल है। जनवरी 2026 तक, चालू की गई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 263 गीगावाट है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित 10 राज्यों में राज्यान्तर्गत ट्रांसमिशन परियोजना के रूप में हरित उर्जा कॉरिडोर (जीईसी) को दो चरणों में, यानी जीईसी-I और जीईसी-II में लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी करना है। जिसमें से 26 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण हो चुका है। इसके अलावा, अंतर-राज्यीय और राज्यान्तर्गत ट्रांसमिशन प्रणालियों के माध्यम से 2030 तक 500 गीगावाट से अधिक और 2032 तक 600 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षमता (जीईसी-I और II सहित) को एकीकृत करने की योजना है।
राष्ट्रीय विद्युत योजना (एनईपी) (खंड-II ट्रांसमिशन) के अंतर्गत, ट्रांसमिशन नेटवर्क (220 किलोवाट और उससे ऊपर) को 2031-32 तक 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) तक विस्तारित करने का अनुमान है, जिससे रूपांतरण क्षमता बढ़कर 2,345 गीगा वोल्ट एम्पीयर (जीवीए) हो जाएगी। अंतर-क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता को जनवरी 2026 तक 120 गीगा वाट से बढ़ाकर 2032 तक 168 गीगा वाट करने की योजना है।
केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने "अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली के लिए कनेक्टिविटी और सामान्य नेटवर्क पहुंच (तीसरा संशोधन) विनियम, 2025" के माध्यम से सौर-घंटे और गैर-सौर-घंटे कनेक्टिविटी शुरू की है, जिससे ट्रांसमिशन अवसंरचना का इष्टतम उपयोग संभव हो सकेगा और सौर, पवन और बैटरी भंडारण ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस) को मिलाकर हाइब्रिड नवीकरणीय परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, विद्युत मंत्रालय 3,760 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन के साथ 13,850 मेगावाट घंटे की बीईएसएस क्षमता स्थापित करने के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) योजना का संचालन कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े हिस्से के एकीकरण के लिए बीईएसएस को तैनात करना है। इसके अलावा, जून 2025 में, विद्युत प्रणाली विकास कोष (पीएसडीएफ) के माध्यम से समर्थन के लिए इस मंत्रालय द्वारा 30 गीगावाट घंटे की बीईएसएस क्षमता के विकास के लिए वीजीएफ योजना को मंजूरी प्रदान की गई।
इसके अलावा, गतिशील ग्रिड आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्नत फ्लेक्सिबल अल्टरनेटिंग करंट ट्रांसमिशन सिस्टम उपकरणों जैसे स्टैटिक सिंक्रोनस कम्पेनसेटर और सिंक्रोनस कंडेंसर के उपयोग पर विचार किया जा रहा है, जिसमें रिएक्टिव पावर कंपनसेशन, जडत्व समर्थन और शॉर्ट-सर्किट क्षमता में वृद्धि शामिल है, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण में वृद्धि के संदर्भ में।
अनुलग्नक 1
आरडीएसएस के अंतर्गत जारी की गई धनराशि का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण
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(Amount in Rs. Cr.)
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|
Sl.
No.
|
State/UTs
|
Sanctioned Cost of Smart Metering
|
Sanctioned Cost of Infrastructure Works
|
Total Sanctioned Outlay
|
Sanctioned GBS of Smart Metering Works
|
Sanctioned GBS for Infrastructure Works
|
Total GBS (Infra + Smart Metering)
|
Total Released under RDSS
Till
16.03.2026
|
|
1
|
A&NI
|
54
|
462
|
516
|
12
|
416
|
428
|
40.96
|
|
2
|
Andhra Pradesh
|
4,128
|
10,708
|
14,836
|
815
|
6,425
|
7,240
|
2456.11
|
|
3
|
Arunachal Pradesh
|
184
|
1,042
|
1,226
|
54
|
938
|
992
|
247.29
|
|
4
|
Assam
|
4,050
|
3,395
|
7,444
|
1,052
|
3,055
|
4,107
|
2391.18
|
|
5
|
Bihar
|
2,021
|
10,559
|
12,581
|
412
|
6,336
|
6,748
|
3484.87
|
|
6
|
Chhattisgarh
|
4,105
|
4,021
|
8,126
|
804
|
2,412
|
3,217
|
1168.78
|
|
7
|
Delhi
|
13
|
324
|
337
|
2
|
194
|
196
|
0.00
|
|
8
|
Goa
|
469
|
247
|
716
|
95
|
148
|
243
|
40.48
|
|
9
|
Gujarat
|
10,642
|
6,089
|
16,731
|
1,885
|
3,653
|
5,538
|
1910.82
|
|
10
|
Haryana
|
-
|
6,794
|
6,794
|
-
|
4,076
|
4,076
|
656.11
|
|
11
|
Himachal Pradesh
|
1,788
|
2,327
|
4,116
|
466
|
2,095
|
2,561
|
495.06
|
|
12
|
Jammu & Kashmir
|
1,064
|
5,034
|
6,098
|
272
|
4,531
|
4,803
|
2108.75
|
|
13
|
Jharkhand
|
858
|
3,468
|
4,326
|
191
|
2,081
|
2,272
|
569.4
|
|
14
|
Karnataka
|
-
|
45
|
45
|
-
|
27
|
27
|
5.34
|
|
15
|
Kerala
|
8,231
|
3,108
|
11,339
|
1,413
|
1,865
|
3,278
|
460.23
|
|
16
|
Ladakh
|
-
|
876
|
876
|
-
|
788
|
788
|
81.30
|
|
17
|
Madhya Pradesh
|
8,911
|
9,738
|
18,649
|
1,504
|
5,843
|
7,347
|
3343.46
|
|
18
|
Maharashtra
|
15,215
|
17,238
|
32,453
|
2,840
|
10,343
|
13,182
|
3776.73
|
|
19
|
Manipur
|
121
|
627
|
748
|
38
|
564
|
602
|
150.09
|
|
20
|
Meghalaya
|
310
|
1,232
|
1,542
|
86
|
1,109
|
1,195
|
297.72
|
|
21
|
Mizoram
|
182
|
322
|
503
|
61
|
290
|
351
|
98.85
|
|
22
|
Nagaland
|
208
|
466
|
674
|
60
|
419
|
479
|
114.08
|
|
23
|
Puducherry
|
251
|
84
|
335
|
56
|
51
|
107
|
14.30
|
|
24
|
Punjab
|
5,769
|
3,873
|
9,642
|
960
|
2,324
|
3,284
|
563.76
|
|
25
|
Rajasthan
|
9,715
|
18,693
|
28,408
|
1,686
|
11,216
|
12,902
|
2461.38
|
|
26
|
Sikkim
|
97
|
420
|
518
|
30
|
378
|
409
|
106.52
|
|
27
|
Tamil Nadu
|
19,235
|
9,568
|
28,803
|
3,398
|
5,741
|
9,139
|
1019.44
|
|
28
|
Telangana
|
-
|
120
|
120
|
-
|
72
|
72
|
35.65
|
|
29
|
Tripura
|
319
|
598
|
917
|
80
|
538
|
619
|
302.46
|
|
30
|
Uttar Pradesh
|
18,956
|
21,782
|
40,739
|
3,501
|
13,069
|
16,570
|
6603.12
|
|
31
|
Uttarakhand
|
1,106
|
2,371
|
3,477
|
310
|
2,134
|
2,444
|
613.91
|
|
32
|
West Bengal
|
12,670
|
7,223
|
19,893
|
2,089
|
4,334
|
6,423
|
897.73
|
|
|
Sub Total
|
1,30,671
|
1,52,854
|
2,83,525
|
24,173
|
97,464
|
1,21,638
|
36515.88
|
यह जानकारी केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
***
पीके/केसी/एके / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2244152)
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