कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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राष्ट्रीय शिक्षुता और प्रशिक्षण योजनाएँ

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 4:50PM by PIB Delhi

भारत सरकार, शिक्षु अधिनियम, 1961 के अंतर्गत, दो प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं का कार्यान्वयन करती है, जिनमें से एक है राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस), जिसे अगस्त 2016 में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा प्रारंभ किया गया और वर्ष 2022-23 से एनएपीएस-2 के रूप में जारी रखा गया, और दूसरी है राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस), जिसे वर्ष 1973 में शिक्षा मंत्रालय (एमओई) द्वारा प्रारंभ किया गया और वर्ष 2025-26 तक जारी रखने के लिए अनुमोदित किया गया। ये दोनों योजनाएँ मिलकर देश में शिक्षुता को बढ़ावा देती हैं। वर्ष 2025 में, एनएपीएस और एनएटीएस के अंतर्गत कार्यरत शिक्षुओं की संख्या क्रमशः 11.84 लाख और 5.23 लाख है। वर्ष 2025 के दौरान एनएपीएस और एनएटीएस के अंतर्गत राज्यवार (आंध्र प्रदेश सहित) शिक्षुओं की संख्या का ब्यौरा अनुबंध में दिया गया है।

दोनों योजनाओं में, ऑटोमोटिव, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा (बीएफएसआई), विद्युत (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सहित), इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी/आईटीईएस, जीवन विज्ञान, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला, उत्पादन और विनिर्माण, खुदरा, रबर, सेवा क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेशेवर सेवाएँ) और पर्यटन एवं आतिथ्य जैसे शीर्ष 13 क्षेत्रों में शिक्षुता में भागीदारी उल्लेखनीय रूप से मजबूत है। शिक्षुता प्रशिक्षण के तहत एमएसएमई की भूमिका प्रशिक्षुओं को कार्य-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना है। एनएपीएस-2 और एनएटीएस के तहत प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने वाले एमएसएमई सहित प्रतिष्ठानों की संख्या क्रमशः 25,423 और 16,400 है।

दोनों योजनाओं में, मुख्‍य 13 क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले उद्योगों में शिक्षुता में भागीदारी उल्लेखनीय रूप से मजबूत है, जिनमें ऑटोमोटिव, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा (बीएफएसआई), विद्युत (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सहित), इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी/आईटीईएस, जीवन विज्ञान, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला, उत्पादन और विनिर्माण, खुदरा, रबड़, सेवा क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेशेवर सेवाएँ) और पर्यटन एवं आतिथ्य शामिल हैं। शिक्षुता प्रशिक्षण के तहत एमएसएमई की भूमिका प्रशिक्षुओं को कार्य-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना है। एनएपीएस-2 और एनएटीएस के तहत प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने वाले एमएसएमई सहित प्रतिष्ठानों की संख्या क्रमशः 25,423 और 16,400 है।

एनएपीएस और एनएटीएस दोनों ही कार्यक्रम, 1961 के शिक्षुता अधिनियम के तहत नियुक्त प्रशिक्षुओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से आंशिक वजीफा सहायता प्रदान करके देश भर में शिक्षुता कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं। एनएपीएस के तहत प्रशिक्षुओं को दिए जाने वाले वजीफे में सरकार का हिस्सा निर्धारित न्यूनतम वजीफे का 25% (प्रति प्रशिक्षु अधिकतम 1,500 रुपये प्रति माह) तक सीमित है, जबकि एनएटीएस के तहत यह निर्धारित न्यूनतम वजीफे का 50% (प्रति प्रशिक्षु अधिकतम 4,500 रुपये प्रति माह) तक सीमित है। सरकार एनएपीएस के नामित व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय शिक्षुता प्रमाण पत्र (एनएसी) और एनएपीएस और एनएटीएस के वैकल्पिक व्यवसायों के लिए प्रवीणता प्रमाण पत्र (सीओपी) जारी करके सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रशिक्षुओं को मान्यता देती है।

 आंध्र प्रदेश सहित पूरे देश में शिक्षुता कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार निम्नलिखित उपाय लागू कर रही है। सीएसी की बैठक में परिषद ने अधिनियम के दायरे में डिग्री-आधारित शिक्षुता को प्रोत्साहित करने और ऑनलाइन एवं मिश्रित शिक्षा जैसे लचीले शिक्षण माध्यमों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षुता-आधारित डिग्री/डिप्लोमा कार्यक्रम (एईडीपी) शुरू करने को मंजूरी दी। इससे शिक्षुता को भारत और विदेश दोनों जगह ग्राहकों के स्थानों पर प्रशिक्षण प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, मानक विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान जैसे समावेशी उपाय भी लागू किए गए हैं। यदि नवप्रशिक्षुओं और कौशल प्रमाण पत्र धारक शिक्षुओं के लिए निर्धारित प्रशिक्षण स्थान भरे नहीं जा सकते हैं, तो संस्थान अन्य श्रेणियों के शिक्षुओं से इन्हें भर सकते हैं। शिक्षुता प्रशिक्षण का दायरा एनआईसी-2008 वर्गीकरण के अंतर्गत उभरते क्षेत्रों (जैसे, आईटी, जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा) को शामिल करने के लिए भी विस्तारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, परिषद ने चेन्नई, कानपुर, कोलकाता और मुंबई में मौजूदा बोर्डों के अलावा नए क्षेत्रीय शिक्षुता बोर्डों की स्थापना की सिफारिश की है। सीएसी के परामर्श से लिए गए इन निर्णयों को माननीय मंत्री द्वारा विधिवत अनुमोदित कर भारत के राजपत्र के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। एनएपीएस के तहत, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में शिक्षुता को बढ़ावा देने के लिए, 20.05.2025 को एक लक्षित पायलट पहल शुरू की गई थी, जिसके तहत एनईआर के उन उम्मीदवारों को, जो अपने मूल राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य में शिक्षुता कर रहे हैं, प्रति माह ₹1,500 तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है। यह एनएपीएस के तहत सरकार द्वारा दिए जाने वाले ₹1,500 तक के वजीफे के अतिरिक्त है।

एनएपीएस और एनएटीएस के तहत वर्ष 2025 के दौरान राज्यवार (आंध्र प्रदेश सहित) शिक्षुओं की संख्या का ब्यौरा नीचे दिया गया है:

अनुलग्नक

क्रमांक

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम

एनएपीएस के अंतर्गत नियुक्‍त शिक्षु

एनएटीएस के अंतर्गत नियुक्‍त शिक्षु

  1.  

अंडमान व निकोबार द्वीप समूह

222

18

  1.  

आंध्र प्रदेश

26,193

3,696

  1.  

अरुणाचल प्रदेश

165

17

  1.  

असम

8,811

1,721

  1.  

बिहार

6,855

16,565

  1.  

चंडीगढ़

1,732

2,053

  1.  

छत्तीसगढ

6,426

2,342

  1.  

दिल्ली

30,153

9,727

  1.  

गोवा

12,769

957

  1.  

गुजरात

1,09,832

15,817

  1.  

हरियाणा

80,573

44,274

  1.  

हिमाचल प्रदेश

10,672

2,350

  1.  

जम्मू और कश्मीर

1,249

471

  1.  

झारखंड

10,309

10,158

  1.  

कर्नाटक

1,10,555

27,456

  1.  

केरल

15,243

18,152

  1.  

लद्दाख

22

0

  1.  

लक्षद्वीप

8

2

  1.  

मध्य प्रदेश

31,871

6,777

  1.  

महाराष्ट्र

3,03,763

1,14,127

  1.  

मणिपुर

178

116

  1.  

मेघालय

276

39

  1.  

मिजोरम

272

72

  1.  

नागालैंड

25

42

  1.  

ओडिशा

13,195

28,279

  1.  

पुदुचेरी

5,861

748

  1.  

पंजाब

23,069

2,034

  1.  

राजस्थान

29,260

15,100

  1.  

सिक्किम

515

651

  1.  

तमिलनाडु

1,33,189

56,112

  1.  

तेलंगाना

45,520

35,604

  1.  

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

4,157

511

  1.  

त्रिपुरा

518

295

  1.  

उत्तर प्रदेश

1,00,553

21,706

  1.  

उत्तराखंड

29,014

9,172

  1.  

पश्चिम बंगाल

31,406

75,863

 

कुल

11,84,431

5,23,024

यह जानकारी कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/ केसी/ केजे


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